फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   The farmer entered immediately after opening the lid of the mentha tank

मेंथा टैंक का ढक्कन खोलकर तुरंत घुस गया था किसान, चली गई जान

Fri, 28 Oct 2022 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 28 Oct 2022 12:28 AM IST
विज्ञापन
The farmer entered immediately after opening the lid of the mentha tank
इसी मैंथा टैंक में हुआ हादसा।
ढक्कन खोलकर कुछ देर गैस निकलने का करते इंतजार तो बच जाती जान
विज्ञापन

अलापुर (बदायूं)। मेंथा प्लांट का टैंक लंबे समय तक बंद रहने से उसमें कई जहरीली गैस बन जाती हैं। उसमें बिना सुरक्षा के घुसना जानलेवा होता है। राजपाल ने भी जल्दबाजी की। वह ढक्कन हटाकर तुरंत टैंक में घुस गया था, जिससे वह जहरीली गैस की चपेट में आकर अपनी जान गवां बैठा।
ग्राम बेहटा यमन निवासी किसान राजपाल का मेंथा प्लांट भी करीब चार माह से बंद पड़ा था। टैंक के ऊपर ढक्कन भी लगा दिया गया था। मेंथा का तेल निकालने के बाद उसमें सिर्फ कूड़ा रह गया था। ग्रामीणों के मुताबिक, अक्सर किसान बरसात के बाद अपने मेंथा टैंक की साफ-सफाई करते हैं, जिससे उनका प्लांट खराब नहीं होता, उसमें जंक भी नहीं लगती। ऐसा ही राजपाल ने भी सोचा था, लेकिन उसने टैंक में बनने वाली गैस पर ध्यान नहीं दिया। उसने टैंक का ढक्कन हटाया और उसमें तुरंत ही घुस गया, जिससे उसे सांस लेना मुश्किल हो गया। टैंक में इतनी तेज गैस थी कि वह बाहर तक नहीं आ सका और कुछ ही पलों में वह बेहोश हो गया। भोजराज को भी पता था कि राजपाल जहरीली गैस की चपेट में आ गया है, लेकिन वह राजपाल की जान बचाना चाहता था। इस कोशिश में वह भी गैस की चपेट में आ गया।
विज्ञापन

मासूम बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
अलापुर। भैयादूज पर राजपाल के परिवार पर कहर बरपा। उसकी दो छोटी बेटियों विनीता (2) और छाया (4) के सिर से पिता का साया उठ गया तो वहीं उसकी पत्नी का सुहाग उजड़ गया। राजपाल के पिता निरोत्तम दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। राजपाल ही खेतीबाड़ी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। छह साल पहले उसकी बिनावर क्षेत्र से गीता देवी के साथ शादी हुई थी। उसके कोई बेटा नहीं था। परिवार को सबसे बड़ा दुख यही है कि उनके घर के कमाने वाले इंसान की मौत हो गई। अब घर में कोई व्यक्ति कमाने वाला नहीं है। मोहल्ले के लोग उनके दुख में शामिल होकर रात तक सांत्वना देते रहे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

बंद टैंक में बन जाती है मीथेन और कार्बन मोनो ऑक्साइड
जिला अस्पताल के डॉ. अमित वार्ष्णेय के अनुसार, अक्सर देखा गया कि किसी बंद कुएं, बंद घर या बंद टैंक में घुसने से लोगों की मौत हो जाती है। इसका कारण यह है कि टैंक में मीथेन गैस और कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस बन जाती है। यह गैस बहुत तेज होती है। गैस सीधे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर खून में मिली ऑक्सीजन को खत्म कर देती है। इसका फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। इससे व्यक्ति की कुछ देर में ही जान चली जाती है।

यह रखें सावधानी
- बंद टैंक में ढक्कन खोलकर तुरंत न घुसें
- टैंक हो या कुआं ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर ही घुसें
- टैंक में घुसने के दौरान मास्क लगा होना चाहिए
- मौके पर मददगार हों, तभी ऐसा काम करें, जिससे तुरंत मदद मिल सके
- बंद घर में अंगीठी जलाकर भी न रखें
- हादसा होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराएं
(डॉ. अमित वार्ष्णेय के अनुसार)
नौ साल पहले उसहैत में हुई थी तीन भाइयों की मौत
बदायूं। बृहस्पतिवार सुबह अलापुर क्षेत्र में हुए हादसे की तरह नौ साल पहले उसहैत इलाके में मिर्जापुर बिचौला में एक हादसा हुआ था। वर्ष 2013 में गांव के 22 वर्षीय उदयपाल, 25 वर्षीय वीरपाल और 28 वर्षीय ओमपाल अपने ही परिवार के मोतीलाल के मेंथा प्लांट पर अपना तुलसा निकलवाने पहुंचे थे। टैंक में पड़ा जाल निकालने के लिए सबसे पहले उदयपाल घुसा था। आठ फुट गहरे टैंक में घुसते ही वह बेहोश होकर गिर पड़ा था। उसे बाहर निकालने के लिए वीरपाल घुसे, फिर ओमपाल। तीनों बेहोश हो गए थे। जैसे तैसे ग्रामीणों उन्हें बाहर निकाला था, लेकिन तब तक तीनों की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed