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जिले की आबादी 36 लाख और फायर स्टेशन सिर्फ दो
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:44 PM IST
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अग्निकांडों का सीजन शुरू हो गया है और फायर ब्रिगेड अब भी संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। यह स्थिति तब है जब हर साल जिले में अग्निकांडों से भीषण तबाही होती है। फायर ब्रिगेड के पास संसाधनों का भारी अभाव है। 36.40 लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ दो फायर स्टेशन हैं। यहां भी संसाधन नहीं हैं।
हर साल अग्निकांडों के सीजन में जिले में होने वाली तबाही किसी से छिपी हुई नहीं है। पिछले साल कादरचौक थाने के गांव गुलाबगंज गनियाई में अग्निकांड में 125 घर जल गए थे। गांव में चार लोगों की जलने से मौत हो गई थी। पिछले महीने कादरचौक थाने का ही गांव पांडेय नगला भी अग्निकांड का दंश झेल चुका है। अग्निशमन विभाग के पास संसाधन और स्टाफ न होने से क्षति बढ़ जाती है। फायर स्टेशन के नाम पर एक स्टेशन जिला मुख्यालय पर है और एक स्टेशन सहसवान में है। सहसवान स्टेशन के पास एक फायर ब्रिगेड और एक वाटर पंप है। बदायूं स्टेशन पर दो फायर ब्रिगेड हैं। इतने बड़े जिले के लिए यह नाकाफी है। बिल्सी, दातागंज और बिसौली में लंबे समय से फायर स्टेशन खोलने की मांग हो रही है, लेकिन कार्रवाई शिफर है।
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बिसौली, दातागंज होते हैं ज्यादा प्रभावित
बदायूं। अग्निकांडों के दौरान राहत पहुंचने में सबसे ज्यादा देर बिसौली, दातागंज और हजरतपुर में होती है। ऐसे में यहां अग्निकांड विकराल रूप ले लेते हैं। दातागंज और हजरतपुर कटरी क्षेत्र के इलाके हैं। यहां भी लंबे समय से फायर स्टेशन खोले जाने की मांग चल रही है। हालांकि, फायर विभाग ने बिसौली और दातागंज में एक-एक फायर ब्रिगेड की ड्यूटी लगा दी है। यह फायर ब्रिगेड 30 जून तक यहां तैनात रहेंगी।
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ज्यादातर हाईडेंट हुए बंद
बदायूं। शहर में फायर ब्रिगेड में पानी भरने के लिए 18 हाईडेंट थे। इनमें से 10 अपना अस्तित्व खो चुके हैं। सिर्फ आठ हाईडेंट ऐसे हैं जो चालू हालत में हैं। ऐसे में कोई बड़ा अग्निकांड होने पर फायर ब्रिगेड को दिक्कत हो सकती है।
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ओवरहैड टैंक पर निर्भता बढ़ाई
बदायूं। फायर ब्रिगेड ने हाईडेंट बंद होने की स्थिति में फायर ब्रिगेड ने नगर पालिका के नलकूपों और ओवर हैड टैंकों पर निर्भरता को बढ़ा दिया है। चीफ फायर ऑफिीसर आरके वाजपेयी का कहना है कि नलकूप और ओवरहैड टैंक हाईडेंट के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक हैं।
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ये हैं संसाधन
फायर ब्रिगेड- 3
मिनी वाटर टैंकर-1
बोलेरो पंप-2
हाईडेंट-8
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नए फायर स्टेशन बनाने संबंधी प्रस्ताव शासन को गए हुए हैं। इन पर विचार चल रहा है। सुदूर इलाकों में समय से राहत पहुंचे इसके लिए ड्यूटियां बांट दी गई हैं। यह भी जरूरी है कि आग लगने की सटीक सूचना दें। ताकि अनावश्यक देरी न हो।
-आरके वाजपेयी, चीफ फायर ऑफीसर
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हर साल अग्निकांडों के सीजन में जिले में होने वाली तबाही किसी से छिपी हुई नहीं है। पिछले साल कादरचौक थाने के गांव गुलाबगंज गनियाई में अग्निकांड में 125 घर जल गए थे। गांव में चार लोगों की जलने से मौत हो गई थी। पिछले महीने कादरचौक थाने का ही गांव पांडेय नगला भी अग्निकांड का दंश झेल चुका है। अग्निशमन विभाग के पास संसाधन और स्टाफ न होने से क्षति बढ़ जाती है। फायर स्टेशन के नाम पर एक स्टेशन जिला मुख्यालय पर है और एक स्टेशन सहसवान में है। सहसवान स्टेशन के पास एक फायर ब्रिगेड और एक वाटर पंप है। बदायूं स्टेशन पर दो फायर ब्रिगेड हैं। इतने बड़े जिले के लिए यह नाकाफी है। बिल्सी, दातागंज और बिसौली में लंबे समय से फायर स्टेशन खोलने की मांग हो रही है, लेकिन कार्रवाई शिफर है।
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बिसौली, दातागंज होते हैं ज्यादा प्रभावित
बदायूं। अग्निकांडों के दौरान राहत पहुंचने में सबसे ज्यादा देर बिसौली, दातागंज और हजरतपुर में होती है। ऐसे में यहां अग्निकांड विकराल रूप ले लेते हैं। दातागंज और हजरतपुर कटरी क्षेत्र के इलाके हैं। यहां भी लंबे समय से फायर स्टेशन खोले जाने की मांग चल रही है। हालांकि, फायर विभाग ने बिसौली और दातागंज में एक-एक फायर ब्रिगेड की ड्यूटी लगा दी है। यह फायर ब्रिगेड 30 जून तक यहां तैनात रहेंगी।
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ज्यादातर हाईडेंट हुए बंद
बदायूं। शहर में फायर ब्रिगेड में पानी भरने के लिए 18 हाईडेंट थे। इनमें से 10 अपना अस्तित्व खो चुके हैं। सिर्फ आठ हाईडेंट ऐसे हैं जो चालू हालत में हैं। ऐसे में कोई बड़ा अग्निकांड होने पर फायर ब्रिगेड को दिक्कत हो सकती है।
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ओवरहैड टैंक पर निर्भता बढ़ाई
बदायूं। फायर ब्रिगेड ने हाईडेंट बंद होने की स्थिति में फायर ब्रिगेड ने नगर पालिका के नलकूपों और ओवर हैड टैंकों पर निर्भरता को बढ़ा दिया है। चीफ फायर ऑफिीसर आरके वाजपेयी का कहना है कि नलकूप और ओवरहैड टैंक हाईडेंट के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक हैं।
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ये हैं संसाधन
फायर ब्रिगेड- 3
मिनी वाटर टैंकर-1
बोलेरो पंप-2
हाईडेंट-8
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नए फायर स्टेशन बनाने संबंधी प्रस्ताव शासन को गए हुए हैं। इन पर विचार चल रहा है। सुदूर इलाकों में समय से राहत पहुंचे इसके लिए ड्यूटियां बांट दी गई हैं। यह भी जरूरी है कि आग लगने की सटीक सूचना दें। ताकि अनावश्यक देरी न हो।
-आरके वाजपेयी, चीफ फायर ऑफीसर