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Budaun News: अच्छा भाव मिलने से किसानों में बढ़ा सब्जी की खेती का क्रेज

Sun, 02 Feb 2025 01:10 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 02 Feb 2025 01:10 AM IST
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The craze for vegetable farming increased among farmers due to getting good prices
उझानी में पकने को तैयार आलू की फसल। संवाद
उझानी। जिले के किसान अब आलू के साथ ही सब्जियां उगाने में भी रुचि ले रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण नकद में अच्छा भाव मिलना है। पिछले पांच साल की बात करें तो जहां 30-40 हजार किसान ही सब्जियां उगाते थे अब इनकी संख्या दोगुना हो गई है। जिले की हरी सब्जियों की महक आसपास के जिलों के अलावा दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान तक पहुंच रही है।
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जिले में करीब पांच लाख किसान हैं। करीब पांच साल पहले जिले में किसानों में सब्जियों के प्रति ज्यादा रुझान नहीं था। वजह यह है कि सब्जियों में उन्हें ज्यादा फायदा नहीं होता था। पिछले तीन-चार साल में किसानों की सोच बदली है। वजह यह है कि सब्जी की दूसरे जिलों व राज्यों में मांग बढ़ी है व नकद भाव भी अच्छा मिल रहा है।
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जिले की मिट्टी में पोषक तत्वों की भरमार होने की वजह से हरी सब्जियों में फूल और पत्ता गोभी के अलावा शिमला मिर्च, बैंगन, टमाटर, मटर की अच्छी पैदावार के साथ गुणवत्ता बेहतर रही है। पिछले कुछेक सालों में बदायूं में होने वाली मौसमी सब्जियों की दिल्ली और उत्तराखंड में मांग बढ़ी है। इसके साथ ही राजस्थान में भी ये सब्जियां जा रही हैं।
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इसी सप्ताह इलाके की मटर भी कासगंज जिले की मोहनपुरा मंडी के जरिये पश्चिम बंगाल तक पहुंच रही है। थोक खरीदारों में जयचंद्र पाल ने बताया कि मटर और टमाटर की दिल्ली में अधिक मांग है। वहां से हिमाचल प्रदेश और पंजाब के लिए यहां की हरी सब्जियां भेजी जा रहीं हैं।



केले की खेती के प्रति भी किसानों का बढ़ा रुझान

केला की खेती करने वाले किसान महिपाल, राजवीर आदि बताते हैं कि छह-सात साल पहले तक केले की खेती सीमित रकबे में की जाती थी। जिले में उस वक्त रकबा दो सौ बीघा के करीब था। पिछले पांच साल के दौरान रकबा बढ़कर दोगुना से ज्यादा हो गया है। उझानी, बिसौली, बिल्सी और सहसवान क्षेत्र में भी केले की खेती होने लगी है। 500 बीघा से ज्यादा क्षेत्र में अब केले की खेती हो रही है। यहां से केला दिल्ली ज्यादा जाता है।


बदायूं की सब्जियां अब दिल्ली, आगरा, भरतपुर आदि जगह थोक मंडी में पहुंच रही है। उझानी, बिल्सी बेल्ट में किसानों में सब्जी उगाने के प्रति ज्यादा उत्साहित हैं। इस बार उझानी क्षेत्र में ही करीब 70 प्रतिशत किसानों ने आलू की फसल की है।- अमित अग्रवाल, आलू के थोक व्यापारी


उझानी क्षेत्र में केला के खेती करने वाले किसानों की संख्या दो-चार ही थी। पांच साल पहले उन्होंने खुद करीब 50 बीघा खेत में रोपाई के बाद केला की फसल की तो आसपास इलाके के किसानों ने भी गौर किया। अब, फायदा और रुझान बढ़ने से करीब सौ बीघा में केला हो रहा है। - आर्येंद्र यादव, केला उत्पादक




पिछले पांच साल में किसानों में सब्जी के प्रति काफी अच्छा रुझान रहा। जिले में पांच लाख किसान हैं। पिछले पांच सालों की बात करें तो सब्जी उगाने वाले किसानों की संख्या दोगुनी हो गई है। करीब 80 हजार से एक लाख किसान अब सब्जी कर रहा है। वजह यह है कि उसे अच्छा बाजार मिल रहा है। - डीके सिंह, जिला कृषि अधिकारी



लाल आलू की सीवन प्रजाति की बिहार-झारखंड में जबरदस्त मांग

उझानी। सब्जियों के राजा आलू की गुणवत्ता तो काफी दूर तक अपना असर दिखा चुकी है। लाल आलू की सीवन प्रजाति बिहार के गोपालगंज, छपरा, सीवान तो झारखंड में धनबाद ज्यादा जाती है।

सफेद आलू की चिप्सोना प्रजाति के दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान के अलावा आगरा, मथुरा, पीलीभीत और बरेली में भी कद्रदान कम नहीं हैं। मार्च में दिल्ली, आगरा और राजस्थान से यहां थोक व्यापारी आते हैं और गुणवत्ता परखने के बाद ट्रक लोड कराके भेज देते हैं। संवाद

उझानी में पकने को तैयार आलू की फसल। संवाद

उझानी में पकने को तैयार आलू की फसल। संवाद

उझानी में पकने को तैयार आलू की फसल। संवाद

उझानी में पकने को तैयार आलू की फसल। संवाद

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