फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   sugar mill

शेखूपुर सहकारी मिल की 1.60 लाख क्विंटल चीनी पर संकट

Wed, 16 Mar 2022 10:26 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 10:26 PM IST
विज्ञापन
sugar mill
शेखूपुर चीनी मिल। फाइल - फोटो : BADAUN
बदायूं। सहकारी क्षेत्र की इकलौती शेखूपुर चीनी मिल की 1.60 लाख क्विंटल से ज्यादा चीनी पर संकट मंडराने लगा है। पहले से कई करोड़ के घाटे के चल रही मिल को चीनी की खराब गुणवत्ता के कारण अब और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। चीनी की खराब गुणवत्ता के कारण यह हालात पैदा हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि चीनी मिल को हर माह करीब दस लाख रुपये गोदामों के किराये पर भी खर्च करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर चीनी मिल ने पिछले तीन साल से चीनी की बिक्री नहीं की है। दरअसल, खराब गुणवत्ता की चीनी की बाजार में मांग नहीं है। बड़ी कंपनियां भी यह चीनी नहीं खरीद रहीं। पिछले दिनों चीनी मिल से ग्वालियर की एक बिस्कुट कंपनी ने दो हजार बोरी चीनी का सौदा किया था। इससे पहले मिल से चीनी का सैंपल लिया गया। चीनी की गुणवत्ता खराब होने के कारण सैंपल फेल होने के कारण कंपनी ने खरीद रद्द कर दी। चीनी मिल को प्रति बोरा 3430 रुपये की दर से भुगतान मिलना था, लेकिन सौदा रद्द होने के कारण 68 लाख 60 हजार रुपये की चपत लगी। चीनी की गुणवत्ता बेहद खराब होने के कारण बाजार में भी यहां की चीनी की मांग नहीं है।
विज्ञापन

शेखूपुर मिल, चीनी का स्टॉक पीसीएफ के गोदामों में करती है। इसके बदले मिल को प्रति किलो छह रुपये के हिसाब से गोदाम किराया देना होता है। गोदामों में करीब 1.60 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक है। प्रति माह किराये के रूप में 9.60 लाख भुगतान करना पड़ रहा है। इसके साथ ही लंबे समय तक चीनी को स्टॉक में रखने के कारण उसका भाव भी गिर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
गिर रही रिकवरी, गुणवत्ता में भी सुधार नहीं
शेखूपुर चीनी मिल में रिकवरी लगातार गिर रही है। इसके साथ ही चीनी की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। दो वर्ष पहले तक यहां प्रति क्विंटल गन्ना पेराई पर रिकवरी करीब आठ किलोग्राम आती थी। चालू पेराई सत्र में रिकवरी गिर कर 7.2 किलोग्राम पर आ गई है। ऐसे में मिल को ज्यादा घाटा हो रहा है। दोयम दर्जे की चीनी की बाजार में मांग भी नहीं है। इतना ही नहीं मिल को हर महीने लाखों रुपये का ब्याज भी देना पड़ रहा है। मिल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि आने वाले दिनों में मिल को चलाना मुश्किल होगा।

-
चीनी मिल की मशीनें काफी पुरानी हैं, इस कारण रिकवरी और क्वालिटी दोनों पर असर पड़ रहा है। तीन साल से चीनी की बिक्री नहीं हुई है। प्रति किलो छह रुपये की दर से गोदाम किराया देना होता है। पूरे प्रदेश की सहकारी मिलों की यही स्थिति है। देश में मांग से ज्यादा चीनी का उत्पादन है। ऐसे में सरकार अब चीनी के स्थान पर एथेनॉल उत्पादन पर जोर दे रही है।
-राजीव कुमार रस्तोगी, जीएम शेखूपुर चीनी मिल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed