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बेटे को न्याय के लिए लड़ रहे थे लड़ाई
बदायूं।
Updated Thu, 09 Apr 2015 12:01 AM IST
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शहर में रिटायर्ड दंपति के मर्डर को लेकर पुलिस भी पशोपेश में है। आला कत्ल
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के लिए कई घंटे घर को खंगाला गया। यह बात तो पुलिस भी मान रही है कि
वारदात को अंजाम जिसने भी दिया हो वह है शातिर। 75 साल के वीरेंद्र गुप्ता
14 साल से अपने बेटे मुकुल गुप्ता को न्याय दिलाने के लिए सिस्टम से लड़ाई
लड़ रहे थे। उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। घटना के पीछे क्या कारण है? यह
तो जांच का विषय है, लेकिन आसपास के लोग दबी जुबान से यह बात कह रहे हैं
कि वीरेंद्र गुप्ता पर मुकुल एनकाउंटर मामले में फैसले के लिए दवाब बनाया
जा रहा था। कई बार मोहल्ले के लोगों से उन्होेंने इस बारे में जिक्र भी
किया।
वीरेंद्र गुप्ता के घर में इन दिनों रंगाई-पुताई का काम चल रहा था। मोहल्ले के लोगों की मानें तो चार दिन से घर के दोनों दरवाजे बंद थे। अक्सर वह कई-कई दिन के लिए अपनी बेटी या बेटे के पास चले जाया करते थे। ऐसे में लोगों को उनकी लगातार गैरमौजूदगी नहीं खली। बुधवार शाम मोहल्ले में बदबू फैली तो लोगों को शक हुआ। खबर मिलने पर पुलिस मुख्य दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी तो भयंकर बदबू ने उनके कदमों को रोक दिया। सभी लोग मुंह पर ढाटा बांध कर अंदर घुसे। घर खंगाला तो सब कुछ ठीक-ठाक था। दूसरा दरवाजा अंदर से भिड़ा था। जब पुलिस रसोई में पहुंची तो बुजुर्ग दंपति के शव पड़े थे। नजारा भयानक था। इतना तो पुलिस भी मान रही है कि मामला चोरी या लूट का नहीं हत्या का है, लेकिन बुजुर्ग दंपति की हत्या क्यों और किसने की इस सवाल का जवाब तलाशना पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं होगा।
मेन गेट पर मिले चार दिन के अखबार
बदायूं। वीरेंद्र गुप्ता के मेन गेट पर चार दिन के अखबार मिले हैं। यह अखबार हॉकर ने दरवाजे के नीचे से सरकाए थे। इससे साफ है कि बुजुर्ग दंपति की हत्या चार दिन पहले ही कर दी गई थी। पुलिस भी इस बात को मान रही है।
वीरेंद्र गुप्ता के घर में इन दिनों रंगाई-पुताई का काम चल रहा था। मोहल्ले के लोगों की मानें तो चार दिन से घर के दोनों दरवाजे बंद थे। अक्सर वह कई-कई दिन के लिए अपनी बेटी या बेटे के पास चले जाया करते थे। ऐसे में लोगों को उनकी लगातार गैरमौजूदगी नहीं खली। बुधवार शाम मोहल्ले में बदबू फैली तो लोगों को शक हुआ। खबर मिलने पर पुलिस मुख्य दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी तो भयंकर बदबू ने उनके कदमों को रोक दिया। सभी लोग मुंह पर ढाटा बांध कर अंदर घुसे। घर खंगाला तो सब कुछ ठीक-ठाक था। दूसरा दरवाजा अंदर से भिड़ा था। जब पुलिस रसोई में पहुंची तो बुजुर्ग दंपति के शव पड़े थे। नजारा भयानक था। इतना तो पुलिस भी मान रही है कि मामला चोरी या लूट का नहीं हत्या का है, लेकिन बुजुर्ग दंपति की हत्या क्यों और किसने की इस सवाल का जवाब तलाशना पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं होगा।
मेन गेट पर मिले चार दिन के अखबार
बदायूं। वीरेंद्र गुप्ता के मेन गेट पर चार दिन के अखबार मिले हैं। यह अखबार हॉकर ने दरवाजे के नीचे से सरकाए थे। इससे साफ है कि बुजुर्ग दंपति की हत्या चार दिन पहले ही कर दी गई थी। पुलिस भी इस बात को मान रही है।