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श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र का घमंड तोड़ा : मोहन दास
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बदायूं। हरिश्चंद्र वंसिया रस्तोगी धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाई गई।
वृंदावन से आए कथा व्यास अमित मोहन दास महाराज ने कहा कि जीव जब पूर्ण रूपेण भगवान की शरण में आ जाता है तो भगवान उसकी समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं। इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उनका घमंड दूर करने के लिए भगवान ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी।
इससे गुस्साए इंद्र ने ब्रज मंडल पर भारी बरसात कराई। तब ब्रजवासी कहने लगे कि ये सब कृष्ण की बात मानने से हुआ है। इसके बाद भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव का अहंकार दूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया। तब सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली।
सात दिन के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। इसके बाद से गोवर्धन पर्वत के पूजन की परंपरा आरंभ हुई। कथा सहयोगी के रूप में कार्यक्रम संयोजिका गोदा शर्मा, कार्यक्रम व्यवस्थापक पुष्पेंद्र ठाकुर, प्रांजल पटेल, रूपांक अग्रवाल, उर्मिला शर्मा, गीतिका रस्तोगी, आरती शर्मा, कविता पटेल आदि मौजूद रहीं।
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वृंदावन से आए कथा व्यास अमित मोहन दास महाराज ने कहा कि जीव जब पूर्ण रूपेण भगवान की शरण में आ जाता है तो भगवान उसकी समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं। इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उनका घमंड दूर करने के लिए भगवान ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी।
इससे गुस्साए इंद्र ने ब्रज मंडल पर भारी बरसात कराई। तब ब्रजवासी कहने लगे कि ये सब कृष्ण की बात मानने से हुआ है। इसके बाद भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव का अहंकार दूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया। तब सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली।
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सात दिन के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की। इसके बाद से गोवर्धन पर्वत के पूजन की परंपरा आरंभ हुई। कथा सहयोगी के रूप में कार्यक्रम संयोजिका गोदा शर्मा, कार्यक्रम व्यवस्थापक पुष्पेंद्र ठाकुर, प्रांजल पटेल, रूपांक अग्रवाल, उर्मिला शर्मा, गीतिका रस्तोगी, आरती शर्मा, कविता पटेल आदि मौजूद रहीं।
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