फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   budaun : sheela rai help struggle story on Women Day

Women's Day : छोटी बहनें बेसहारा हुईं तो अपना परिवार छोड़कर बहनों का भविष्य संवारने लगीं शीला राय

Mon, 07 Mar 2022 03:55 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 03:55 PM IST
विज्ञापन
budaun : sheela rai help struggle story on Women Day
शीला राय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बंगाली मूल की शीला राय अपने पिता के परिवार की खेवनहार हैं। उनके पिता की कोरोना से मौत हो गई थी। मां का निधन पहले हो चुका था। दो बहनें छोटी थीं। दिक्कतें बढ़ीं तो अपने पति और परिवार का मोह छोड़कर वह अपने मायके में रहकर आजीविका चलाने के साथ ही बहनों का भविष्य बनाने में लग गईं।

विज्ञापन


शीला के पिता सन्यासी राय कलकत्ता शहर के मूल निवासी थे। बरसों पहले वह इस्लामनगर क्षेत्र के नूरपुर पिनौनी कस्बे में आकर बस गए थे। यहीं अपना मकान बना लिया और बंगाली चिकित्सा पद्धति से लोगों का उपचार करते थे। बंगाली चिकित्सक के तौर पर पहचान बनाने के साथ ही उन्होंने एक मेडिकल स्टोर भी खोल लिया था। उनके कोई बेटा नहीं था। तीन बेटियां शीला राय, टुंपा राय व प्रियंका राय थीं। पांच साल पहले सन्यासी राय की पत्नी का निधन हो गया। सन्यासी राय ने अपनी बड़ी बेटी पुत्री शीला राय का विवाह 16 साल पहले मुरादाबाद के निवासी सजातीय युवक से किया था। दामाद मूल रूप से बिहार राज्य का रहने वाला था जो अपनी रिश्तेदारी में मुरादाबाद जाकर बस गया था। शीला भी वहीं पति के साथ रहने लगीं।
विज्ञापन


डेढ़ साल पहले कोरोना से हो गया था पिता का निधन
शीला के मुताबिक डेढ़ साल पहले कोरोना की चपेट में आने से पिता का भी निधन हो गया। उनकी दो छोटी बेटी टुंपा राय और प्रियंका राय बेसहारा हो गईं। यहां उनके समाज के लोग नहीं थे तो बहनों को किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में परिवार मुसीबत में देखकर शीला ने दोनों बहनों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। वह नूरपुर आकर रहने लगीं। शीला के मुताबिक पति की इच्छा थी कि ससुराल का मकान उनके नाम हो जाए पर उन्होंने बहनों के भविष्य की खातिर ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। पति ने उनके यहां रहने पर ऐतराज जताया तो उन्होंने साफ कह दिया कि वह बहनों को परेशानी में नहीं देख सकतीं। तब पति ने भी शीला का साथ छोड़ दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बहन को करा रहीं है बीफार्मा कोर्स
डबल एमए बीएड शीला अपनी दोनों बहनों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। वह छोटी बहन प्रियंका को बीफार्मा का कोर्स करा रही हैं ताकि पिता के मेडिकल स्टोर व काम को दोबारा पहचान और परिवार को आर्थिक आधार मिल सके। शीला खुद बंगाली चिकित्सा पद्धति की जानकार हैं और देसी नुस्खों से लोगों की परेशानी दूर करती हैं। उनका कहना है कि पिता की कोविड से मौत के प्रमाण के बाद भी उन्हें अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला। तीनों बहनों को सरकार से अभी तक किसी योजना का लाभ भी नहीं मिला है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed