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विद्यालयों में जबरन यूनीफार्म दे रहे दबंग
ब्यूरो /बदायूं
Updated Fri, 16 Sep 2016 11:50 PM IST
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इन दिनों जिले के तमाम परिषदीय विद्यालयों में दबंग जबरन यूनीफार्म डाल रहे हैं। शिक्षकों के विरोध करने पर ये माफिया शिक्षकों को धमकाते है और बीएसए का आर्डर होने की बात कह कर यूनीफार्म डालकर चले जाते हैं। ऐसे में शिक्षक भी जानकर अनजान हो जाते हैं। कुछ शिक्षकों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि यूनीफार्म वितरण में जमकर धांधली चल रही है। एनपीआरसी के एकाउंट में जो राशि भेजी जा रही है, उसे निकालकर यूनीफार्म डालने वाले माफिया को देने को कहा गया है। ऐसे में शिक्षकों के आगे असमंजस की स्थिति है कि अच्छा करें तो कैसे करें? जब विभाग के लोग ही इन माफिया के साथ मिले हुए हैं। जब बीएसए पीसी यादव से इन माफियाओं के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसी स्थिति है तो शिक्षक मुझे लिखित में शिकायत दें मैं कार्रवाई करूंगा।
नीले रंग की कार को देख हो जाते भयभीत
नीले रंग की कार में यूनीफार्म को भरकर कुछ लोग सुबह ही परिषदीय विद्यालयों में पहुंच जाते हैं और मौजूद बच्चों के गिनती कर यूनीफार्मों को छोड़ जाते हैं। यदि को शिक्षक इसका विरोध करता है, तो वे उसे हड़काते हैं और नौकरी न करने देने की धमकी तक दे डालते हैं। ऐसे में शिक्षक भी अब भयभीत हैं।
एक ही साइज के होते यूनीफार्म
एक ही साइज की यूनीफार्मों को स्कूलों में छोड़ने से शिक्षकों के पास अभिभावक शिकायत करने पहुंचते हैं। यूनीफार्म बच्चों का नाप का नहीं है, ऐसे में कैसे बच्चे यूनीफार्म बच्चे पहनकर स्कूल आएंगे। इन सभी दिक्कतों का सामना करने वाला शिक्षक अपना दायित्व ठीक से नहीं निभा पा रहा है।
नीले रंग की कार को देख हो जाते भयभीत
नीले रंग की कार में यूनीफार्म को भरकर कुछ लोग सुबह ही परिषदीय विद्यालयों में पहुंच जाते हैं और मौजूद बच्चों के गिनती कर यूनीफार्मों को छोड़ जाते हैं। यदि को शिक्षक इसका विरोध करता है, तो वे उसे हड़काते हैं और नौकरी न करने देने की धमकी तक दे डालते हैं। ऐसे में शिक्षक भी अब भयभीत हैं।
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एक ही साइज के होते यूनीफार्म
एक ही साइज की यूनीफार्मों को स्कूलों में छोड़ने से शिक्षकों के पास अभिभावक शिकायत करने पहुंचते हैं। यूनीफार्म बच्चों का नाप का नहीं है, ऐसे में कैसे बच्चे यूनीफार्म बच्चे पहनकर स्कूल आएंगे। इन सभी दिक्कतों का सामना करने वाला शिक्षक अपना दायित्व ठीक से नहीं निभा पा रहा है।
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