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बारिश में बही ‘नाली’ ...फिर जवाब दे गई इंटरलाकिंग सड़क
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उझानी (बदायूं)। सीमेंटेड और इंटरलॉकिंग सड़कें अब ज्यादा दिन तक नहीं टिक पा रही हैं। वजह तो पालिका के विशेषज्ञ और ठेकेदार ही अच्छी तरह जानते होंगे लेकिन शिकायत के बाद भी गौर नहीं किए जाने से अफसरों की भूमिका संदेह के दायरे में आ जाती है। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को अहीरटोला मोहल्ले में सामने आया। पहले से ही गुणवत्ता पर सवाल उठाते रहे मोहल्ले के लोगों की उम्मीदों पर बारिश ने ऐसा पानी फेरा कि पहले नाली बह गई और फिर सड़क भी धंस गई।
पांच दिन पहले बारिश के दौरान जिस सड़क के एक छोर की नाली का करीब 15 फिट हिस्सा बहा, उसका निर्माण करीब छह महीना पहले कराया गया था। बरेली-मथुरा हाईवे के नजदीक बनी इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण ठेकेदार की देखरेख में पालिका ने कराया था। मोहल्ले के अजीत सिंह, दिनेश कुमार सिंह और अतुल सक्सेना ने बताया कि निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठा था। ठेकेदार की शिकायत पालिका अफसरों से भी की गई लेकिन किसी ने गौर नहीं किया। नतीजा सामने है कि पहली बारिश को भी सड़क नहीं झेल पाई। दूसरेेे साइड की नाली में भी दरारें नजर आने लगी हैं। बारिश तेज हुई तो उस ओर की नाली को भी बहने से रोका नहीं जा सकता। ऐसा ही हाल कृषि विज्ञान केंद्र के पास निर्माणाधीन नाले की गुणवत्ता को लेकर बना हुआ है। नाले के निर्माण में अव्वल के स्थान पर दोयम दर्जें की ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मानक क्या है! लोगों को नहीं बताते ठेकेदार
उझानी। सीमेंटेड सड़क के निर्माण में सामग्री के इस्तेमाल का मानक क्या है, इस बारे में लोग जब ठेकेदार से पूछते हैं तो जो चल रहा है, उसी को सही ठहराकर पल्लू झाड़ लेते हैं। लोगों की मानें तो ऐसा भी देखने में आया है कि निर्माण कार्यों पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार अफसर मौके पर जाने की जरूरत भी महसूस नहीं करते। वह सिर्फ नापतौल करने पहुंचते हैं।
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बारिश के पानी से सड़क की नाली कहां ध्वस्त हुई, यह संज्ञान में नहीं आया है। हकीकत का पता लगाया जाएगा। सड़क के निर्माण को लेकर भी अधीनस्थों से बात करेंगे।
- डॉ. धीरेंद्र कुमार, ईओ
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पांच दिन पहले बारिश के दौरान जिस सड़क के एक छोर की नाली का करीब 15 फिट हिस्सा बहा, उसका निर्माण करीब छह महीना पहले कराया गया था। बरेली-मथुरा हाईवे के नजदीक बनी इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण ठेकेदार की देखरेख में पालिका ने कराया था। मोहल्ले के अजीत सिंह, दिनेश कुमार सिंह और अतुल सक्सेना ने बताया कि निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठा था। ठेकेदार की शिकायत पालिका अफसरों से भी की गई लेकिन किसी ने गौर नहीं किया। नतीजा सामने है कि पहली बारिश को भी सड़क नहीं झेल पाई। दूसरेेे साइड की नाली में भी दरारें नजर आने लगी हैं। बारिश तेज हुई तो उस ओर की नाली को भी बहने से रोका नहीं जा सकता। ऐसा ही हाल कृषि विज्ञान केंद्र के पास निर्माणाधीन नाले की गुणवत्ता को लेकर बना हुआ है। नाले के निर्माण में अव्वल के स्थान पर दोयम दर्जें की ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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मानक क्या है! लोगों को नहीं बताते ठेकेदार
उझानी। सीमेंटेड सड़क के निर्माण में सामग्री के इस्तेमाल का मानक क्या है, इस बारे में लोग जब ठेकेदार से पूछते हैं तो जो चल रहा है, उसी को सही ठहराकर पल्लू झाड़ लेते हैं। लोगों की मानें तो ऐसा भी देखने में आया है कि निर्माण कार्यों पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार अफसर मौके पर जाने की जरूरत भी महसूस नहीं करते। वह सिर्फ नापतौल करने पहुंचते हैं।
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बारिश के पानी से सड़क की नाली कहां ध्वस्त हुई, यह संज्ञान में नहीं आया है। हकीकत का पता लगाया जाएगा। सड़क के निर्माण को लेकर भी अधीनस्थों से बात करेंगे।
- डॉ. धीरेंद्र कुमार, ईओ