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Budaun News: दिग्गजों के पद और कद पर पड़ेगा परिणाम का असर
Tue, 04 Jun 2024 05:23 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 04 Jun 2024 05:23 AM IST
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बदायूं। लोकसभा चुनाव के परिणाम राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय नेताओं के साथ-साथ स्थानीय दिग्गजों के लिए भी अहम हैं। नतीजे से उनके पद और कद पर असर पड़ सकता है।
भाजपा, सपा व बसपा के उम्मीदवार तो नए थे, लेकिन पुराने दिग्गजों की प्रतिष्ठा इनसे जुड़ी हुई है। इन दिग्गजों के प्रयासों की बदौलत ही प्रत्येक दल के बड़े नेता बदायूं में अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए जोर लगाने आए। लोकसभा चुनाव की इस सीट को निकालने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदायूं और आंवला के लिए संयुक्त तौर पर एक रैली को संबोधित किया था।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी आए। मुख्यमंत्री योगी ने भी चुनाव के दौरान तीन बार दौरा किया। दोनों उप मुख्यमंत्रियों बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के साथ-साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जैसे दिग्गज भी आए।
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भाजपा ने सीट को अपने पास बरकरार रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने दो रैलियां कीं। शिवपाल सिंह यादव यहीं डेरा डाले रहे। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी आईं। इस्लामनगर में रैली की। जाहिर है कि यह सीट सभी दलों के लिए अहम रही है। अब परिणाम पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री के साथ स्थानीय विधायकों पर पड़ेगा असर
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा के साथ भाजपा के स्थानीय विधायकों में महेश गुप्ता, हरीश शाक्य और राजीव कुमार सिंह के साथ जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता की प्रतिष्ठा दांव पर है। जब संघमित्रा मौर्य का नेतृत्व ने टिकट काटा तो इन नेताओं ने दुर्विजय सिंह को जिताने की जिम्मेदारी ली थी।
बेटा चुनाव लड़ा पर पिता शिवपाल सिंह यादव की प्रतिष्ठा है दांव पर
सपा: समाजवादी पार्टी में दूसरे नंबर के नेता शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव बदायूं सीट पर उम्मीदवार थे। शिवपाल सिंह यादव की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। बदायूं से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र यादव भी चुनाव में आए थे। अखिलेश यादव के मुस्लिम और यादव गठजोड़ की परीक्षा भी बदायूं में है। सपा ने यादव व मुसलमान के जोड़ से जीत का गणित लगाया और अपने परिवार के सदस्य को उतारा था। अब सबकी निगाहें इस सीट पर हैं।
मुस्लिम खां का नाम तय कराने वाले संगठन को देना पड़ेगा जवाब
बसपा उम्मीदवार मुस्लिम खां दो लाख से कम मत पाते हैं तो स्थानीय संगठन और मंडल तथा जोनल स्तर पर संगठन में काम रहे बसपा के नेताओं को जवाब देना पड़ेगा। बसपा को इस सीट पर अधिकतम 2,01,202 मत 2009 के लोकसभा चुनाव मिल चुके हैं। बसपा का मत प्रतिशत अगर घटता है तो मुस्लिम खां की उम्मीदवारी की वकालत करने वालों को जवाब देना पड़ेगा।
दल-बदल करने वाले नेताओं की भी होगी परीक्षा
बदायूं। लोकसभा चुनाव के दौरान या उससे कुछ समय पहले जिन नेताओं ने दल बदल किया है। उनके सियासी भविष्य पर भी चुनाव नतीजा असर डालेगा। बिसौली विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक आशुतोष मौर्य ने राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग कर भाजपा को फायदा पहुंचा दिया था। चुनाव के प्रचार के दौरान उनकी पत्नी सुषमा मौर्य और बहन मधु चंद्रा भाजपा में शामिल हो गईं थीं। इसी तरह बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में बसपा से चुनाव लड़ चुकीं ममता शाक्य ने भी भाजपा का दामन थामा था। इसके अलावा बसपा छोड़कर पूर्व विधायक हाजी बिट्टन ने सपा का झंडा थामा था। इन नेताओं के दल बदल का क्या असर रहा है। इसकी समीक्षा भी चुनाव नतीजे के बाद होगी। यह चुनाव दल बदल करने वालों के लिए एक परीक्षा से कम नहीं है। ब्यूरो
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भाजपा, सपा व बसपा के उम्मीदवार तो नए थे, लेकिन पुराने दिग्गजों की प्रतिष्ठा इनसे जुड़ी हुई है। इन दिग्गजों के प्रयासों की बदौलत ही प्रत्येक दल के बड़े नेता बदायूं में अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए जोर लगाने आए। लोकसभा चुनाव की इस सीट को निकालने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदायूं और आंवला के लिए संयुक्त तौर पर एक रैली को संबोधित किया था।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी आए। मुख्यमंत्री योगी ने भी चुनाव के दौरान तीन बार दौरा किया। दोनों उप मुख्यमंत्रियों बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के साथ-साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जैसे दिग्गज भी आए।
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भाजपा ने सीट को अपने पास बरकरार रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने दो रैलियां कीं। शिवपाल सिंह यादव यहीं डेरा डाले रहे। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी आईं। इस्लामनगर में रैली की। जाहिर है कि यह सीट सभी दलों के लिए अहम रही है। अब परिणाम पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री के साथ स्थानीय विधायकों पर पड़ेगा असर
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा के साथ भाजपा के स्थानीय विधायकों में महेश गुप्ता, हरीश शाक्य और राजीव कुमार सिंह के साथ जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता की प्रतिष्ठा दांव पर है। जब संघमित्रा मौर्य का नेतृत्व ने टिकट काटा तो इन नेताओं ने दुर्विजय सिंह को जिताने की जिम्मेदारी ली थी।
बेटा चुनाव लड़ा पर पिता शिवपाल सिंह यादव की प्रतिष्ठा है दांव पर
सपा: समाजवादी पार्टी में दूसरे नंबर के नेता शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव बदायूं सीट पर उम्मीदवार थे। शिवपाल सिंह यादव की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। बदायूं से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र यादव भी चुनाव में आए थे। अखिलेश यादव के मुस्लिम और यादव गठजोड़ की परीक्षा भी बदायूं में है। सपा ने यादव व मुसलमान के जोड़ से जीत का गणित लगाया और अपने परिवार के सदस्य को उतारा था। अब सबकी निगाहें इस सीट पर हैं।
मुस्लिम खां का नाम तय कराने वाले संगठन को देना पड़ेगा जवाब
बसपा उम्मीदवार मुस्लिम खां दो लाख से कम मत पाते हैं तो स्थानीय संगठन और मंडल तथा जोनल स्तर पर संगठन में काम रहे बसपा के नेताओं को जवाब देना पड़ेगा। बसपा को इस सीट पर अधिकतम 2,01,202 मत 2009 के लोकसभा चुनाव मिल चुके हैं। बसपा का मत प्रतिशत अगर घटता है तो मुस्लिम खां की उम्मीदवारी की वकालत करने वालों को जवाब देना पड़ेगा।
दल-बदल करने वाले नेताओं की भी होगी परीक्षा
बदायूं। लोकसभा चुनाव के दौरान या उससे कुछ समय पहले जिन नेताओं ने दल बदल किया है। उनके सियासी भविष्य पर भी चुनाव नतीजा असर डालेगा। बिसौली विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक आशुतोष मौर्य ने राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग कर भाजपा को फायदा पहुंचा दिया था। चुनाव के प्रचार के दौरान उनकी पत्नी सुषमा मौर्य और बहन मधु चंद्रा भाजपा में शामिल हो गईं थीं। इसी तरह बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में बसपा से चुनाव लड़ चुकीं ममता शाक्य ने भी भाजपा का दामन थामा था। इसके अलावा बसपा छोड़कर पूर्व विधायक हाजी बिट्टन ने सपा का झंडा थामा था। इन नेताओं के दल बदल का क्या असर रहा है। इसकी समीक्षा भी चुनाव नतीजे के बाद होगी। यह चुनाव दल बदल करने वालों के लिए एक परीक्षा से कम नहीं है। ब्यूरो