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ई-टिकट के नाम पर धांधली, दलाल दबोचा
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:47 PM IST
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मुखबिर की सूचना पर दो यात्री पकड़ने हुआ खुलासा
- तत्काल रिजर्वेशन कराकर 200 से 300 रुपये तक वसूलता था
जिले में दलाल सक्रिय है जो तत्काल टिकट कंफर्म कराने के बाद फर्जी ई-टिकट के माध्यम से लोगों से कमाई करता है। दलालों के तैयार किए फर्जी ई-टिकट से शुक्रवार को मुंबई से बदायूं पहुंचे दो लोगों को मुखबिर की सूचना पर आरपीएफ ने फर्जी ई-टिकट के साथ पकड़ा तो पूरा मामला खुल गया। पकड़े गए दोनों आरोपियों की निशानदेही पर आरपीएफ ने उस दलाल को भी पकड़ लिया, जिसने ई-टिकट मेल के माध्यम से दोनों को मुंबई भेजे थे।
आरपीएफ इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह बांद्रा-रामनगर एक्सप्रेस के बदायूं पहुंचते ही टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि ट्रेन में कुछ यात्री फर्जी ई-टिकट से सफर कर मुंबई से बदायूं पहुंचे हैं। मुखबिर की सूचना पर आरपीएफ टीम के सब इंस्पेक्टर मयंक चौधरी, उदय राज, हेड कांस्टेबल रामकुमार सिंह, कांस्टेबल बहोरन, मुकेश, रामजन यादव ने रिजर्वेेशन कोच की चेकिंग की तो अलापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले लकी अहमद और नसरुल के पास से दो फर्जी ई-टिकट बरामद हो गए। थाने ले जाने के बाद आरपीएफ के जवानों ने लकी और नसरुल से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि दो हजार रुपये का कमीशन लेकर दलाल आसिफ ने उन्हें मेल पर आठ लोगों के कंफर्म ई-टिकट भेजा था। वहीं आरपीएफ ने पकड़े आरोपियों से आसिफ को फोन कर स्टेशन बुलाया और पकड़ लिया। छानबीन में उसके पास से 21 मई को उझानी से कराए दो कंफर्म विंडो टिकट मिल गए।
एक साल से हो रही धांधली, पूरे देश में फैला नेटवर्क
आरपीएफ थाने में बैठे दलाल आसिफ ने बताया कि वह पिछले एक साल से ई-टिकट धांधली का काम कर रहा है। उसका नेटवर्क यूपी, उतराखंड से लेकर पूरे देश में फैला है। चार टिकट आरपीएफ टीम को ऐसे भी मिले है जिन पर सफर ही नहीं हुआ है। दूरी के हिसाब से प्रति सीट 250 से 300 रुपये तक की दलाली करने वाला आसिफ विंडो से तत्काल टिकट 24 घंटे पहले तो कंफर्म करा लेता था लेकिन दूरी होने के चलते यात्री तक पहुंचना उसके लिए संभव नहीं हो था, इसके लिए वह ई-टिकट के ब्लैंक फार्म पर एडिटिंग कर टिकट से संबंधित सभी जानकारी पीएनआर नंबर, ट्रेन नंबर, समय आदि फार्म में भरकर मेल के माध्यम से यात्री तक पहुंचा देता था।
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हो सकते है कई खुलासे
आरपीएफ टीम के एसआई मयंक चौधरी, उदय राज ने बताया कि आसिफ से पूछताछ के बाद कई ओर खुलासे हो सकते है। माना जा रहा है कि बड़ा गिरोह है जो लोगों से तत्काल टिकट कंफर्म होने के बाद उनसे कमीशन लेता है। आरपीएफ की टीम सर्विलांस के जरिए आसिफ का नेटवर्क तलाश करेगी।
मुखबिर की सूचना पर फर्जी ई-टिकट से सफर करने वाले दो आरोपी और एक दलाल को पकड़ा है। तीनों के खिलाफ रेलवे एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आसिफ के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143, और खरीदने वालों पर 142 की कार्रवाई की गई है।
- हरेंद्र सिंह, आरपीएफ इंस्पेक्टर
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- तत्काल रिजर्वेशन कराकर 200 से 300 रुपये तक वसूलता था
जिले में दलाल सक्रिय है जो तत्काल टिकट कंफर्म कराने के बाद फर्जी ई-टिकट के माध्यम से लोगों से कमाई करता है। दलालों के तैयार किए फर्जी ई-टिकट से शुक्रवार को मुंबई से बदायूं पहुंचे दो लोगों को मुखबिर की सूचना पर आरपीएफ ने फर्जी ई-टिकट के साथ पकड़ा तो पूरा मामला खुल गया। पकड़े गए दोनों आरोपियों की निशानदेही पर आरपीएफ ने उस दलाल को भी पकड़ लिया, जिसने ई-टिकट मेल के माध्यम से दोनों को मुंबई भेजे थे।
आरपीएफ इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह बांद्रा-रामनगर एक्सप्रेस के बदायूं पहुंचते ही टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि ट्रेन में कुछ यात्री फर्जी ई-टिकट से सफर कर मुंबई से बदायूं पहुंचे हैं। मुखबिर की सूचना पर आरपीएफ टीम के सब इंस्पेक्टर मयंक चौधरी, उदय राज, हेड कांस्टेबल रामकुमार सिंह, कांस्टेबल बहोरन, मुकेश, रामजन यादव ने रिजर्वेेशन कोच की चेकिंग की तो अलापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले लकी अहमद और नसरुल के पास से दो फर्जी ई-टिकट बरामद हो गए। थाने ले जाने के बाद आरपीएफ के जवानों ने लकी और नसरुल से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि दो हजार रुपये का कमीशन लेकर दलाल आसिफ ने उन्हें मेल पर आठ लोगों के कंफर्म ई-टिकट भेजा था। वहीं आरपीएफ ने पकड़े आरोपियों से आसिफ को फोन कर स्टेशन बुलाया और पकड़ लिया। छानबीन में उसके पास से 21 मई को उझानी से कराए दो कंफर्म विंडो टिकट मिल गए।
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एक साल से हो रही धांधली, पूरे देश में फैला नेटवर्क
आरपीएफ थाने में बैठे दलाल आसिफ ने बताया कि वह पिछले एक साल से ई-टिकट धांधली का काम कर रहा है। उसका नेटवर्क यूपी, उतराखंड से लेकर पूरे देश में फैला है। चार टिकट आरपीएफ टीम को ऐसे भी मिले है जिन पर सफर ही नहीं हुआ है। दूरी के हिसाब से प्रति सीट 250 से 300 रुपये तक की दलाली करने वाला आसिफ विंडो से तत्काल टिकट 24 घंटे पहले तो कंफर्म करा लेता था लेकिन दूरी होने के चलते यात्री तक पहुंचना उसके लिए संभव नहीं हो था, इसके लिए वह ई-टिकट के ब्लैंक फार्म पर एडिटिंग कर टिकट से संबंधित सभी जानकारी पीएनआर नंबर, ट्रेन नंबर, समय आदि फार्म में भरकर मेल के माध्यम से यात्री तक पहुंचा देता था।
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हो सकते है कई खुलासे
आरपीएफ टीम के एसआई मयंक चौधरी, उदय राज ने बताया कि आसिफ से पूछताछ के बाद कई ओर खुलासे हो सकते है। माना जा रहा है कि बड़ा गिरोह है जो लोगों से तत्काल टिकट कंफर्म होने के बाद उनसे कमीशन लेता है। आरपीएफ की टीम सर्विलांस के जरिए आसिफ का नेटवर्क तलाश करेगी।
मुखबिर की सूचना पर फर्जी ई-टिकट से सफर करने वाले दो आरोपी और एक दलाल को पकड़ा है। तीनों के खिलाफ रेलवे एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आसिफ के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143, और खरीदने वालों पर 142 की कार्रवाई की गई है।
- हरेंद्र सिंह, आरपीएफ इंस्पेक्टर