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Budaun News: राम ने पढ़ाया संयम का पाठ, क्रोध से होता है नुकसान
Wed, 19 Apr 2023 01:37 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Wed, 19 Apr 2023 01:37 AM IST
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उझानी (बदायूं)। रामकथा के अंतिम दिन त्रिदंडी स्वामी गोपालचार्य महाराज ने भगवान राम के आदर्श रूप से जुड़े कमई प्रसंग सुनाए। कहा- राम ने हमेशा ही संयम और धैर्य का पाठ पढ़ाया। भाइयों को भी यही संदेश दिया था कि कठिन परिस्थितियों में भी क्रोध न किया जाए। क्रोध करने से बुद्दि-विवेक का नाश होता है।
त्रिदंडी स्वामी ने रामकथा के महत्वपूर्ण संदर्भ को लेते हुए ऐसे पक्षों को रखा, जिसके माध्यम से लोग संयम का महत्व समझ सकें। श्री राम के वनवास के बाद जब भरत अयोध्या लौटे तो उन्हें वन गमन की जानकारी हुई। चतुरंगणी सेना के साथ वह राम को वापस करने के लिए वन गमन कर गए। चतुरंगणी सेना की उड़ती धूल जब श्री राम की कुटिया से दिखाई दी तो लक्ष्मण ने पेड़ के ऊपर चढ़कर देखा तो उन्हें भरत सेना सहित आते दिखाई दिए।
उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए बड़े भाई श्रीराम से कहा कि देखा भरत अपने राज्य को प्रतिस्थापित करने के लिए हम लोगों पर चढ़ाई करने आ रही हैं। वह हमें मारना चाहते हैं ताकि निस्कंटक रूप से राज्य कर सकें। भगवान श्रीराम ने मुस्कराकर संयम वरतते हुए उन्हें आने देने को कहा।
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हालांकि लक्ष्मण युद्ध की तैयारी कर चुके थे। भरत का आगमन और उनकी चरण पादुका लेकर राज्य करने जैसे महत्वपूर्ण वर्णन के साथ कथा के नवे और अंतिम दिवस दर्शकों और श्रोताओं ने राम कथा का आनंद लिया। भगवान श्री राम के चरित्र और उनके संदेश का रसास्वादन किया। अभिवादन कर स्वामी त्रिदंडी स्वामी को आरती और प्रसाद वितरण कर विदाई दी।
पूर्व मंत्री समेत गणमान्य नागरिकों ने किया पूजन
-पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल ने त्रिदंडी स्वामी गोपालाचार्य और उनके साथ आई संत मंडली को सम्मानित किया। महाराज समेत मंडली के सदस्यों को अंगवस्त्र भेंट किए गए। भक्तों को प्रसाद भी वितरित कराया गया। विदाई लेते समय महाराज ने उझानी से जुड़े स्मरण भी सुनाए। कहा कि पहली बार जब वह महायज्ञ के लिए यहां आए थे, तब भी भक्तों में खासा उत्साद नजर आया था। इस मौके पर रामप्रवेश यादव, गोपीबल्लभ शर्मा, टीटू मित्तल और उदय सिंघल आदि मौजूद थे।
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त्रिदंडी स्वामी ने रामकथा के महत्वपूर्ण संदर्भ को लेते हुए ऐसे पक्षों को रखा, जिसके माध्यम से लोग संयम का महत्व समझ सकें। श्री राम के वनवास के बाद जब भरत अयोध्या लौटे तो उन्हें वन गमन की जानकारी हुई। चतुरंगणी सेना के साथ वह राम को वापस करने के लिए वन गमन कर गए। चतुरंगणी सेना की उड़ती धूल जब श्री राम की कुटिया से दिखाई दी तो लक्ष्मण ने पेड़ के ऊपर चढ़कर देखा तो उन्हें भरत सेना सहित आते दिखाई दिए।
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उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए बड़े भाई श्रीराम से कहा कि देखा भरत अपने राज्य को प्रतिस्थापित करने के लिए हम लोगों पर चढ़ाई करने आ रही हैं। वह हमें मारना चाहते हैं ताकि निस्कंटक रूप से राज्य कर सकें। भगवान श्रीराम ने मुस्कराकर संयम वरतते हुए उन्हें आने देने को कहा।
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हालांकि लक्ष्मण युद्ध की तैयारी कर चुके थे। भरत का आगमन और उनकी चरण पादुका लेकर राज्य करने जैसे महत्वपूर्ण वर्णन के साथ कथा के नवे और अंतिम दिवस दर्शकों और श्रोताओं ने राम कथा का आनंद लिया। भगवान श्री राम के चरित्र और उनके संदेश का रसास्वादन किया। अभिवादन कर स्वामी त्रिदंडी स्वामी को आरती और प्रसाद वितरण कर विदाई दी।
पूर्व मंत्री समेत गणमान्य नागरिकों ने किया पूजन
-पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल ने त्रिदंडी स्वामी गोपालाचार्य और उनके साथ आई संत मंडली को सम्मानित किया। महाराज समेत मंडली के सदस्यों को अंगवस्त्र भेंट किए गए। भक्तों को प्रसाद भी वितरित कराया गया। विदाई लेते समय महाराज ने उझानी से जुड़े स्मरण भी सुनाए। कहा कि पहली बार जब वह महायज्ञ के लिए यहां आए थे, तब भी भक्तों में खासा उत्साद नजर आया था। इस मौके पर रामप्रवेश यादव, गोपीबल्लभ शर्मा, टीटू मित्तल और उदय सिंघल आदि मौजूद थे।