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लोक अदालत में 1082 मामलों का निस्तारण
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 12 Feb 2017 12:30 AM IST
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लोक अदालत में 1082 मामलों का निस्तारण
- फोटो : अमर उजाला
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को दीवानी न्यायालय परिसर में द्विमासिक राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला जज और प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जौहरी की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर जिला जज ने कहा कि लोक अदालत में सुलह समझौते के माध्यम से मामलों का निस्तारण होने से पक्षकारों के मध्य वर्षों से चली आ रही वैमनस्यता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है तथा समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है। इसके साथ ही न्यायालयों में मुकदमों में भी कमी आती है।
लोक अदालत में 21 वैवाहिक दंपतियों में साथ रहने के लिए सुलह समझौता कराया गया। लोक अदालत में कुल 1082 लंबित मामले निस्तारित हुए। इनमें 460 फौजदारी शमनीय वाद जुर्माना डालकर निस्तारित किए गए। 17 मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, 231 फौजदारी के लघु आपराधिक वाद, 39 दीवानी वाद, 60 वैवाहिक वाद, 22 उत्तराधिकार अधिनियम वाद, 27 वाउचर प्रार्थना पत्र, छह एफआर, 150 मोटर वाहन एक्ट के वाद, 70 अन्य वाद के मामलों को निस्तारित किया गया। लोक अदालत में निस्तारित किए गए फौजदारी के वादों से 91 हजार नौ सौ 80 रुपये की धनराशि जुर्माने के रूप में वसूली गई। उत्तराधिकार अधिनियम के वादों में 46 लाख 80 हजार आठ सौ 95 की धनराशि के उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र निर्गत किए गए। 25 लाख 52 हजार छह सौ 17 की धनराशि के वाउचर प्रार्थना पत्र निस्तारित किए तथा मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाओं में 25 लाख 58 हजार पांच सौ का अवार्ड जारी किया गया। लोक अदालत में स्पेशल जज नलिन कुमार श्रीवास्तव, पंकज कुमार अग्रवाल, विकास कुमार, भूदेव गौतम, प्रधान न्यायाधीश अहमद उल्ला खां, रीता कौशिक, वीरेंद्र कुमार पांडेय, रईस अहमद, मधुलिका चौधरी, कपिला राघव, परवेंद्र कुमार शर्मा, किरनवाला, विजय राजे सिसौदिया, सीजेएम मोहम्मद असलम सिद्दीकी, प्राधिकरण सचिव रणजीत कुमार, अमरजीत, स्नेहलता, नीलांजना, ज्योति अग्रवाल, मुकीम अहमद आदि उपस्थित रहे।
लोक अदालत में 21 वैवाहिक दंपतियों में साथ रहने के लिए सुलह समझौता कराया गया। लोक अदालत में कुल 1082 लंबित मामले निस्तारित हुए। इनमें 460 फौजदारी शमनीय वाद जुर्माना डालकर निस्तारित किए गए। 17 मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, 231 फौजदारी के लघु आपराधिक वाद, 39 दीवानी वाद, 60 वैवाहिक वाद, 22 उत्तराधिकार अधिनियम वाद, 27 वाउचर प्रार्थना पत्र, छह एफआर, 150 मोटर वाहन एक्ट के वाद, 70 अन्य वाद के मामलों को निस्तारित किया गया। लोक अदालत में निस्तारित किए गए फौजदारी के वादों से 91 हजार नौ सौ 80 रुपये की धनराशि जुर्माने के रूप में वसूली गई। उत्तराधिकार अधिनियम के वादों में 46 लाख 80 हजार आठ सौ 95 की धनराशि के उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र निर्गत किए गए। 25 लाख 52 हजार छह सौ 17 की धनराशि के वाउचर प्रार्थना पत्र निस्तारित किए तथा मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाओं में 25 लाख 58 हजार पांच सौ का अवार्ड जारी किया गया। लोक अदालत में स्पेशल जज नलिन कुमार श्रीवास्तव, पंकज कुमार अग्रवाल, विकास कुमार, भूदेव गौतम, प्रधान न्यायाधीश अहमद उल्ला खां, रीता कौशिक, वीरेंद्र कुमार पांडेय, रईस अहमद, मधुलिका चौधरी, कपिला राघव, परवेंद्र कुमार शर्मा, किरनवाला, विजय राजे सिसौदिया, सीजेएम मोहम्मद असलम सिद्दीकी, प्राधिकरण सचिव रणजीत कुमार, अमरजीत, स्नेहलता, नीलांजना, ज्योति अग्रवाल, मुकीम अहमद आदि उपस्थित रहे।
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