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Budaun News: मिलावटी कच्ची शराब बनाने की पुष्टि, पर अन्य साक्ष्यों के अभाव में आरोपी दोषमुक्त
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बदायूं। यूरिया सहित अन्य सामग्री का मिश्रण कर नकली कच्ची शराब बनाकर शीशियों में कंपनी का ढक्कन लगाकर बेचने के मामले में अभियोजन पक्ष आरोप पुष्ट करने में असफल रहा, जबकि परीक्षण में यूरिया मिलाकर शराब बनाने की पुष्टि हुई। अपर सत्र न्यायाधीश अनीता-1 की कोर्ट ने आरोप साबित न होने पर अभियुक्त पप्पू उर्फ रवेंद्र को आबकारी अधिनियम से दोषमुक्त कर दिया।
थाना सिविल लाइन के एसआई राजेश ने 23 दिसंबर 2018 को सूचना मिलने पर मझिया रोड से बुधवाई की तरफ जाने वाले खड़ंजे पर ईख के पीछे वाले खेत पर कच्ची शराब बनाने वालों को पकड़ने के लिए छापा मारा।
मौके पर कुछ लोग क्वार्टर में शराब की पैकिंग करते मिले। मौके से पकड़े व्यक्तियों ने अपना नाम अंकित गुप्ता निवासी जूही लाल काॅलोनी, थाना किदवई नगर जिला कानपुर और दूसरे ने अपना नाम किशन निवासी ग्राम मल्लाहपुर थाना मूसाझाग जिला बदायूं बताया। दोनों के पास दो जरीकेन में पीले रंग की शराब मिली, जिसमें सौ लीटर तरल पदार्थ भरा था।
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24 क्वार्टर भरे हुए रखे थे, जिन पर धब्बर शेर मिरिंडा का रैपर लगा था। ढक्कन पर सुपीरियर इंडस्ट्रीज लिमिटेड बरेली लिखा था । 26 क्वार्टर खाली थे, उन पर ढक्कन लगा था। एक थैली से एक किलो 500 ग्राम यूरिया खाद बरामद हुई थी। दोनों ने संयुक्त रूप से बताया कि मौके से भागने वाले व्यक्ति का नाम पप्पू उर्फ रवेंद्र निवासी बाबा काॅलोनी, थाना सिविल लाइन है।
आरोपियों ने बताया था कि यूरिया मिलाकर कच्ची शराब बनाकर कंपनी का ढक्कन लगाकर बेचते थे, ताकि लोग उसे असली समझें। पैकिंग की जिम्मेदारी हम दोनों और माल लाने व बेचने का जिम्मा पप्पू उर्फ रवेंद्र का है। बाद में पुलिस ने पप्पू को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस ने विवेचना कर कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया और मौके से बरामद शराब और यूरिया का परीक्षण कराया।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में क्वार्टर शीशियों के द्रव पदार्थ में यूरिया परीक्षण परिणाम सकारात्मक मिला। बरामद थैली में भी यूरिया होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अभियोजन यह साबित करने में पूर्णत: असफल रहा कि यह माल अभियुक्त पप्पू उर्फ रवेंद्र द्वारा ही बेचा गया है। मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियुक्त पर लगाए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया।
ऑर्म्स एक्ट केस में दोषी को जेल में बिताई अवधि की कैद
बदायूं। अपर सिविल जज, सीनियर डिवीजन की कोर्ट ने ऑर्म्स एक्ट केस में सुनवाई करते हुए आरोपी नरेंद्र निवासी नौनी थाना दातागंज को दोषी करार देते हुए जेल में बिताई अवधि की सजा सुनाई। इसके साथ एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
दातागंज थाने के एसआई अनिल कुमार ने पिछले साल तमंचे के साथ आरोपी नरेंद्र को पकड़ा था। विवेचना कर आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। इसके बाद कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद सजा सुनाई गई। संवाद
दो सगे भाइयों सहित तीन को तीन वर्ष की सजा
बदायूं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सागर तायल की कोर्ट ने गंभीर चोट पहुंचाने सहित अन्य आरोपों के केस की सुनवाई करते हुए सगे भाइयों, देव सिंह, नेम सिंह और फूल सिंह निवासी फतेहपुर, थाना मूसाझाग, को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषसिद्ध अभियुक्त पर 3500-3500 रुपये का जुर्माना लगाया।
मूसाझाग थाने में 2004 में तीनों अभियुक्त के विरुद्ध मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने आदि में केस दर्ज हुआ था। उप निरीक्षक ओपी राजपूत ने विवेचना कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोषसिद्ध अभियुक्त देव सिंह, नेम सिंह व फूल सिंह को धारा 323 में 6 माह के साधारण कारावास, 500-500 रुपये का अर्थदंड, धारा 325 आईपीसी में 3 वर्ष के साधारण कारावास एवं 3000-3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। संवाद
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थाना सिविल लाइन के एसआई राजेश ने 23 दिसंबर 2018 को सूचना मिलने पर मझिया रोड से बुधवाई की तरफ जाने वाले खड़ंजे पर ईख के पीछे वाले खेत पर कच्ची शराब बनाने वालों को पकड़ने के लिए छापा मारा।
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मौके पर कुछ लोग क्वार्टर में शराब की पैकिंग करते मिले। मौके से पकड़े व्यक्तियों ने अपना नाम अंकित गुप्ता निवासी जूही लाल काॅलोनी, थाना किदवई नगर जिला कानपुर और दूसरे ने अपना नाम किशन निवासी ग्राम मल्लाहपुर थाना मूसाझाग जिला बदायूं बताया। दोनों के पास दो जरीकेन में पीले रंग की शराब मिली, जिसमें सौ लीटर तरल पदार्थ भरा था।
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24 क्वार्टर भरे हुए रखे थे, जिन पर धब्बर शेर मिरिंडा का रैपर लगा था। ढक्कन पर सुपीरियर इंडस्ट्रीज लिमिटेड बरेली लिखा था । 26 क्वार्टर खाली थे, उन पर ढक्कन लगा था। एक थैली से एक किलो 500 ग्राम यूरिया खाद बरामद हुई थी। दोनों ने संयुक्त रूप से बताया कि मौके से भागने वाले व्यक्ति का नाम पप्पू उर्फ रवेंद्र निवासी बाबा काॅलोनी, थाना सिविल लाइन है।
आरोपियों ने बताया था कि यूरिया मिलाकर कच्ची शराब बनाकर कंपनी का ढक्कन लगाकर बेचते थे, ताकि लोग उसे असली समझें। पैकिंग की जिम्मेदारी हम दोनों और माल लाने व बेचने का जिम्मा पप्पू उर्फ रवेंद्र का है। बाद में पुलिस ने पप्पू को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस ने विवेचना कर कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया और मौके से बरामद शराब और यूरिया का परीक्षण कराया।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में क्वार्टर शीशियों के द्रव पदार्थ में यूरिया परीक्षण परिणाम सकारात्मक मिला। बरामद थैली में भी यूरिया होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अभियोजन यह साबित करने में पूर्णत: असफल रहा कि यह माल अभियुक्त पप्पू उर्फ रवेंद्र द्वारा ही बेचा गया है। मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियुक्त पर लगाए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया।
ऑर्म्स एक्ट केस में दोषी को जेल में बिताई अवधि की कैद
बदायूं। अपर सिविल जज, सीनियर डिवीजन की कोर्ट ने ऑर्म्स एक्ट केस में सुनवाई करते हुए आरोपी नरेंद्र निवासी नौनी थाना दातागंज को दोषी करार देते हुए जेल में बिताई अवधि की सजा सुनाई। इसके साथ एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
दातागंज थाने के एसआई अनिल कुमार ने पिछले साल तमंचे के साथ आरोपी नरेंद्र को पकड़ा था। विवेचना कर आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। इसके बाद कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद सजा सुनाई गई। संवाद
दो सगे भाइयों सहित तीन को तीन वर्ष की सजा
बदायूं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सागर तायल की कोर्ट ने गंभीर चोट पहुंचाने सहित अन्य आरोपों के केस की सुनवाई करते हुए सगे भाइयों, देव सिंह, नेम सिंह और फूल सिंह निवासी फतेहपुर, थाना मूसाझाग, को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषसिद्ध अभियुक्त पर 3500-3500 रुपये का जुर्माना लगाया।
मूसाझाग थाने में 2004 में तीनों अभियुक्त के विरुद्ध मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने आदि में केस दर्ज हुआ था। उप निरीक्षक ओपी राजपूत ने विवेचना कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोषसिद्ध अभियुक्त देव सिंह, नेम सिंह व फूल सिंह को धारा 323 में 6 माह के साधारण कारावास, 500-500 रुपये का अर्थदंड, धारा 325 आईपीसी में 3 वर्ष के साधारण कारावास एवं 3000-3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। संवाद