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अंधता निवारण में ‘डी’ श्रेणी पर खफा हुए आयुक्त

Wed, 01 Jun 2016 12:06 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Wed, 01 Jun 2016 12:06 AM IST
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Prevention of Blindness in the "D" category miffed at the commissioner
समीक्षा बैठक - फोटो : अमर उजाला

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समीक्षा के साथ पिछले निरीक्षण में निर्देशों पर अमल होने की ली जानकारी
 अंधता निवारण कार्यक्रम में प्रदेश स्तर पर जिला ‘डी’ श्रेणी में होने और अंटाइड फंड के व्यय की प्रगति संतोषजनक न पाए जाने पर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की। आयुक्त यहां विकास भवन में विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल डेयरी योजना में भी प्रगति के निर्देश दिए। 
आयुक्त प्रमांशु कुमार ने विकास भवन स्थित सभाकक्ष में जिलाधिकारी सीपी त्रिपाठी, सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया एवं संयुक्त विकास आयुक्त सीपी सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने गत भ्रमण पर दिए गए निर्देशों की समीक्षा में लोनिवि अभियंताओं ने बताया कि लोहिया ग्राम दरावनगर संपर्क मार्ग निर्माण को स्वीकृति प्राप्त हो गई है। नवीन पोस्टमार्टम हाउस भी क्रियाशील हो गया है। आयुक्त ने इसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए। 
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इनकी प्रगति संतोषजनक नहीं रही 
बदायूं। राजीव गांधी विद्युतीकरण कार्य एवं ग्रामीणों को कनेक्शन देने की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। इसके अलावा आम आदमी बीमा योजना, राजकीय मेडिकल कालेज के निर्माण कार्य और ओपीडी में चिकित्सकों की उपलब्धता, कामधेनु मिनी, कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना की प्रगति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।  वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2015-16 के लोहिया आवासों में शीघ्र ही सोलर लाइट लगवाने का कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। 
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गेहूं खरीद पर एसडीएम से मांगा जवाब 
बदायूं। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेंहू खरीद कम होने के संबंध में उप जिलाधिकारियों से जानकारी ली तो उन्होंने अवगत कराया कि बाजार मूल्य अधिक होने और गेहूं की पैदावार कम होने के कारण खरीद प्रभावित हुई है। 

10 गांवों में और चलेगा ओडीएफ को अभियान
बदायूं। आयुक्त को बताया गया कि जिले के दो गांव खुले में शौच से मुक्त कराए जा चुके हैं। 10 गांव में कार्य जारी है। शीघ्र ही इन्हें भी ओडीएफ  घोषित किए जाने का प्रसास है। पोषण पुर्नवास केंद्र और कुपोषित बच्चों में सुधार के संबंध में भी संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि जिले में 16,316 बच्चे कुपोषित चिह्नित किए गए थे। जिसमें अब तक लगभग छह हजार से अधिक बच्चे सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं।
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