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आलू के रेट में डेढ़ सौ रुपये प्रति क्विंटल का उछाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
Updated Wed, 07 Mar 2018 06:14 PM IST
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पांच-छह दिन पहले तक सब्जियों के राजा आलू को लेकर घाटे का सौदा समझ रहे उत्पादकों के लिए होली से अच्छी खबर आनी शुरू हो गई। रकबा पहले के मुकाबले करीब 30 फीसदी कम होने के बावजूद पैदावार अच्छी हुई है। थोक के रेट में तेजी से उछाल मिलते ही प्रति क्विंटल करीब डेढ़ सौ रुपये की वृद्धि हुई है।
आलू की फसल की खुदाई के बीच ही उत्पादकों को जिस तरह से रेट मिलना शुरू हुआ है, उसमें आगे चलकर भी वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है। थोक व्यापार से जुड़े राजू चौधरी कहते हैं कि होली से पहले खासकर चिप्स के लिए सब्जियों के राजा की डिमांड तो बढ़ी थी लेकिन रेट 500 रुपया प्रति क्विंटल के आसपास ही रहा था। वैसे, त्योहार नजदीक आने पर आलू का रेट बढ़ जाया करता था। आलू की प्रजातियों में सबसे ज्यादा महंगा हाइब्रिड प्रजाति ज्योति- 3797 है। वह करीब आठ सौ रुपया प्रति क्विंटल तक पहुंचने वाला है। जबकि देसी प्रजातियों में सात सौ रुपया प्रति क्विंटल तक का रेट चल रहा है। आलू के रेट में वृद्धि की प्रमुख वजह यही है कि पिछले साल के मुकाबले रकबा करीब 30 फीसदी तक कम है। दूसरा यह कि पिछले साल आलू की जमकर बेकदरी हुई थी, सो किसानों ने सीमित रकबे में आलू की बुआई की है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मौसम अनुकूल रहने से पैदावार बंपर हुई है।
बीस रुपये का डेढ़ किलो चल रहा है फुटकर रेट
थोक के भाव में उछाल के साथ ही फुटकर मार्केट में सब्जी विक्रेताओं ने फायदा उठाना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों 20 रुपये में ढाई किलो तक आलू खरीदकर ग्राहकों का थैला भर जाता था लेकिन जेब हल्की होने के साथ ही थैले का वजन भी हल्का हो गया है। ग्राहकों का कहना है कि आलू के फुटकर रेट पर किसी तरह का अंकुश नहीं है। फुटकर विक्रेता कहते हैं कि मंडी और लोडिंग का खर्चा मिलाकर देखें तो 10-11 रुपया प्रति किलो का रेट आता है।
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दिल्ली-राजस्थान में भी बदायूं के आलू की डिमांड
बदायूं जिले की भूमि आलू और गेहूं के लिए मुफीद रही है। खासकर रेतीले इलाके में आलू की बंपर पैदावार होने के साथ ही उसकी गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। इस बार मौसम अनुकूल रहा तो आलू दागी होने से भी बच गया। पूरी तरह से फ्रेश आलू की डिमांड दिसावर में सबसे ज्यादा दिल्ली और राजस्थान में है। इलाके में पैदा होने वाला देसी सफेद आलू राजस्थान के लोग ज्यादा पसंद करते हैं। रेट में इजाफे की एक वजह यह भी बनी हुई है।
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आलू की फसल की खुदाई के बीच ही उत्पादकों को जिस तरह से रेट मिलना शुरू हुआ है, उसमें आगे चलकर भी वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है। थोक व्यापार से जुड़े राजू चौधरी कहते हैं कि होली से पहले खासकर चिप्स के लिए सब्जियों के राजा की डिमांड तो बढ़ी थी लेकिन रेट 500 रुपया प्रति क्विंटल के आसपास ही रहा था। वैसे, त्योहार नजदीक आने पर आलू का रेट बढ़ जाया करता था। आलू की प्रजातियों में सबसे ज्यादा महंगा हाइब्रिड प्रजाति ज्योति- 3797 है। वह करीब आठ सौ रुपया प्रति क्विंटल तक पहुंचने वाला है। जबकि देसी प्रजातियों में सात सौ रुपया प्रति क्विंटल तक का रेट चल रहा है। आलू के रेट में वृद्धि की प्रमुख वजह यही है कि पिछले साल के मुकाबले रकबा करीब 30 फीसदी तक कम है। दूसरा यह कि पिछले साल आलू की जमकर बेकदरी हुई थी, सो किसानों ने सीमित रकबे में आलू की बुआई की है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मौसम अनुकूल रहने से पैदावार बंपर हुई है।
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बीस रुपये का डेढ़ किलो चल रहा है फुटकर रेट
थोक के भाव में उछाल के साथ ही फुटकर मार्केट में सब्जी विक्रेताओं ने फायदा उठाना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों 20 रुपये में ढाई किलो तक आलू खरीदकर ग्राहकों का थैला भर जाता था लेकिन जेब हल्की होने के साथ ही थैले का वजन भी हल्का हो गया है। ग्राहकों का कहना है कि आलू के फुटकर रेट पर किसी तरह का अंकुश नहीं है। फुटकर विक्रेता कहते हैं कि मंडी और लोडिंग का खर्चा मिलाकर देखें तो 10-11 रुपया प्रति किलो का रेट आता है।
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दिल्ली-राजस्थान में भी बदायूं के आलू की डिमांड
बदायूं जिले की भूमि आलू और गेहूं के लिए मुफीद रही है। खासकर रेतीले इलाके में आलू की बंपर पैदावार होने के साथ ही उसकी गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। इस बार मौसम अनुकूल रहा तो आलू दागी होने से भी बच गया। पूरी तरह से फ्रेश आलू की डिमांड दिसावर में सबसे ज्यादा दिल्ली और राजस्थान में है। इलाके में पैदा होने वाला देसी सफेद आलू राजस्थान के लोग ज्यादा पसंद करते हैं। रेट में इजाफे की एक वजह यह भी बनी हुई है।