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पूर्व सांसद धर्मेंद्र ने भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्य के खिलाफ दायर कराई रिट वापस ली
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बदायूं। बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने भाजपा की मौजूदा सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य के निर्वाचन को चुनौती देने वाली रिट वापस ले ली है। 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र ने मतगणना में धांधली, अनियमितताओं समेत कई आरोप लगाते हुए डॉ. संघमित्रा मौर्य के निर्वाचन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी।
सपा के शीर्ष नेताओं में शामिल सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव 2009 और 2014 में बदायूं लोकसभा सीट से बड़े अंतर से सांसद चुने गए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य से हुआ। डॉ. संघमित्रा मौर्य के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य उस समय प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इस चुनाव में डॉ. संघमित्रा मौर्य ने करीब 18 हजार वोट से धर्मेंद्र यादव को चुनाव हरा दिया। सपा ने मतगणना में धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाया था। बाद में धर्मेंद्र यादव ने डॉ. संघमित्रा मौर्य के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी।
कोर्ट में धर्मेंद्र यादव की रिट पर सुनवाई चल रही थी। इस पर फैसला आने से पहले ही धर्मेंद्र यादव ने कोर्ट में हलफनामा देकर रिट वापस ले ली है। इसके बाद कोर्ट ने मामले को रद्द कर दिया है। दरअसल, यूपी विधानसभा चुनाव के समय डॉ. संघमित्रा मौर्य के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़ सपा में शामिल हो गए थे। स्वामी प्रसाद के सपा में जाने के बाद डॉ. संघमित्रा मौर्य कई बार भाजपा के प्रति ही मुखर दिखी थी। विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशियों के प्रचार में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। लंबे समय से वह पार्टी कार्यक्रमों से भी लगभग दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले निकाय चुनावों के साथ लोकसभा चुनाव में भी जिले के समीकरण प्रभावित होंगे।
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फोटो.....
धर्मेंद्र बोले- स्वामी प्रसाद के सम्मान में वापस ली रिट
पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के सम्मान में रिट वापस ली है। स्वामी प्रसाद मौर्य पिछड़ा वर्ग के बड़े नेता हैं। वह सपा में शामिल होकर सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ मिलकर पिछड़ों को एकजुट करने के साथ पिछड़ों के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बदायूं से कहीं नहीं जा रहे। रही बात डॉ. संघमित्रा मौर्य की तो वह अब भी भाजपा की सदस्य हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में शामिल होने से सपा को मजबूती मिली है। पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव जोर शोर से लड़ेगी।
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हम तो कहेंगे हार को उन्होंने अब दिल से स्वीकार किया : संघमित्रा
सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य का कहना है कि याचिका दायर करना या वापस लेना उनकी व्यक्तिगत सोच है। हम तो यह कहेंगे कि 2019 की हार को उन्होंने अब दिल से स्वीकार किया है और ये मान लिया है कि बदायूं की जनता ने जिसे सांसद बनाया है, असल में सांसद वही है। इन बातों का हम पर असर न पहले पड़ा है और न ही आगे पड़ेगा।
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सपा के शीर्ष नेताओं में शामिल सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव 2009 और 2014 में बदायूं लोकसभा सीट से बड़े अंतर से सांसद चुने गए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य से हुआ। डॉ. संघमित्रा मौर्य के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य उस समय प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इस चुनाव में डॉ. संघमित्रा मौर्य ने करीब 18 हजार वोट से धर्मेंद्र यादव को चुनाव हरा दिया। सपा ने मतगणना में धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाया था। बाद में धर्मेंद्र यादव ने डॉ. संघमित्रा मौर्य के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी।
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कोर्ट में धर्मेंद्र यादव की रिट पर सुनवाई चल रही थी। इस पर फैसला आने से पहले ही धर्मेंद्र यादव ने कोर्ट में हलफनामा देकर रिट वापस ले ली है। इसके बाद कोर्ट ने मामले को रद्द कर दिया है। दरअसल, यूपी विधानसभा चुनाव के समय डॉ. संघमित्रा मौर्य के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़ सपा में शामिल हो गए थे। स्वामी प्रसाद के सपा में जाने के बाद डॉ. संघमित्रा मौर्य कई बार भाजपा के प्रति ही मुखर दिखी थी। विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशियों के प्रचार में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। लंबे समय से वह पार्टी कार्यक्रमों से भी लगभग दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले निकाय चुनावों के साथ लोकसभा चुनाव में भी जिले के समीकरण प्रभावित होंगे।
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धर्मेंद्र बोले- स्वामी प्रसाद के सम्मान में वापस ली रिट
पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के सम्मान में रिट वापस ली है। स्वामी प्रसाद मौर्य पिछड़ा वर्ग के बड़े नेता हैं। वह सपा में शामिल होकर सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ मिलकर पिछड़ों को एकजुट करने के साथ पिछड़ों के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बदायूं से कहीं नहीं जा रहे। रही बात डॉ. संघमित्रा मौर्य की तो वह अब भी भाजपा की सदस्य हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में शामिल होने से सपा को मजबूती मिली है। पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव जोर शोर से लड़ेगी।
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हम तो कहेंगे हार को उन्होंने अब दिल से स्वीकार किया : संघमित्रा
सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य का कहना है कि याचिका दायर करना या वापस लेना उनकी व्यक्तिगत सोच है। हम तो यह कहेंगे कि 2019 की हार को उन्होंने अब दिल से स्वीकार किया है और ये मान लिया है कि बदायूं की जनता ने जिसे सांसद बनाया है, असल में सांसद वही है। इन बातों का हम पर असर न पहले पड़ा है और न ही आगे पड़ेगा।