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बड़ी उम्मीद से आए थे, निराशा हाथ लगी
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अमित सक्सेना
बदायूं। जिले में कई नेताओं को भाजपा की सूची ने जोर का झटका दिया है। शैलेश पाठक, रामसेवक पटेल, मेजर कैलाश जैसे नेता हाल ही में भाजपा में आए हैं। इन्हें अपने-अपने क्षेत्रों से टिकट की आस थी। अब जब भाजपा ने पुराने चेहरों पर ही भरोसा जता दिया है तो ये नेता पशोपेश में और समर्थक मायूस हैं। हालांकि अधिकतर नेता पार्टी प्रत्याशी को ही जीजान से चुनाव लड़ाने का दावा कर रहे हैं।
माना जा रहा था कि भाजपा की प्रत्याशियों की सूची नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के वक्त आएगी ताकि किसी को भितरघात या दलीय कूदफांद का मौका नहीं मिले। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी यह मानकर बैठे थे कि प्रत्याशियों की सूची हाईकमान ने अंदरूनी तौर पर फाइनल कर ली है पर इसे जारी करने में वक्त लगाएगी। इस दौरान पहली ही सूची में जिले के सभी छह प्रत्याशियों की घोषणा हो जाना काफी हैरत का विषय रहा। इसमें भी दूसरे दलों से आने वाले नेताओं की उम्मीदों पर तुषारापात जैसी स्थिति पैदा हुई है। शहर सीट पर पहले भाजपा के विरोध में चुनाव लड़ चुके हिंदूवादी नेता रामसेवक सिंह पटेल का महीने भर पहले पार्टी में आना कई संकेत दे रहा था। रामसेवक सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जन विश्वास यात्रा वाली जनसभा व अन्य बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में अपने कार्यकर्ताओं का संख्या बल दिखाकर अपने कद का अहसास कराया था। उनके खेमे को काफी उम्मीद थी कि उनका टिकट होगा और बड़े अंतर से वह चुनाव जीतेंगे पर यह नहीं हो सका।
इधर, सपा में बात न बनती देखकर ब्राह्मण क्रांति मोर्चा का गठन करने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश पाठक भी बिल्सी विधायक आरके शर्मा के बागी होते ही भाजपाई बना गए थे। यूं तो उनके भाजपा में जाने की अटकलें काफी समय से थीं पर अचानक उनकी एंट्री शर्मा के जाने पर ही हुई। माना गया कि भाजपा जमीनी नेता की पहचान रखने वाले शैलेश पाठक को टिकट दे सकती है। शैलेश ने अपने क्षेत्र दातागंज में सक्रियता बढ़ा रखी थी। राजनीतिक जानकार मान रहे थे कि शैलेश को दातागंज या बिल्सी में एक जगह टिकट मिल सकता है। इस बीच ब्राह्मण समाज के डीके भारद्वाज को सहसवान से टिकट देकर कोरम पूरा कर लिया गया और पाठक के हाथ कुछ नहीं लगा।
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इसी तरह बिसौली सीट पर पिछला चुनाव बसपा से लड़ चुके मेजर कैलाश ने भी भाजपा में एकाएक एंट्री ली थी। चूंकि मेजर ने अपना पहला चुनाव भाजपा से ही लड़ा था तो यह कयास लगाया जा रहा था कि कुशाग्र की बजाय मेजर कैलाश पर भाजपा दांव लगा सकती है। इस सूची के बाद मेजर कैलाश की दावेदारी जैसी खबरों पर भी विराम लग गया है।
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रामसेवक बोले- भाजपा प्रत्याशी को मन से लड़ाएंगे
भाजपा ही हमारी मूल विचारधारा वाली पार्टी है। पूरे मन से भाजपा में आए हैं। हमने पहले ही कह दिया था कि पार्टी जिसे टिकट देगी उसे लड़ाएंगे। इसमें किसी तरह के शक की गुंजाइश नहीं है।
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शैलेश ने कहा- अपने संगठन को भी मजबूत करेंगे
शैलेश पाठक का कहना कि वह भाजपा में हैं तो उनके लिए भाजपा के निर्देशों का पूरी तरह पालन करना है। साथ ही अपने मूल संगठन ब्राह्मण क्रांति मोर्चा को मजबूत करेंगे। गरीबों की लड़ाई हर हाल में लड़ते रहेंगे।
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मेजर की बात- भाजपा का निर्णय सिर माथे
मेजर कैलाश का कहना है कि भाजपा में टिकट के चक्कर में नहीं आए थे। भाजपा एक सिद्धांतवादी पार्टी है। उसके हर निर्णय का सम्मान करेंगे और प्रत्याशियों को मजबूत करेंगे।
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बदायूं। जिले में कई नेताओं को भाजपा की सूची ने जोर का झटका दिया है। शैलेश पाठक, रामसेवक पटेल, मेजर कैलाश जैसे नेता हाल ही में भाजपा में आए हैं। इन्हें अपने-अपने क्षेत्रों से टिकट की आस थी। अब जब भाजपा ने पुराने चेहरों पर ही भरोसा जता दिया है तो ये नेता पशोपेश में और समर्थक मायूस हैं। हालांकि अधिकतर नेता पार्टी प्रत्याशी को ही जीजान से चुनाव लड़ाने का दावा कर रहे हैं।
माना जा रहा था कि भाजपा की प्रत्याशियों की सूची नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के वक्त आएगी ताकि किसी को भितरघात या दलीय कूदफांद का मौका नहीं मिले। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी यह मानकर बैठे थे कि प्रत्याशियों की सूची हाईकमान ने अंदरूनी तौर पर फाइनल कर ली है पर इसे जारी करने में वक्त लगाएगी। इस दौरान पहली ही सूची में जिले के सभी छह प्रत्याशियों की घोषणा हो जाना काफी हैरत का विषय रहा। इसमें भी दूसरे दलों से आने वाले नेताओं की उम्मीदों पर तुषारापात जैसी स्थिति पैदा हुई है। शहर सीट पर पहले भाजपा के विरोध में चुनाव लड़ चुके हिंदूवादी नेता रामसेवक सिंह पटेल का महीने भर पहले पार्टी में आना कई संकेत दे रहा था। रामसेवक सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जन विश्वास यात्रा वाली जनसभा व अन्य बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में अपने कार्यकर्ताओं का संख्या बल दिखाकर अपने कद का अहसास कराया था। उनके खेमे को काफी उम्मीद थी कि उनका टिकट होगा और बड़े अंतर से वह चुनाव जीतेंगे पर यह नहीं हो सका।
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इधर, सपा में बात न बनती देखकर ब्राह्मण क्रांति मोर्चा का गठन करने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश पाठक भी बिल्सी विधायक आरके शर्मा के बागी होते ही भाजपाई बना गए थे। यूं तो उनके भाजपा में जाने की अटकलें काफी समय से थीं पर अचानक उनकी एंट्री शर्मा के जाने पर ही हुई। माना गया कि भाजपा जमीनी नेता की पहचान रखने वाले शैलेश पाठक को टिकट दे सकती है। शैलेश ने अपने क्षेत्र दातागंज में सक्रियता बढ़ा रखी थी। राजनीतिक जानकार मान रहे थे कि शैलेश को दातागंज या बिल्सी में एक जगह टिकट मिल सकता है। इस बीच ब्राह्मण समाज के डीके भारद्वाज को सहसवान से टिकट देकर कोरम पूरा कर लिया गया और पाठक के हाथ कुछ नहीं लगा।
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इसी तरह बिसौली सीट पर पिछला चुनाव बसपा से लड़ चुके मेजर कैलाश ने भी भाजपा में एकाएक एंट्री ली थी। चूंकि मेजर ने अपना पहला चुनाव भाजपा से ही लड़ा था तो यह कयास लगाया जा रहा था कि कुशाग्र की बजाय मेजर कैलाश पर भाजपा दांव लगा सकती है। इस सूची के बाद मेजर कैलाश की दावेदारी जैसी खबरों पर भी विराम लग गया है।
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रामसेवक बोले- भाजपा प्रत्याशी को मन से लड़ाएंगे
भाजपा ही हमारी मूल विचारधारा वाली पार्टी है। पूरे मन से भाजपा में आए हैं। हमने पहले ही कह दिया था कि पार्टी जिसे टिकट देगी उसे लड़ाएंगे। इसमें किसी तरह के शक की गुंजाइश नहीं है।
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शैलेश ने कहा- अपने संगठन को भी मजबूत करेंगे
शैलेश पाठक का कहना कि वह भाजपा में हैं तो उनके लिए भाजपा के निर्देशों का पूरी तरह पालन करना है। साथ ही अपने मूल संगठन ब्राह्मण क्रांति मोर्चा को मजबूत करेंगे। गरीबों की लड़ाई हर हाल में लड़ते रहेंगे।
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मेजर की बात- भाजपा का निर्णय सिर माथे
मेजर कैलाश का कहना है कि भाजपा में टिकट के चक्कर में नहीं आए थे। भाजपा एक सिद्धांतवादी पार्टी है। उसके हर निर्णय का सम्मान करेंगे और प्रत्याशियों को मजबूत करेंगे।