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पंचायतीराज व्यवस्था को मिले ठोस संवैधानिक अधिकार
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2016 11:37 PM IST
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पंचायतीराज व्यवस्था
- फोटो : अमर उजाला
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जिला पंचायत ने मनाई पंचायतीराज के 73वें संशोधन की 25वीं वर्षगांठ
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन के 25वीं वर्षगांठ पर जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा ने कहा है कि संशोधान के साथ ही पंचायतीराज व्यवस्था को ठोस संवैधानिक अधिकार मिले हैं। जिससे यह व्यवस्था आत्मनिर्भरता और मजबूती की ओर अग्रसर हुई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था मील का पत्थर साबित हुई। पंचायतीराज व्यवस्था में जो दोष और कमियां रहीं थीं। संशोधन में उन्हें परिमार्जित कर लिया गया। हालांकि जिला पंचायत के सदस्यों ने इसे और परिमार्जित कर आर्थिक तौर पर मजबूत कर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। कहा कि इसके लिए सलाह और सुझावों का आगे भी स्वागत होते रहना चाहिए।
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बिसौली विधायक आशुतोष मौर्य ने त्रिस्तरीय पंचायतों को स्वावलंबी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर बल दिया। कहा कि संशोधन के बाद पंचायतों के अधिकारों को प्रभावी बनाया गया है जो इसकी मजबूती का सबल आधार है।
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सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया ने विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए पंचायतीराज व्यवस्था की सबलता का खाका खींचा। कहा कि पंचायतों को शासन की विभिन्न योजनाएं संचालित हो रही हैं।क इनमें मातृत्व जननी योजना, जल संसाधन योजना, लोहिया आवास योजना, 108 एंबुलेंस योजना आदि का लाभ जनता को सीधे मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि इन योजनाओं का क्रियान्वयन और प्रभावी रूप से करने की आवश्यकता है। ताकि पंचायतीराज व्यवस्था का सपना पूरा हो सके।
ब्लाक प्रमुख उझानी एवं जिला पंचायत सदस्य दुर्वेश यादव और डॉ. शकील अहमद ने पंचायतों को 14वें वित्त आयोग की धनराशि के साथ क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों को आवंटित राशि में कटौती पर चिंता जताई। कहा कि भारत में त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था है कि इसमें जिला पंचायत इस व्यवस्था में सबसे ऊपर आती है। इसके सदस्य भी जनता निर्वाचित करती है और इन सदस्यों से अपेक्षाएं भी रखती है। अगर, जिला पंचायत को मिलने वाले धन में कटौती होती है तो जिला पंचायत द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस अवसर पर सीएमओ डॉ. सुनील कुमार, एएमए हरिपाल सिंह यादव, ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत के कई सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन अभियंता संजय शर्मा ने किया।
कटौती को आधार बनाकर प्रस्ताव बनाने का हुआ आह्वान
कार्यक्रम के दौरान सभी सदस्यों ने इस आशय का एक प्रस्ताव पारित कर उप्र सरकार के माध्यम से भारत सरकार को भिजवाया जाए। इस प्रस्ताव को सर्व सम्मति से समर्थन मिला।
प्रस्तावों का मॉडल बाइलाइज के तहत होगा आंकलन
सीडीओ भदौरिया ने यहां पंचायतराज विभाग का एक विशेष पक्ष उजागर किया और बताया कि 14वें वित्त के धन से विकास के लिए प्रस्तावों का मॉडल बाइलाइज के तहत आंकलन होगा। इसकी स्वीकृति के बाद कार्य होंगे। अगर, इसमें कोई घपला होता है या धन का दुरुपयोग होता है तो उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए दोषियों को जेल भेजने में देरी नहीं की जाएगी।