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Budaun News: जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट, फिर भी खरीद रहे सिलिंडर
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जिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
बदायूं। कोरोना काल में जिला अस्पताल में करीब 93 लाख रुपये से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। प्रत्येक बेड तक आक्सीजन आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाई गई। फिर भी अस्पताल को आक्सीजन सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। खासकर आईसीयू के लिए सिलिंडर खरीदा गया है। इस पर हर महीने हजारों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
महीने में करीब 80 छोटे और पांच बड़े सिलिंडर बरेली से खरीदे जा रहे हैं। छोटे सिलिंडर की सरकारी कीमत 150 रुपये और बड़े की कीमत 400 रुपये है। पांच माह में 400 छोटे और 25 बड़े सिलिंडर खरीदकर खरीदे गए हैं। इस पर 60 हजार रुपये खर्च हुए। आक्सीजन प्लांट से आपूर्ति एक दो वार्ड तक ही है। इसके अलावा सिलिंडर से ही मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है। जिला अस्पताल में रोजाना करीब एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। उसमें से करीब 10 से 15 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।
सिलिंडर लाने में लगता है समय
वार्ड में भर्ती मरीज राजकुमार ने बताया कि सांस की दिक्कत होने पर परिवार वालों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार की रात को उनकी हालत बिगड़ी तो डॉक्टर ने ऑक्सीजन लगाने को कहा। करीब आधा घंटे बाद ऑक्सीजन सिलिंडर आया। वहां पर मरीज की देखरेख ठीक से न होने की वजह से अब वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।
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मुश्किल से मिला ऑक्सीजन सिलिंडर
कासगंज के रहने वाले ओमप्रकाश ने बताया कि उसके चाचा उसहैत थाना क्षेत्र में अपने रिश्तेदारी में आए थे। उनकी हालत सोमवार को अचानक बिगड़ गई। पहले सीएचसी पर दिखाया, लेकिन डॉक्टर ने ऑक्सीजन की कमी होने की बात कहकर जिला अस्पताल भेज दिया। यहां भर्ती होने के बाद बमुश्किल ऑक्सीजन मिल सकी।
सभी वार्ड नहीं बिछाई गई पाइपलाइन ऑक्सीजन प्लांट में गैस तैयार की जाती है। यहां पर 10,000 लीटर की क्षमता का टैंक है। मरीजों तक ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पाइपलाइन बिछाई गई है। टैंक खाली होने पर फिर से उसे भरा जाता है, लेकिन अभी कुछ वार्ड ऐसे हैं जहां पाइप लाइन ही नहीं है।
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कोट
ऑक्सीजन प्लांट से गैस रिफिलिंग की सुविधा नहीं है। इसी वजह से सिलिंडर खरीदे जाते हैं। हालांकि, अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर और कंसंट्रेटर की कमी नहीं है। कुछ बेड तक तो गैस की सीधी सप्लाई है। अभी कुछ वार्ड में पाइपलाइन नहीं है। इसलिए सिलिंडर लिया गया है।
- डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
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महीने में करीब 80 छोटे और पांच बड़े सिलिंडर बरेली से खरीदे जा रहे हैं। छोटे सिलिंडर की सरकारी कीमत 150 रुपये और बड़े की कीमत 400 रुपये है। पांच माह में 400 छोटे और 25 बड़े सिलिंडर खरीदकर खरीदे गए हैं। इस पर 60 हजार रुपये खर्च हुए। आक्सीजन प्लांट से आपूर्ति एक दो वार्ड तक ही है। इसके अलावा सिलिंडर से ही मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है। जिला अस्पताल में रोजाना करीब एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। उसमें से करीब 10 से 15 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।
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सिलिंडर लाने में लगता है समय
वार्ड में भर्ती मरीज राजकुमार ने बताया कि सांस की दिक्कत होने पर परिवार वालों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार की रात को उनकी हालत बिगड़ी तो डॉक्टर ने ऑक्सीजन लगाने को कहा। करीब आधा घंटे बाद ऑक्सीजन सिलिंडर आया। वहां पर मरीज की देखरेख ठीक से न होने की वजह से अब वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।
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मुश्किल से मिला ऑक्सीजन सिलिंडर
कासगंज के रहने वाले ओमप्रकाश ने बताया कि उसके चाचा उसहैत थाना क्षेत्र में अपने रिश्तेदारी में आए थे। उनकी हालत सोमवार को अचानक बिगड़ गई। पहले सीएचसी पर दिखाया, लेकिन डॉक्टर ने ऑक्सीजन की कमी होने की बात कहकर जिला अस्पताल भेज दिया। यहां भर्ती होने के बाद बमुश्किल ऑक्सीजन मिल सकी।
सभी वार्ड नहीं बिछाई गई पाइपलाइन ऑक्सीजन प्लांट में गैस तैयार की जाती है। यहां पर 10,000 लीटर की क्षमता का टैंक है। मरीजों तक ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पाइपलाइन बिछाई गई है। टैंक खाली होने पर फिर से उसे भरा जाता है, लेकिन अभी कुछ वार्ड ऐसे हैं जहां पाइप लाइन ही नहीं है।
कोट
ऑक्सीजन प्लांट से गैस रिफिलिंग की सुविधा नहीं है। इसी वजह से सिलिंडर खरीदे जाते हैं। हालांकि, अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर और कंसंट्रेटर की कमी नहीं है। कुछ बेड तक तो गैस की सीधी सप्लाई है। अभी कुछ वार्ड में पाइपलाइन नहीं है। इसलिए सिलिंडर लिया गया है।
- डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस