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Budaun News: रेन वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर स्कूलों में गड्ढे खोदकर भाग गई संस्था

Wed, 22 Mar 2023 11:53 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 Mar 2023 11:53 PM IST
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Organization ran away after digging pits in schools in the name of rain water harvesting
22 बीडीएन-01) रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।संवाद
- आज भी स्कूलों में खुले पड़े हैं गड्ढे, हो सकता है कभी भी कोई बड़ा हादसा
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- कार्यदायी संस्था ने करीब तीन माह पहले शुरू किया था इन्हें बनाने का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। शासन के निर्देश पर जिले के परिषदीय स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना था, इसको लेकर डीएम ने भी कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया था। कार्यदायी संस्था ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए काम करना शुरू कर दिया था, पर कार्यदायी संस्था ने काम बीच में छोड़ दिया। इसकी वजह से आज भी स्कूलों में गड्ढे खुले पड़े हैं। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
जिले में पानी के गिरते जलस्तर को लेकर हर कोई परेशान है। ऐसे में सरकार ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे। इन्हें बनाने का जिम्मा लघु सिंचाई विभाग को दिया गया। इसके तहत उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक 570 स्कूलों का चयन किया। करीब एक लाख 90 हजार रुपये की लागत से इसको बनाया जाना था। इसको लेकर करीब तीन माह पहले कार्यदायी संस्था ने स्कूलों में इसको बनाने का काम शुरू कर दिया था। इसके बनने से स्कूल परिसर में होने वाले जलभराव की समस्या से शिक्षक और बच्चों को छुटकारा मिल जाता। इसके अलावा बरसाती पानी का संरक्षण भी किया जा सकता था, लेकिन गड्ढा खोदकर विभाग इससे आगे का काम कराना भूल गया है। ऐसे में यह गड्ढे अभी खुले पड़े हैं। इस कारण यहां पर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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रिचार्ज पिट में 25 से 30 मीटर गहरा होता है बोरिंग
लघु सिंचाई विभाग के अनुसार, बारिश में छतों पर गिरने वाले पानी को एकत्र कर पाइप के जरिये भूजल रिचार्ज किया जाता है। इसके लिए छत से आने वाले पाइप को दो चेंबर में होकर गुजारते हैं। पहला चेंबर सिल्ट चेंबर होता है, जिसमें बारिश के पानी में मौजूद सिल्ट व अन्य गंदगी को शोधित करते हैं। फिर सिल्ट चेंबर से साफ पानी रिचार्ज पिट में जाता है। रिचार्ज पिट में 25 से 30 मीटर गहरा बोरिंग होता है, जो बारिश के पानी को बलुई जल स्रोत में मिलाता है।
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सरकारी बिल्डिंग में बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी नहीं कर रहे काम
डीएम आवास, पावर कॉरपोरेशन कार्यालय, सीडीओ आवास, जिला अस्पताल, नगर पालिका, एसएसपी कार्यालय, जल निगम और विकास भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए है। विकास भवन का रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कई साल से खराब पड़ा है। इसको सही कराने के लिए करीब डेढ़ साल पहले स्टीमेट लघु सिंचाई विभाग से बनकर जा चुका है। इसके अलावा नगर पालिका, जिला अस्पताल, पावर कॉरपोरेशन आदि अभी खराब पड़े हैं।

ये इलाके हैं डार्क जोन में शामिल
जिले में आसफपुर, इस्लामनगर और अंबियापुर अब तक डार्क जोन में शामिल हैं। इसके अलावा बिसौली, जगत, म्याऊं, कादरचौक, सहसवान, उझानी और सालारपुर सेमी डार्क जोन में है, जबकि दातागंज, समरेर, उसावां, वजीरगंज और दहगवां को श्वेत श्रेणी में रखा गया है।

अमृत सरोवर भी नहीं सहेज पा रहे पानी, अधिकांश सूखे
शासन के निर्देश पर जिले में सरोवरों को बनाया गया था। मकसद था कि जिले में गिरते जलस्तर को रोका जा सके, लेकिन जिले में बने अमृत सरोवर भी पानी को नहीं सहेज पा रहे हैं। पिछले साल इन अमृत सरोवरों में कुछ पानी एकत्र हुआ था, लेकिन पंचायत राज विभाग की ओर से इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। इस वजह से अधिकांश सरोवर सूख चुके हैं।


जिले में 570 स्कूलों का चयन किया गया था। अधिकांश जगहों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का काम किया जा रहा है। अगर कहीं पर काम बंद हुआ है तो उसे दिखवाया जाएगा। उसे जल्द से जल्द पूरा कराया जाएगा, ताकि बारिश के दिनों में अधिकाधिक जल का संचयन किया जा सके।
- कामेंद सिंह, अवर अभियंता लघु सिंचाई

22 बीडीएन-01) रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।संवाद

22 बीडीएन-01) रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।संवाद

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