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Budaun News: बीमा कंपनी को एक लाख रुपये ब्याज सहित भुगतान का आदेश
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दुर्घटना बीमा की राशि देने से किया था इंकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिला उपभोक्ता फोरम पीठ के अध्यक्ष संजीव यादव, सदस्यगण एनसी बिसारिया, अनीता ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को एक लाख रुपये छह प्रतिशत ब्याज सहित परिवादिनी को देने का आदेश दिया है। पीठ ने विपक्षी बीमा कंपनी को परिवादिनी के लिए दो हजार रुपये वाद व्यय देने का भी आदेश दिया है।
शहर के मोहल्ला ब्रहमपुर फ़ानी रोड निवासी प्रभा सक्सेना पत्नी रमेश सक्सेना ने अपने अधिवक्ता अशोक कुमार वर्मा के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम की पीठ में परिवाद दायर किया था। इसके अनुसार परिवादी के पुत्र शरद सक्सेना ने गोयल संस से एक बाइक खरीदी थी। गोयल संस के कर्मचारियों ने बताया कि 125 रुपये में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी एक साल के लिए दुर्घटना बीमा कर रही है। शरद सक्सेना ने दुर्घटना बीमा करा लिया। परिवादिनी के पुत्र की 11 फरवरी 2010 को रास्ते में दुर्घटना से मृत्यु हो गई। परिवादिनी ने पुत्र की मृत्यु का दावा बीमा कंपनी में भेजा जिसे बीमा कंपनी ने टालमटोल करते हुए दुर्घटना बीमा का एक लाख रुपये देने से मना कर दिया। जिला उपभोक्ता फोरम की पीठ ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की सेवा में कमी मानकर परिवाद स्वीकार कर बीमा कंपनी को एक लाख रुपये छह प्रतिशत ब्याज की दर से अदा करने का आदेश दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिला उपभोक्ता फोरम पीठ के अध्यक्ष संजीव यादव, सदस्यगण एनसी बिसारिया, अनीता ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को एक लाख रुपये छह प्रतिशत ब्याज सहित परिवादिनी को देने का आदेश दिया है। पीठ ने विपक्षी बीमा कंपनी को परिवादिनी के लिए दो हजार रुपये वाद व्यय देने का भी आदेश दिया है।
शहर के मोहल्ला ब्रहमपुर फ़ानी रोड निवासी प्रभा सक्सेना पत्नी रमेश सक्सेना ने अपने अधिवक्ता अशोक कुमार वर्मा के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम की पीठ में परिवाद दायर किया था। इसके अनुसार परिवादी के पुत्र शरद सक्सेना ने गोयल संस से एक बाइक खरीदी थी। गोयल संस के कर्मचारियों ने बताया कि 125 रुपये में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी एक साल के लिए दुर्घटना बीमा कर रही है। शरद सक्सेना ने दुर्घटना बीमा करा लिया। परिवादिनी के पुत्र की 11 फरवरी 2010 को रास्ते में दुर्घटना से मृत्यु हो गई। परिवादिनी ने पुत्र की मृत्यु का दावा बीमा कंपनी में भेजा जिसे बीमा कंपनी ने टालमटोल करते हुए दुर्घटना बीमा का एक लाख रुपये देने से मना कर दिया। जिला उपभोक्ता फोरम की पीठ ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की सेवा में कमी मानकर परिवाद स्वीकार कर बीमा कंपनी को एक लाख रुपये छह प्रतिशत ब्याज की दर से अदा करने का आदेश दिया है।
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