{"_id":"58ab28864f1c1b4a55b23590","slug":"opium-production-is-a-dominant-force-badaun-266-new-licenses","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफीम उत्पादन में होगी बदायूं की धाक, 266 नए लाइसेंस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफीम उत्पादन में होगी बदायूं की धाक, 266 नए लाइसेंस
रजनीश रिंकू पांडेय बदायूं।
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
अफीम की खेती
- फोटो : self
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-सूबे में कुल अफीम उत्पादन के 1754 लाइसेंस, बदायूं में 315
-डोडा निस्तारण की व्यवस्था न होने से उत्पादक किसान परेशान
मेंथा उत्पादन में बदायूं की धाक पहले से है। अब अफीम उत्पादन में भी जिले का रसूख होगा। जिले के 266 नए किसानों को अफीम उत्पादन के लाइसेंस मिल गए हैं। इसके साथ ही जिले में अफीम उत्पादक किसानों की संख्या बढ़कर 315 हो गई है। बाराबंकी के बाद अफीम उत्पादन के मामले में बदायूं सूबे में दूसरे नंबर पर होगा। हालांकि, डोडा निस्तारण के लिए प्रदेश सरकार की अब तक कोई नीति न होने से अफीम उत्पादक किसान पशोपेश में हैं।
अफीम उत्पादन के लिए भारत सरकार का केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो लाइसेंस जारी करता है। पूरे प्रदेश का नियंत्रण अफीम अधिकारी बाराबंकी के पास है। अब तक जिले में 49 काश्तकारों के पास ही अफीम उत्पादन के लाइसेंस थे। 266 नए लाइसेंस मिलने से इनकी संख्या अब 315 हो गई है। अफीम उत्पादन करने वाले गांवों की संख्या भी जिले में अब 95 हो गई है। जिले के 49 पुराने काश्तकारों के लाइसेंस को एक एरी से बढ़ाकर दो एरी कर दिया गया है। नए किसानों को फिलहाल एक एरी का ही लाइसेंस दिया गया है। एक एरी क्षेत्रफल में 540 ग्राम ठोस अफीम उत्पादन की शर्त रखी गई है।
बरेली-बदायूं में थे पांच हजार किसान
बदायूं। वर्ष 1999-2000 तक बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर के 250 गांवों में अफीम उत्पादक करीब पांच हजार काश्तकार थे। बाद में इनकी संख्या में तेजी से कमी आनी शुरू हुई। केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग की सख्त नीतियों का किसान पालन नहीं कर सके। धीरे-धीरे तमाम लाइसेंस निरस्त हो गए। एक दशक तक लाइसेंस जारी होने बंद हो गए। बरेली और शाहजहांपुर के दफ्तर बंद कर दिए गए। नारकोटिक्स विभाग ने लाइसेंस की प्रक्रिया में अब कुछ बदलाव कर इसे सरल कर दिया है। इसके साथ ही इन जिलों में अफीम काश्तकारों की तादाद भी बढ़ने लगी है।
विज्ञापन
पोस्ता की व्यवस्था, डोडा निस्तारण की नीति नहीं
बदायूं। अफीम के पौधे से निकलने वाला पोस्ता मादक पदार्थ की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में किसान इसे तो खुले बाजार में आसानी से बेच लेता है। लेकिन डोडा मादक पदार्थ की श्रेणी में आता है। इसके निस्तारण की कोई नीति न होने की वजह से किसान को नुकसान हो रहा है। डोडा की बिक्री और स्टॉक का लाइसेंस आबकारी विभाग जारी करता है। आबकारी विभाग की ओर से डोडा लाइसेंस की शर्तें काफी सख्त हैं। ऐसे में डोडा की तस्करी भी होती है। पिछले साल किसानों को डोडा जलाना पड़ा था।
अफीम की खेती पर नजर रखने के लिए बरेली में निरीक्षक की तैनाती है। बदायूं जिले में 266 काश्तकारों को नए लाइसेंस जारी किए गए हैं। सूबे में मैनपुरी के बाद सबसे ज्यादा अफीम काश्तकार बदायूं में हो गए हैं।
-धर्मेंद्र श्रोतीय, अफीम अधिकारी
बदायूं में पहले भी अफीम का अच्छा उत्पादन होता था। अफीम की खेती पर नजर रखने के लिए बरेली में भी निरीक्षक स्तर का कार्यालय है। लेकिन, लाइसेंस और अफीम उत्पादन पर बाराबंकी कार्यालय का ही नियंत्रण है।
- राजीव गुप्ता, निरीक्षक अफीम विभाग
विज्ञापन
-डोडा निस्तारण की व्यवस्था न होने से उत्पादक किसान परेशान
मेंथा उत्पादन में बदायूं की धाक पहले से है। अब अफीम उत्पादन में भी जिले का रसूख होगा। जिले के 266 नए किसानों को अफीम उत्पादन के लाइसेंस मिल गए हैं। इसके साथ ही जिले में अफीम उत्पादक किसानों की संख्या बढ़कर 315 हो गई है। बाराबंकी के बाद अफीम उत्पादन के मामले में बदायूं सूबे में दूसरे नंबर पर होगा। हालांकि, डोडा निस्तारण के लिए प्रदेश सरकार की अब तक कोई नीति न होने से अफीम उत्पादक किसान पशोपेश में हैं।
अफीम उत्पादन के लिए भारत सरकार का केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो लाइसेंस जारी करता है। पूरे प्रदेश का नियंत्रण अफीम अधिकारी बाराबंकी के पास है। अब तक जिले में 49 काश्तकारों के पास ही अफीम उत्पादन के लाइसेंस थे। 266 नए लाइसेंस मिलने से इनकी संख्या अब 315 हो गई है। अफीम उत्पादन करने वाले गांवों की संख्या भी जिले में अब 95 हो गई है। जिले के 49 पुराने काश्तकारों के लाइसेंस को एक एरी से बढ़ाकर दो एरी कर दिया गया है। नए किसानों को फिलहाल एक एरी का ही लाइसेंस दिया गया है। एक एरी क्षेत्रफल में 540 ग्राम ठोस अफीम उत्पादन की शर्त रखी गई है।
विज्ञापन
बरेली-बदायूं में थे पांच हजार किसान
बदायूं। वर्ष 1999-2000 तक बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर के 250 गांवों में अफीम उत्पादक करीब पांच हजार काश्तकार थे। बाद में इनकी संख्या में तेजी से कमी आनी शुरू हुई। केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग की सख्त नीतियों का किसान पालन नहीं कर सके। धीरे-धीरे तमाम लाइसेंस निरस्त हो गए। एक दशक तक लाइसेंस जारी होने बंद हो गए। बरेली और शाहजहांपुर के दफ्तर बंद कर दिए गए। नारकोटिक्स विभाग ने लाइसेंस की प्रक्रिया में अब कुछ बदलाव कर इसे सरल कर दिया है। इसके साथ ही इन जिलों में अफीम काश्तकारों की तादाद भी बढ़ने लगी है।
विज्ञापन
पोस्ता की व्यवस्था, डोडा निस्तारण की नीति नहीं
बदायूं। अफीम के पौधे से निकलने वाला पोस्ता मादक पदार्थ की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में किसान इसे तो खुले बाजार में आसानी से बेच लेता है। लेकिन डोडा मादक पदार्थ की श्रेणी में आता है। इसके निस्तारण की कोई नीति न होने की वजह से किसान को नुकसान हो रहा है। डोडा की बिक्री और स्टॉक का लाइसेंस आबकारी विभाग जारी करता है। आबकारी विभाग की ओर से डोडा लाइसेंस की शर्तें काफी सख्त हैं। ऐसे में डोडा की तस्करी भी होती है। पिछले साल किसानों को डोडा जलाना पड़ा था।
अफीम की खेती पर नजर रखने के लिए बरेली में निरीक्षक की तैनाती है। बदायूं जिले में 266 काश्तकारों को नए लाइसेंस जारी किए गए हैं। सूबे में मैनपुरी के बाद सबसे ज्यादा अफीम काश्तकार बदायूं में हो गए हैं।
-धर्मेंद्र श्रोतीय, अफीम अधिकारी
बदायूं में पहले भी अफीम का अच्छा उत्पादन होता था। अफीम की खेती पर नजर रखने के लिए बरेली में भी निरीक्षक स्तर का कार्यालय है। लेकिन, लाइसेंस और अफीम उत्पादन पर बाराबंकी कार्यालय का ही नियंत्रण है।
- राजीव गुप्ता, निरीक्षक अफीम विभाग