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अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को लटका सर्वे कार्य
badaun
Updated Tue, 30 Jun 2015 08:05 PM IST
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जिले में नए राशन कार्ड वितरण में लंबे समय से झोल आ रही है। उपभोक्ता राशन आदि से बड़ी तादाद में वंचित हो रहे हैं। कोटेदार भी अव्यवस्था का फायदा उठाकर लोगों के राशन कार्ड अपने पास रखकर सामग्री भी हजम कर रहे हैं। गरीबों के लिए सस्ते अनाज का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लिए निर्धारित सर्वे कोई गति नहीं पकड़ पा रहा है। इससे लोगों को दिक्कतें शुरू हो गई हैं। इसके लिए जिम्मेदार भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इस वजह राशन कार्ड वितरण प्रणाली एक बार फिर लडख़ड़ा रही है।
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नए राशन कार्ड वितरण का हाल यह है कि 2011 से इसे तैयार होकर वितरित हो जाना चाहिए था लेकिन शिथिल प्रशासनिक मशीनरी के कारण इसमें बाधाएं आती रहीं। प्रशासनिक मशीनरी को उलझाए भी रखा गया और काम भी नहीं हुआ। एक-एककर कई साल निकाल दिए गए। राशन कोटेदार इस आपाधापी में राशन में गड़बड़ियां भी करते रहे। केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत गरीबों को बेहद कम मूल्यों पर खाद्यान्न देना चाहती है। इसके लिए सर्वे की बात आई तो नगरीय क्षेत्रों में नगर निकायों के कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतराज से जुड़े सचिव और राजस्व परिषद से जुड़े लेखपाल शामिल किए गए।
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एक धारणा बन गई है टलेगा सर्वे
यह सर्वे 17 जुलाई को पूरा होकर आ जाना चाहिए लेकिन सरकारी मशीनरी का हाल ये है कि अभी तो अधिकतर जगहों पर सर्वे शुरू भी नहीं हुआ है। जो इसके लिए जिम्मेदार बनाए गए हैं। उनकी धारणा पूर्व की भांति हैं कि हो जाएगा सर्वे अभी एक-दो बार और समय बढ़ सकता है।
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कोटेदारों को मिलता है गड़बड़ियों को मौका
सर्वे और राशन कार्ड बनाने समेत तमाम मामलों में परेशान उपभोक्ता राशन कार्ड लेकर कोटेदारों की शरण में पहुंचते हैं तो कोटेदार उन्हें ब्लैकमेल कर लेता है और अपने पास जमा कर जल्दी ही उसका नए राशन कार्ड में नंबर आ जाने को भरोसा दिलाकर खाद्यान्न झटकता रहता है।
कोटेदारों पर निगरानी है। जहां कोई शिकायत मिलती है कार्रवाई भी की जाती है। राष्ट्रीय खाद्य सुररक्षा अधिनियम का सर्वे होकर आएगा तो इससे संबंधित राशन कार्ड सुनिश्चत होंगे। उन्हें उम्मीद है कि सर्वे अपनी नियत तारीख पर हो जाएगा।
-सत्यदेव, जिला पूर्ति अधिकारी