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Budaun News: चार साल से अटका है नगर पालिका का सीमा विस्तार, खामियाजा भुगत रहे 15 हजार लोग
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सिरसा रोड की टूटी पड़ी सड़क। संवाद
बदायूं। नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार का मसौदा काफी समय से तैयार है। पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाली नई काॅलोनियों और गांवों को पालिका में शामिल करने के लिए सर्वे भी हो चुका है। करीब चार साल पहले बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव भी पास हो गया। इसके बाद फाइल मंजूरी के लिए शासन को भेज दी गई। तब से वहीं अटकी है।
शहर के अंदर भी कई हिस्से ऐसे हैं जो राजस्व सीमा के हिसाब से ग्राम पंचायत की सीमा में हैं। लिहाजा नगर पालिका उनमें विकास कार्य नहीं कराती है और ग्राम पंचायत भी ध्यान नहीं देती है। लिहाजा इन इलाकों के लोग शहर में रहते हुए भी गांव के स्तर की सुविधाओं से भी वंचित हैं। विजय नगर, सिरसा, नवादा, नगला, बाबा कॉलोनी में बदतर स्थिति है। यहां की 15 हजार से अधिक की आबादी दिक्कतें झेल रही है।
शहर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने 29 नवंबर 2019 को नगर विकास राज्यमंत्री के पद पर रहते हुए नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा था। तब प्रमुख सचिव ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर कार्यवाही आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके बाद सीमा विस्तार के लिए शहर के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में आ रहे गांवों और कॉलोनियों को शामिल करने के लिए सर्वे हुआ।
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इसमें 26 गांवों को नगर पालिका में शामिल करने की संस्तुति की गई, लेकिन जनप्रतिनिधियों के पैरवी न करने से शासन स्तर पर फाइल अटक गई। इस बीच नगर पालिका परिषद में सत्ता परिवर्तन हो गया। नए बोर्ड ने पुराने प्रस्ताव पर कोई काम नहीं किया। सीमा विस्तार न होने की वजह से शहर से सटे इलाकों में लोग सुविधाओं से महरूम हैं।
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ये गांव होने थे शामिल
- सीमा विस्तार में बहेड़ी, गुराई, आरिफपुर नवादा, खेड़ा बुजुर्ग, पडौलिया, शिकरापुर, खुनक, चंदन नगर खरैर, मझिया, लखनपुर, आमगांव, आलमपुर, सालारपुर, भगवतीपुर, दहेमी, नौशेरा, शेखूपुर, जहानाबाद, गालिम पट्टी, दौरी, नरऊ बुजुर्ग, रसूलपुर, नरऊ खुर्द, पड़ौआ, नगला शर्की, सोवरनपुर और बदायूं चुंगी से बाहर का इलाका।
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न स्ट्रीट लाइटें हैं और न ही सड़कें सलामत
- न स्ट्रीट लाइटेंं हैं और न ही सड़कें ठीक हैं। रोजाना सफाई नहीं होती है। सड़कों पर जलभराव रहता है। गड्ढों में तब्दील सड़कों पर चलना दुश्वार है। कई बार लोग गिरकर चोट हो खा चुके हैं।
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फोटो-41
- मेरे मोहल्ले में अधिकांश सड़कें टूटी हैं। इन्हें बनवाने के लिए कई बार प्रधान से कहा, लेकिन वह कोई ध्यान नहीं देते हैं। नगर पालिका भी कोई काम नहीं कराती है। इसकी वजह से दिक्कत हो रही है। - महीलाल, सिरसा रोड
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फोटो-42
- पथ प्रकाश से लेकर सफाई तक व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। रात में सड़कों पर अंधेरा रहता है। टूटी सड़कें और अंधेरा होने की वजह से कई बार लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। - वीके सिंह, सुभाषनगर
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शहर के अंदर भी कई हिस्से ऐसे हैं जो राजस्व सीमा के हिसाब से ग्राम पंचायत की सीमा में हैं। लिहाजा नगर पालिका उनमें विकास कार्य नहीं कराती है और ग्राम पंचायत भी ध्यान नहीं देती है। लिहाजा इन इलाकों के लोग शहर में रहते हुए भी गांव के स्तर की सुविधाओं से भी वंचित हैं। विजय नगर, सिरसा, नवादा, नगला, बाबा कॉलोनी में बदतर स्थिति है। यहां की 15 हजार से अधिक की आबादी दिक्कतें झेल रही है।
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शहर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने 29 नवंबर 2019 को नगर विकास राज्यमंत्री के पद पर रहते हुए नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा था। तब प्रमुख सचिव ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर कार्यवाही आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके बाद सीमा विस्तार के लिए शहर के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में आ रहे गांवों और कॉलोनियों को शामिल करने के लिए सर्वे हुआ।
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इसमें 26 गांवों को नगर पालिका में शामिल करने की संस्तुति की गई, लेकिन जनप्रतिनिधियों के पैरवी न करने से शासन स्तर पर फाइल अटक गई। इस बीच नगर पालिका परिषद में सत्ता परिवर्तन हो गया। नए बोर्ड ने पुराने प्रस्ताव पर कोई काम नहीं किया। सीमा विस्तार न होने की वजह से शहर से सटे इलाकों में लोग सुविधाओं से महरूम हैं।
ये गांव होने थे शामिल
- सीमा विस्तार में बहेड़ी, गुराई, आरिफपुर नवादा, खेड़ा बुजुर्ग, पडौलिया, शिकरापुर, खुनक, चंदन नगर खरैर, मझिया, लखनपुर, आमगांव, आलमपुर, सालारपुर, भगवतीपुर, दहेमी, नौशेरा, शेखूपुर, जहानाबाद, गालिम पट्टी, दौरी, नरऊ बुजुर्ग, रसूलपुर, नरऊ खुर्द, पड़ौआ, नगला शर्की, सोवरनपुर और बदायूं चुंगी से बाहर का इलाका।
न स्ट्रीट लाइटें हैं और न ही सड़कें सलामत
- न स्ट्रीट लाइटेंं हैं और न ही सड़कें ठीक हैं। रोजाना सफाई नहीं होती है। सड़कों पर जलभराव रहता है। गड्ढों में तब्दील सड़कों पर चलना दुश्वार है। कई बार लोग गिरकर चोट हो खा चुके हैं।
फोटो-41
- मेरे मोहल्ले में अधिकांश सड़कें टूटी हैं। इन्हें बनवाने के लिए कई बार प्रधान से कहा, लेकिन वह कोई ध्यान नहीं देते हैं। नगर पालिका भी कोई काम नहीं कराती है। इसकी वजह से दिक्कत हो रही है। - महीलाल, सिरसा रोड
फोटो-42
- पथ प्रकाश से लेकर सफाई तक व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। रात में सड़कों पर अंधेरा रहता है। टूटी सड़कें और अंधेरा होने की वजह से कई बार लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। - वीके सिंह, सुभाषनगर

सिरसा रोड की टूटी पड़ी सड़क। संवाद

सिरसा रोड की टूटी पड़ी सड़क। संवाद

सिरसा रोड की टूटी पड़ी सड़क। संवाद