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Budaun News: अष्टमी पर मां गौरी की पूजा, कराया कन्या भोज
Mon, 23 Oct 2023 12:38 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 23 Oct 2023 12:38 AM IST
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नगला मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
बदायूं। शहर समेत देहात क्षेत्र के देवी मंदिरों और घरों में देवी के अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना की गई। अष्टमी के व्रत रखने वालों ने कन्या भोज कराया और कन्याओं के पैरों को छूकर आशीर्वाद लिया। नगला मंदिर में भी भक्तों की भीड़ रही।
शहर के नगला मंदिर समेत बिरुआबाड़ी मंदिर, हरप्रसाद मंदिर, गौरीशंकर मंदिर और कस्बों के देवी मंदिरों पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। उन्होंने मां के दरबार में हाजिरी लगाई और सुख समृद्धि की कामना की। सुबह से लेकर दोपहर तक मंदिरों में भक्तों की लाइन लगी रही। लोगों ने अपनी बारी आने का इंतजार किया।
आज ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा : पं. गिरीश शर्मा के अनुसार, सर्वप्रथम कलश की पूजा और उसमें स्थापित सभी देवी-देवताओ का ध्यान करना चाहिए। रोली, कुमकुम, पुष्प, चुनरी आदि से मां की भक्ति भाव से पूजा करें। हलुआ, पूरी, खीर, चने, नारियल से माता को भोग लगाएं। इस दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन करना चाहिए। कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम नौ होनी ही चाहिए। नव-दुर्गाओं में सिद्धिदात्री अंतिम है। इनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
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शहर के नगला मंदिर समेत बिरुआबाड़ी मंदिर, हरप्रसाद मंदिर, गौरीशंकर मंदिर और कस्बों के देवी मंदिरों पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। उन्होंने मां के दरबार में हाजिरी लगाई और सुख समृद्धि की कामना की। सुबह से लेकर दोपहर तक मंदिरों में भक्तों की लाइन लगी रही। लोगों ने अपनी बारी आने का इंतजार किया।
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आज ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा : पं. गिरीश शर्मा के अनुसार, सर्वप्रथम कलश की पूजा और उसमें स्थापित सभी देवी-देवताओ का ध्यान करना चाहिए। रोली, कुमकुम, पुष्प, चुनरी आदि से मां की भक्ति भाव से पूजा करें। हलुआ, पूरी, खीर, चने, नारियल से माता को भोग लगाएं। इस दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन करना चाहिए। कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम नौ होनी ही चाहिए। नव-दुर्गाओं में सिद्धिदात्री अंतिम है। इनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

नगला मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। संवाद
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