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Budaun News: नौनिहालों में नेत्र विकार पैदा कर रहा मोबाइल फोन

Tue, 20 Feb 2024 01:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 Feb 2024 01:11 AM IST
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Mobile phone causing eye problems in children
जिला अस्पताल में आंखों की जांच करते नेत्र चिकित्सक। संवाद
बदायूं। आमतौर पर नेत्र रोग, नजर की कमजोरी और आंखों में लिक्विड की कमी की समस्या एक उम्र के बाद आती है, लेकिन हाथ में मोबाइल से यह समस्या नौनिहालों से लेकर किशोरों तक को शिकार बना रही है। जिला अस्पताल के नेत्ररोग विभाग में नेत्र विकार संबंधी मरीजों में पांच साल के बच्चों से लेकर 18 साल तक के किशोरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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मोबाइल का इस्तेमाल, ऑनलाइन क्लाश के अलावा छात्र-छात्राएं घंटों मोबाइल गेम भी खेलते हैं। इसका सीधा असर उनकी नेत्र क्षमता पर पड़ रहा हे। पहले सिर और आंखों में दर्द की समस्या आ रही है और फिर नजर कमजोर हो जा रही है। नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना ऐसे बच्चों और किशोरों की संख्या 12 से 15 तक पहुंच गई है। विशेषज्ञ डॉक्टर ज्यादा टीवी देखना और लैफ्टॉप का ज्यादा इस्तेमाल भी समस्या का कारण मानते हैं। किशोरों में आंखों से पानी आने की समस्या भी बढ़ रही है।
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18 साल तक होता है नेत्रों का विकास
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पियूष मोहन अग्रवाल ने बताया कि 18 साल तक नेत्रों का विस्तार होता है। इस उम्र से पहले मोबाइल और टीवी देखने के कारण आंखों की पुतलियों पर दबाव पड़ता है। इससे पुतलियों का विकास थम जाता है और धीरे-धीरे नजर कमजोर होने समेत अन्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं। उम्र के साथ चश्मे का नबंर भी बढ़ता जाता है। आंखों में भारीपन और सिर दर्द की समस्या बनी रहती है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों का लिक्विड सूखने लगता है इससे आंखों में सूखापन और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
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100 में 40 बच्चों की की नजर कमजोर
जिला अस्पताल के नेत्ररोग विभाग में आने वाले 100 बच्चों और किशोरों में 40 फीसदी में नजर कमजोर होने, लिक्विड सूखने जैसी समस्याएं पाई जा रही हैं। सिर दर्द की समस्या आम सी हो गई है। 12 से 15 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों की इसमें संख्या ज्यादा है।


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कोरोना काल के बाद बढ़ी किशोरों की संख्या
- कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान स्कूल कॉलेज बंद रहे थे। इस दौरान ऑनलाइन क्लाश की व्यवस्था शुरू हो गई। लगभग सभी स्कूलों ने ऑनलाइन क्लाश शुरू कर दीं। डॉ. पीयूष मोहन अग्रवाल के अनुसार कोरोना काल से पहले महीने में 100-120 किशोर और बच्चे ही नेत्ररोग विभाग आते थे, लेकिन अब यह संख्या 200-250 तक पहुंच गई है। सीएचसी और पीएचसी पर भी नेत्र विकार संबंधी बच्चों और किशोरों की संख्या बढ़ी है।

जिला अस्पताल में आंखों की जांच करते नेत्र चिकित्सक। संवाद

जिला अस्पताल में आंखों की जांच करते नेत्र चिकित्सक। संवाद

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