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विधायक की मौत ने उजागर किया एंबुलेंस सेवा का दबा सच
बदायूं, ब्यूरो
Updated Thu, 17 Mar 2016 09:05 PM IST
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एंबुलेंस
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घायल सपा विधायक हाजी मोहम्मद इरफान की मौत के बाद समाजवादी एंबुलेंस सेवा 108 और 102 का सच उजागर हो गया। इस सेवा के तहत यहां 65 एंबुलेंस हैं, लेकिन लोगों को बहुत कम उसकी सेवा नसीब होती है। कभी फोन नहीं उठता, कभी उठता तो वक्त पर नहीं पहुंचती। अस्पताल प्रशासन के संज्ञान में एंबुलेंस स्टाफ अपनी मनमर्जी से व्यवस्था संचालित करते हैं। खामियाजा पीड़ितों को भुगतना पड़ता है। विधायक मामले में शासन को भेजी गई एक रिपोर्ट में एंबुलेंस की कोई लापरवाही नहीं दिखाई गई है, लेकिन उन लोगों से पूछिये जिनके यहां यह सेवा न मिल पाने से जान चली गई।
केस-1
छह मार्च को अलापुर थाने के गांव ढका जंगल में कुएं में वीरेंद्र नाम का किसान दब गया था। कई घंटे की मेहनत के बाद वीरेंद्र को निकाला जा सका। कॉल किए जाने के बाद भी वक्त पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। गंभीर वीरेंद्र को खुद चिकित्सा अधीक्षक आरपी यादव अपनी कार से स्वास्थ्य केंद्र ले गए।
केस-2
एक मार्च को कादरचौक थाने के गांव बादुल्लागंज में अग्निकांड हुआ। गांव के संतोष के घर में रसोई गैस सिलेंडर में ब्लास्ट होने से पांच लोग झुलस गए। एंबुलेंस 108 को कॉल की गई, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। बाद में झुलसे लोगों को निजी वाहन से अस्पताल लाया गया।
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केस-तीन
हजरतपुर थाने के गांव असफपुर में 13 मार्च को मिट्टी की ढांग ढहने से चार लोग दब गए थे। गांव वालों ने काफी मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला। एंबुलेंस को कॉल की गई, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में एक किशोरी की मौत हो गई। तीन लोगों को परिवार वाले निजी वाहन से स्वास्थ्य केंद्र जाए थे।
बाक्स
ये होना चाहिए
- नियमानुसार एंबुलेंस में ऑक्सीजन, एअर कंडीशनर, फायर सिलेंडर, स्ट्रेचर, जीवन रक्षक दवाएं, मॉस्क आदि होने चाहिए।
- प्रत्येक एंबुलेंस को एक दिन में कम से कम चार केस करने होते हैं। इसके लिए प्रत्येक एंबुलेंस को हर महीने 1.40 लाख रुपये मिलते हैं।
- प्रत्येक एंबुलेंस को 15 हजार किलोमीटर के बाद सर्विस सेंटर भेजा जाता है। अगर कोई बढ़ी खराबी हो तो एंबुलेंस को ऑफ रोल किया जाएगा। इसके बाद एंबुलेंस की मरम्मत होगी।
- नियमानुसार कॉल मिलने के बाद शहरी क्षेत्र में 20 और देहात क्षेत्र में 30 मिनट में के भीतर एंबुलेंस उपलब्ध होना चाहिए।
बाक्स
यह है स्थिति
समाजवादी एंबुलेंस 108 के तहत 23 और जननी सुरक्षा योजना के नाम पर संचालित एंबुलेंस 102 के बेड़े में 42 एंबुलेंस हैं। 102 की तैनाती सीएचसी और पीएचसी पर की गई है। 108 एंबुलेंस थाने पर लगाई गई हैं। जिले में 108 एंबुलेंस के लिए रोज 200 से 250 और 102 के लिए 300 से 400 कॉल होती हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार सभी इनमें आधे से महज चालीस प्रतिशत काल ही रिसीव की जाती है। इसके अलावा यह भी गौरतलब है कि समाजवादी एंबुलेंस में जरूरी दवाओं और ऑक्सीजन का अभाव रहता है। जबकि रखरखाव और स्टाफ के नाम पर पर्याप्त खर्च हो रहा है। 102 और 108 एंबुलेंस सेवा की 10 एंबुलेंस ऑफ रोड हैं। इन सबका नतीजा यह होता है कि मजबूरी में पीड़ितों को निजी एंबुलेंस सेवा का सहारा लेना पड़ता है।
वर्जन-
विधायक के मामले में एंबुलेंस सेवा में कोई अनियमितता नहीं हुई। हमने अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को दे दी है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर था। एंबुलेंस स्टाफ को सहीं ढंग से काम ही नहीं करने दिया गया। विधायक का इलाज ट्रेनी फार्मासिस्ट ही करते रहे। फिर भी अगर कहीं पर सुधार की गुंजाइश है, तो उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
-संजय खोसला, चीफ ऑपरेटिंग ऑपरेटर एंबुलेंस 108, 102 उत्तर प्रदेश।
एंबुलेंस सेवाएं बेहतर ढंग से काम करें इसकी पूरी कोशिश की जा रही है। कभी-कभार सर्विस की वजह से कुछ एंबुलेंस ऑफ रोड होती हैं। सभी जिलों के सीएमओ को एंबुलेंस सेवा में जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जिलों से रिपोर्ट भी मांगी गई है।
-डॉ. अनीता दत्ता, एडी हेल्थ
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केस-1
छह मार्च को अलापुर थाने के गांव ढका जंगल में कुएं में वीरेंद्र नाम का किसान दब गया था। कई घंटे की मेहनत के बाद वीरेंद्र को निकाला जा सका। कॉल किए जाने के बाद भी वक्त पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। गंभीर वीरेंद्र को खुद चिकित्सा अधीक्षक आरपी यादव अपनी कार से स्वास्थ्य केंद्र ले गए।
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केस-2
एक मार्च को कादरचौक थाने के गांव बादुल्लागंज में अग्निकांड हुआ। गांव के संतोष के घर में रसोई गैस सिलेंडर में ब्लास्ट होने से पांच लोग झुलस गए। एंबुलेंस 108 को कॉल की गई, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। बाद में झुलसे लोगों को निजी वाहन से अस्पताल लाया गया।
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केस-तीन
हजरतपुर थाने के गांव असफपुर में 13 मार्च को मिट्टी की ढांग ढहने से चार लोग दब गए थे। गांव वालों ने काफी मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला। एंबुलेंस को कॉल की गई, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में एक किशोरी की मौत हो गई। तीन लोगों को परिवार वाले निजी वाहन से स्वास्थ्य केंद्र जाए थे।
बाक्स
ये होना चाहिए
- नियमानुसार एंबुलेंस में ऑक्सीजन, एअर कंडीशनर, फायर सिलेंडर, स्ट्रेचर, जीवन रक्षक दवाएं, मॉस्क आदि होने चाहिए।
- प्रत्येक एंबुलेंस को एक दिन में कम से कम चार केस करने होते हैं। इसके लिए प्रत्येक एंबुलेंस को हर महीने 1.40 लाख रुपये मिलते हैं।
- प्रत्येक एंबुलेंस को 15 हजार किलोमीटर के बाद सर्विस सेंटर भेजा जाता है। अगर कोई बढ़ी खराबी हो तो एंबुलेंस को ऑफ रोल किया जाएगा। इसके बाद एंबुलेंस की मरम्मत होगी।
- नियमानुसार कॉल मिलने के बाद शहरी क्षेत्र में 20 और देहात क्षेत्र में 30 मिनट में के भीतर एंबुलेंस उपलब्ध होना चाहिए।
बाक्स
यह है स्थिति
समाजवादी एंबुलेंस 108 के तहत 23 और जननी सुरक्षा योजना के नाम पर संचालित एंबुलेंस 102 के बेड़े में 42 एंबुलेंस हैं। 102 की तैनाती सीएचसी और पीएचसी पर की गई है। 108 एंबुलेंस थाने पर लगाई गई हैं। जिले में 108 एंबुलेंस के लिए रोज 200 से 250 और 102 के लिए 300 से 400 कॉल होती हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार सभी इनमें आधे से महज चालीस प्रतिशत काल ही रिसीव की जाती है। इसके अलावा यह भी गौरतलब है कि समाजवादी एंबुलेंस में जरूरी दवाओं और ऑक्सीजन का अभाव रहता है। जबकि रखरखाव और स्टाफ के नाम पर पर्याप्त खर्च हो रहा है। 102 और 108 एंबुलेंस सेवा की 10 एंबुलेंस ऑफ रोड हैं। इन सबका नतीजा यह होता है कि मजबूरी में पीड़ितों को निजी एंबुलेंस सेवा का सहारा लेना पड़ता है।
वर्जन-
विधायक के मामले में एंबुलेंस सेवा में कोई अनियमितता नहीं हुई। हमने अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को दे दी है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर था। एंबुलेंस स्टाफ को सहीं ढंग से काम ही नहीं करने दिया गया। विधायक का इलाज ट्रेनी फार्मासिस्ट ही करते रहे। फिर भी अगर कहीं पर सुधार की गुंजाइश है, तो उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
-संजय खोसला, चीफ ऑपरेटिंग ऑपरेटर एंबुलेंस 108, 102 उत्तर प्रदेश।
एंबुलेंस सेवाएं बेहतर ढंग से काम करें इसकी पूरी कोशिश की जा रही है। कभी-कभार सर्विस की वजह से कुछ एंबुलेंस ऑफ रोड होती हैं। सभी जिलों के सीएमओ को एंबुलेंस सेवा में जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जिलों से रिपोर्ट भी मांगी गई है।
-डॉ. अनीता दत्ता, एडी हेल्थ