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केंद्र पर बिचौलिये हावी, किसानों को दी जा रही लंबी तारीख
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बदायूं। जिले में धान खरीद में बिचौलिए हावी होते जा रहे हैं। इसका असर साफतौर पर देखने को मिल पर रहा है। धान केंद्रों पर जब किसान सीधे धान बेचने जा रहे हैं तो उन्होंने कई दिन बाद आने की तारीख दी जा रही है। वह औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर हो रहे हैं।
शासन के निर्देश पर एक अक्तूबर से जिले में 37 धान खरीद केंद्रों को संचालित किया गया है। अधिकांश धान क्रय केंद्रों पर दलालों और बिचौलियों ने सेटिंग कर ली है। क्रय केंद्र प्रभारियों से सांठगांठ के चलते किसानों का धान सीधे खरीदने से बचा जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए शुरू की गई टोकन व्यवस्था में भी दलालों ने सेंधमारी कर ली है। उन्होंने सेटिंग कर बीच-बीच में टोकन अपने संबंधित व परिचितों के नाम से ले लिया है। ऐसे में जो भी किसान आ रहे हैं उनको न तो जल्द नंबर मिल पाता है और न जल्दी तोल होती है। इस तरह खरीद का इंतजार बढ़ जाता है।
छोटे किसानों के पास फसल तैयार होने के बाद भंडारण की व्यवस्था न होने और आर्थिक जरूरतों के चलते वह बिचौलियों के जाल में फंसकर सस्ते में धान बेच रहे हैं। किसानों का धान अपनी पर्ची से केंद्र पर डलवा देते हैं। ककराला के मुस्तकीम, उसहैत के राम निवास ने बताया कि सेंटर पर गए। वहां पर 20 दिन आगे के दिन मिल रहे हैं। जबकि वहां एक ठेकेदार से बात की तो उन्होंने पांच दिन बाद ही खरीद की बात कही है। अब शहर की मंडी में पता करने के लिए आए है। यहां तो एक माह की वेटिंग चल रही है। इस संबंध में डिप्टी आरएमओ प्रकाश नारायण ने बताया कि सेंटर पर जाकर टोकन व्यवस्था की जांच की जाएगी। कमी मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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शासन के निर्देश पर एक अक्तूबर से जिले में 37 धान खरीद केंद्रों को संचालित किया गया है। अधिकांश धान क्रय केंद्रों पर दलालों और बिचौलियों ने सेटिंग कर ली है। क्रय केंद्र प्रभारियों से सांठगांठ के चलते किसानों का धान सीधे खरीदने से बचा जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए शुरू की गई टोकन व्यवस्था में भी दलालों ने सेंधमारी कर ली है। उन्होंने सेटिंग कर बीच-बीच में टोकन अपने संबंधित व परिचितों के नाम से ले लिया है। ऐसे में जो भी किसान आ रहे हैं उनको न तो जल्द नंबर मिल पाता है और न जल्दी तोल होती है। इस तरह खरीद का इंतजार बढ़ जाता है।
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छोटे किसानों के पास फसल तैयार होने के बाद भंडारण की व्यवस्था न होने और आर्थिक जरूरतों के चलते वह बिचौलियों के जाल में फंसकर सस्ते में धान बेच रहे हैं। किसानों का धान अपनी पर्ची से केंद्र पर डलवा देते हैं। ककराला के मुस्तकीम, उसहैत के राम निवास ने बताया कि सेंटर पर गए। वहां पर 20 दिन आगे के दिन मिल रहे हैं। जबकि वहां एक ठेकेदार से बात की तो उन्होंने पांच दिन बाद ही खरीद की बात कही है। अब शहर की मंडी में पता करने के लिए आए है। यहां तो एक माह की वेटिंग चल रही है। इस संबंध में डिप्टी आरएमओ प्रकाश नारायण ने बताया कि सेंटर पर जाकर टोकन व्यवस्था की जांच की जाएगी। कमी मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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