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Budaun News: बाढ़ ने तबाह की मेंथा की फसल, किसानों के चेहरे लटके
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अविनाश शाक्य
पहले से मंदी की मार झेल रहे किसानों के सपने धराशाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। इस बार की बाढ़ ने मेंथा की फसल करने वाले किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। उनके सपनों को छिन्न-भिन्न कर रख दिया है।
यहां बता दें कि जिले में लगातार मेंथा की फसल कम होती जा रही है। पहले जहां 20 से 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल होती थी, वह अब पांच हजार हेक्टेयर में ही सिमट कर रह गई है। उस पर भी इस बार की बाढ़ ने काफी फसल को तबाह कर रख दिया है।
बारिश शुरू होने से पहले किसानों ने मेंथा की कटाई शुरू कर दी थी। वे उसे ले जा पाते। उससे पहले ही बाढ़ आ जाने से उनके खेतों में पानी भर गया और फसल खराब हो गई। ऐसे में कुछ ही किसान अपनी फसल बचा पाए। फिलहाल अब भी बची-खुची फसल को किसान काट कर ले जा रहे हैं।
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किसानों ने बयां किया दर्द
छह बीघा जमीन पर मेंथा लगाया था। जब काटने के समय आया, तब बारिश शुरू हो गई। बाद में बाढ़ का पानी खेतों में भर गया, जिसकी वजह से अब फसल खेत में सड़ने लगी है। अब खेतों में पानी कम होने पर जो फसल रह है उसकी कटाई कराई जा रही है।
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-अविनाश शाक्य, दिसौलीगंज
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क्षेत्र के किसानों का मेंथा से मोह भंग होने लगा है, ऐसे में उनकी संख्या भी कम हुई है। वहीं इस बार की बारिश ने मेंथा की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। ऐसे में इस बार मेंथा की फसल से प्रति क्विंटल दो से तीन किलो तेल निकल पाएगा।
-प्रमोद यादव
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साल-दर साल उत्पादन की स्थिति
वर्ष क्षेत्रफल हेक्टयेर में अनुमानित तेल उत्पादन प्रति हेक्टेयर मेंथा ऑयल मूल्य प्रति किग्रा
-2018-19 26970 100-110 किग्रा 1125-1225
-2019-20 24500 100-110 किग्रा 950-1120
-2020-21 20570 75-90 किग्रा 950-990
-2021-22 5000 100-110 किग्रा 950-1000
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दिल्ली-मुंबई होकर विदेश भेजा जाता है मेंथा ऑयल
-जिले के कुछ बड़ी फर्मों के दफ्तर मुंबई, दिल्ली आदि शहरों में हैं और इनका जुड़ाव देश की दूसरी बड़ी निर्यात फर्मों से है। ऐसे में बदायूं, संभल व चंदौसी का मेंथा ऑयल दिल्ली, मुंबई तक जाता है। वहां से करीब 90 फीसदी ऑयल विदेश भेज दिया जाता है जबकि दस फीसदी ऑयल देश के उन राज्यों में जाता है जहां दवाएं बनाने की बड़ी कंपनियां हैं। यहां मेंथा ऑयल के उझानी, बिसौली, कादरचौक, उसावां सहित कई जगहों पर 150 से अधिक प्लांट हैं।
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बारिश शुरू होने से पहले कुछ किसानों ने मेंथा की फसल कटकर पेराई कराई थी। तब प्रति बीघा 11 से 12 किलो तेल निकला था, उम्मीद थी कि मेंथा करने वाले किसानों को कुछ राहत मिल सकेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिले में रुक-रुक कर करीब एक माह बारिश हुई। जिसकी वजह से फसल खराब हो गई। अब हालात ये हैं कि प्रति बीघा दो से तीन किलो तेल निकल रहा है।
-उमेश, प्लांट संचालक
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जिले में पहले की अपेक्षा मेंथा का रकबा कम हो गया है। इस बार बारिश की वजह से मेंथा की फसल को काफी नुकसान हुुआ है।
-पूजा, जिला उद्यान अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। इस बार की बाढ़ ने मेंथा की फसल करने वाले किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। उनके सपनों को छिन्न-भिन्न कर रख दिया है।
यहां बता दें कि जिले में लगातार मेंथा की फसल कम होती जा रही है। पहले जहां 20 से 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल होती थी, वह अब पांच हजार हेक्टेयर में ही सिमट कर रह गई है। उस पर भी इस बार की बाढ़ ने काफी फसल को तबाह कर रख दिया है।
बारिश शुरू होने से पहले किसानों ने मेंथा की कटाई शुरू कर दी थी। वे उसे ले जा पाते। उससे पहले ही बाढ़ आ जाने से उनके खेतों में पानी भर गया और फसल खराब हो गई। ऐसे में कुछ ही किसान अपनी फसल बचा पाए। फिलहाल अब भी बची-खुची फसल को किसान काट कर ले जा रहे हैं।
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किसानों ने बयां किया दर्द
छह बीघा जमीन पर मेंथा लगाया था। जब काटने के समय आया, तब बारिश शुरू हो गई। बाद में बाढ़ का पानी खेतों में भर गया, जिसकी वजह से अब फसल खेत में सड़ने लगी है। अब खेतों में पानी कम होने पर जो फसल रह है उसकी कटाई कराई जा रही है।
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-अविनाश शाक्य, दिसौलीगंज
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क्षेत्र के किसानों का मेंथा से मोह भंग होने लगा है, ऐसे में उनकी संख्या भी कम हुई है। वहीं इस बार की बारिश ने मेंथा की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। ऐसे में इस बार मेंथा की फसल से प्रति क्विंटल दो से तीन किलो तेल निकल पाएगा।
-प्रमोद यादव
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साल-दर साल उत्पादन की स्थिति
वर्ष क्षेत्रफल हेक्टयेर में अनुमानित तेल उत्पादन प्रति हेक्टेयर मेंथा ऑयल मूल्य प्रति किग्रा
-2018-19 26970 100-110 किग्रा 1125-1225
-2019-20 24500 100-110 किग्रा 950-1120
-2020-21 20570 75-90 किग्रा 950-990
-2021-22 5000 100-110 किग्रा 950-1000
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दिल्ली-मुंबई होकर विदेश भेजा जाता है मेंथा ऑयल
-जिले के कुछ बड़ी फर्मों के दफ्तर मुंबई, दिल्ली आदि शहरों में हैं और इनका जुड़ाव देश की दूसरी बड़ी निर्यात फर्मों से है। ऐसे में बदायूं, संभल व चंदौसी का मेंथा ऑयल दिल्ली, मुंबई तक जाता है। वहां से करीब 90 फीसदी ऑयल विदेश भेज दिया जाता है जबकि दस फीसदी ऑयल देश के उन राज्यों में जाता है जहां दवाएं बनाने की बड़ी कंपनियां हैं। यहां मेंथा ऑयल के उझानी, बिसौली, कादरचौक, उसावां सहित कई जगहों पर 150 से अधिक प्लांट हैं।
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बारिश शुरू होने से पहले कुछ किसानों ने मेंथा की फसल कटकर पेराई कराई थी। तब प्रति बीघा 11 से 12 किलो तेल निकला था, उम्मीद थी कि मेंथा करने वाले किसानों को कुछ राहत मिल सकेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिले में रुक-रुक कर करीब एक माह बारिश हुई। जिसकी वजह से फसल खराब हो गई। अब हालात ये हैं कि प्रति बीघा दो से तीन किलो तेल निकल रहा है।
-उमेश, प्लांट संचालक
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जिले में पहले की अपेक्षा मेंथा का रकबा कम हो गया है। इस बार बारिश की वजह से मेंथा की फसल को काफी नुकसान हुुआ है।
-पूजा, जिला उद्यान अधिकारी

अविनाश शाक्य

अविनाश शाक्य

अविनाश शाक्य