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मीना बाजार गुलजार, झूले उखड़े
ब्यूरो/बदायूं
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:42 PM IST
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पतित पावनी गंगा तट पर लगने वाला मेला ककोड़ा सिमटता जा रहा है। शुक्रवार को तंबुओं के साथ झूले भी उखड़ना शुरू हो गए, लेकिन महिलाओं की पहली पसंद मीना बाजार गुलजार रहा। उन्होंने सामान की खूब खरीदारी की। कल्पवास कर रहे श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। गंगा तट पर ग्रामीण ट्रैक्टर को धोने के साथ दौड़ाते भी रहे।
लोग लगातार अपने घरों को प्रस्थान करने लगे हैं, लेकिन आसपास क्षेत्र के ग्रामीण लोग अभी खरीदारी को पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है। शुक्रवार को गंगा स्नान के साथ श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पूजा-अर्चना की, उन्हें नमन वंदन किया। मीना बाजार में महिलाओं की खासा भीड़ दिखी। पाजेब, कुंडल, पर्स और सुहाग के सामान के अलावा बच्चों के खिलौनों की जमकर खरीदारी की। किसान भी पहुंचे। लाठियां और बैलों के साज सज्जा का सामान खरीदा। मेले में अभी मुख्य मार्ग में बिजली की व्यवस्था बनी हुई है। मुख्य द्वार हटा दिए गए हैं। सभी झूले बंद हो गए हैं।
गंगा पुत्र सम्मान से नवाजा
मेला ककोड़ा। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के तत्वावधान में निर्मल गंगा जन अभियान के अंतर्गत मेले में मां भागीरथी के तटों पर साफ-सफाई करने, श्रद्धालुओं को मां गंगा की पावनता और तटों की स्वच्छता बनाने के लिए जागरूक करने वाले गंगा सेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर 'गंगा पुत्र' सम्मान से विभूषित किया गया।
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निर्मल गंगा जन अभियान के जिला संयोजक सुखपाल शर्मा ने कहा कि मां गंगे की पावन धारा मानव में देवत्व का उदय कर हृदय को निर्मल बना देती है। कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। गंगा जल का आचमन और तटों की रज मस्तक पर धारण करने से प्रखरता मिलती है। व्याधियों का निवारण होता है। पृथ्वी और प्राणी जगत के अस्तित्व को बचाने के लिए गंगा तटों को तीर्थ बनाएं। संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मां गंगा की पावन अमृतधारा ने भारत भूमि को तपोवन और सिद्ध क्षेत्र बना दिया। ऐसी पवित्र देवभूमि पर जन्म लेने को लोग सदियों तप करते हैं। सह संयोक रघुनाथ सिंह ने विचार रखे। इस मौके पर रामनरेश यादव, चंद्रपाल मिश्र, भवेश शर्मा, रामनिवास शर्मा, मृत्युंजय शर्मा, हेमंत, सौम्या शर्मा, मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी बी ज्ञानेंद्र, पूर्व ट्रस्टी सुरेंद्रपाल सिंह सिसौदिया, जिला समंवयक डीपी सिंह, कोषाध्यक्ष रामचंद्र प्रजापति, सुरेंद्र नाथ शर्मा, चंद्रपाल मिश्र, कल्पना मिश्रा, ममता शर्मा, डॉ. वीरेंद्रपाल शर्मा ने मेले में गायत्री परिजनों के किए गए सराहनीय कार्य करने पर शुभकामनाएं दीं।
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लोग लगातार अपने घरों को प्रस्थान करने लगे हैं, लेकिन आसपास क्षेत्र के ग्रामीण लोग अभी खरीदारी को पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है। शुक्रवार को गंगा स्नान के साथ श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पूजा-अर्चना की, उन्हें नमन वंदन किया। मीना बाजार में महिलाओं की खासा भीड़ दिखी। पाजेब, कुंडल, पर्स और सुहाग के सामान के अलावा बच्चों के खिलौनों की जमकर खरीदारी की। किसान भी पहुंचे। लाठियां और बैलों के साज सज्जा का सामान खरीदा। मेले में अभी मुख्य मार्ग में बिजली की व्यवस्था बनी हुई है। मुख्य द्वार हटा दिए गए हैं। सभी झूले बंद हो गए हैं।
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गंगा पुत्र सम्मान से नवाजा
मेला ककोड़ा। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के तत्वावधान में निर्मल गंगा जन अभियान के अंतर्गत मेले में मां भागीरथी के तटों पर साफ-सफाई करने, श्रद्धालुओं को मां गंगा की पावनता और तटों की स्वच्छता बनाने के लिए जागरूक करने वाले गंगा सेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर 'गंगा पुत्र' सम्मान से विभूषित किया गया।
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निर्मल गंगा जन अभियान के जिला संयोजक सुखपाल शर्मा ने कहा कि मां गंगे की पावन धारा मानव में देवत्व का उदय कर हृदय को निर्मल बना देती है। कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। गंगा जल का आचमन और तटों की रज मस्तक पर धारण करने से प्रखरता मिलती है। व्याधियों का निवारण होता है। पृथ्वी और प्राणी जगत के अस्तित्व को बचाने के लिए गंगा तटों को तीर्थ बनाएं। संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मां गंगा की पावन अमृतधारा ने भारत भूमि को तपोवन और सिद्ध क्षेत्र बना दिया। ऐसी पवित्र देवभूमि पर जन्म लेने को लोग सदियों तप करते हैं। सह संयोक रघुनाथ सिंह ने विचार रखे। इस मौके पर रामनरेश यादव, चंद्रपाल मिश्र, भवेश शर्मा, रामनिवास शर्मा, मृत्युंजय शर्मा, हेमंत, सौम्या शर्मा, मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी बी ज्ञानेंद्र, पूर्व ट्रस्टी सुरेंद्रपाल सिंह सिसौदिया, जिला समंवयक डीपी सिंह, कोषाध्यक्ष रामचंद्र प्रजापति, सुरेंद्र नाथ शर्मा, चंद्रपाल मिश्र, कल्पना मिश्रा, ममता शर्मा, डॉ. वीरेंद्रपाल शर्मा ने मेले में गायत्री परिजनों के किए गए सराहनीय कार्य करने पर शुभकामनाएं दीं।