फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   medical Student

खास करने का जज्बा : मरीजों के प्रति संवेदनशील है चिकित्सकों की नई पौध

Thu, 30 Sep 2021 01:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 30 Sep 2021 01:54 AM IST
विज्ञापन
medical Student
मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करते विद्यार्थी। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय पढ़ाई कर रहीं छात्राओं में लगन के साथ कुछ बेहतर करने का जुनून है। वे नई सोच और नई तकनीक के साथ आगे बढ़ रहीं हैं। कुछ साल बाद पढ़ाई पूरी कर वे नई भूमिका में दिखेंगी। एमबीबीएस प्रथम व द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहीं प्रशिक्षु चिकित्सकों से बात की तो इन्होंने बताया कि कोविड और महामारी से जुड़े नए अध्याय भी उनके पाठ्यक्रम का हिस्सा बने हैं। कुछ ने देश में मौजूदा चिकित्सा पद्धिति तो कुछ ने ग्रामीण इलाकों में बीमारियों को लेकर जागरूकता के अभाव पर चर्चा की। कहा कि वह डॉक्टर बनने के बाद गरीब तबके के मरीजों पर ध्यान केंद्रित करेंगी और उन्हें बेहतर उपचार देने का काम करेंगी।
विज्ञापन

-
दिल्ली की ईशा ने लिया गरीबों की सेवा का संकल्प
दिल्ली निवासी ईशा शिरोमणि ने बताया कि वह बड़ी बहन से प्रेरणा लेकर चिकित्सा क्षेत्र में आई हैं। दीदी थर्ड ईयर की तो वह सेकेंड ईयर की स्टूडेंट हैं। बताया कि भविष्य में मौका मिला तो स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना पसंद करेंगी। उन्हें पता है कि देहात क्षेत्र में महिलाओं व सामान्य रोगियों के इलाज में कई तरह की समस्याएं आती हैं। वह ऐसे ही क्षेत्रों में काम करके गरीबों की सेवा करना पसंद करेंगी। सरकारी सेवा में जाने का प्रयास करेंगी ताकि अलग-अलग क्षेत्र में रोगों की विविधता को समझकर उन्हें दूर कर सकें।
विज्ञापन

-
कुपोषित बच्चों को सेहतमंद करेंगी दिव्यांशी
-बरेली के कालीबाड़ी निवासी दिव्यांशी अग्रवाल का कहना था कि उनके मामा डॉ. नीरज अग्रवाल खटीमा में बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उन्हीं की प्रेरणा से वह डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई कर रही हैं। दिव्यांशी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों का कुपोषण बड़ी समस्या है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सक्रिय होने से ऐसे बच्चों को चिह्नित कर इलाज कराने में मदद मिली है। वह बाल रोग विशेषज्ञ बनीं तो बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने का काम करेंगी। प्रयास करेंगी कि कस्बों व देहात क्षेत्र में भी काम कर सकें। गरीब मरीजों का खास ख्याल रखेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
आकांक्षा की सोच, गांवों में बढ़े सहूलियत तो रुकेंगे डॉक्टर
चौपुला (बरेली) निवासी आकांक्षा मौर्य का कहना था कि उनका परिवार शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है। उन्हें इस क्षेत्र में आना था तो तैयारी करके आ गईं। आकांक्षा ने स्वीकार किया कि कई सरकारी डॉक्टर गांवों के अस्पतालों में काम करना पसंद नहीं करते। इससे कई अस्पताल खंडहर तक हो जाते हैं। कहा कि इसमें ज्यादा कमी डॉक्टरों की बजाय सिस्टम की है। गांवों में आवास, बिजली, पानी व बच्चों की शिक्षा का प्रबंध किया जाए तो डॉक्टर गांवों में जरूर रुकेंगे।
-
कैंसर से करीबियों की मौत ने दिया मरियम को झटका
- मुरादाबाद के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पाशा लतीफ की बेटी मरियम की मां भी डॉक्टर हैं। डॉक्टर दंपती की बेटी मरियम के मुताबिक उनका सपना तो शुरू से ही डॉक्टर बनने का रहा इसलिए कठोर परिश्रम करके नीट क्वालिफाई किया। मरियम कहती हैं कि मौका मिला तो वह कैंसर रोग विशेषज्ञ बनना चाहेंगी। दरअसल उनके कई नजदीकी लोगों की कैंसर से हुई मौत ने उन्हें झकझोड़ा है। उन लोगों के पास धन भी था पर अंतिम चरण में आने पर कैंसर का पता चला तो बचाया नहीं जा सका। कहा कि शुरुआती दौर में ही इसका पता चल सके इसलिए सरकार को निगरानी तंत्र व जांच का दायरा बढ़ाना चाहिए।
-
बस चले तो दिल की डॉक्टर बनें जूबिया
मुरादाबाद निवासी जूबिया मलिक के पिता फार्मेसी कारोबार से जुड़े हैं। इस नाते जूबिया को दवा व डॉक्टरी पेशे की शुरुआती समझ है। उन्होंने बताया कि कार्डियोलॉजिस्ट की देश में बड़ी कमी है। एक ओर जहां खानपान, अनियमित दिनचर्या और जरूरत से ज्यादा काम का तनाव लोगों को दिल का रोगी बना रहा है वहीं हृदय रोग विशेषज्ञों की कमी लोगों की समस्या को बढ़ा रही है। कहा कि प्रयास करेंगी कि पीजी में कार्डियोलॉजी स्ट्रीम मिल जाए। वह हृदय रोग विशेषज्ञ बनीं तो गरीब तबके से जुड़े मरीजों की समस्या दूर करने पर जोर देंगी।
-
विदुषी बोलीं- सुरक्षित प्रसव देहात में बड़ी समस्या
अलीगढ़ निवासी विदुषी गुप्ता के मुताबिक पिता प्राइवेट जॉब में और मां टीचर हैं। उनका सपना डॉक्टर बनने का था तो परिवार ने पढ़ाने और तैयारी कराने में कसर नहीं छोड़ी। बताया कि कुशल स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना उनका सपना है। देहात क्षेत्र में संस्थागत प्रसव न होने से अक्सर महिलाओं व बच्चों की मौत हो जाती है। गरीब परिवारों की महिलाओं को खून की कमी से लेकर गर्भावस्था की दूसरी दिक्कतों के बारे में जानकारी नहीं होती जो आगे चलकर मुसीबत खड़ी करती है। बच्चों व माताओं का कुपोषण भी इसी से जुड़ा है। वह इसी दिशा में काम करके हालात सुधारने का काम करेंगी।

-
प्राचार्य बोले- ज्यादा काबिल होंगे नई पीढ़ी के डॉक्टर
राजकीय मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्र छात्राएं काफी होशियार हैं। वह परंपरागत पढ़ाई के साथ नए विषयों व जानकारियों को भी आत्मसात कर रहे हैं। ओपीडी व भर्ती मरीजों की चिकित्सा में लगे वरिष्ठ चिकित्सकों से भी वह काफी चीजें सीखते और सवाल पूछकर जिज्ञासा का समाधान करते हैं। लग रहा है कि जब वह पूरी तरह डॉक्टर बनकर फील्ड में आएंगे तो बेहतर काम करेंगे और जनता के लिए ज्यादा उपयोगी साबित होंगे।
- डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed