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...ताकि आईएमसी से मिल सके हरी झंडी
अमर उजाला, बदायूं
Updated Mon, 12 Oct 2015 12:02 AM IST
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दोपहर करीब 11.30 बजे उझानी मार्ग स्थित निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज पहुंचे प्रमुख सचिव स्वास्थ्य/शिक्षा पांडे ने ओपीडी, आपात कालीन सेवा विभागों को एक-एककर देखा। मरीजों के तीमारदारों के बैठने, चिकित्सकों के कक्ष और अन्य संसाधनों के बारे में नोडल अधिकारी आगरा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. नीरज यादव और निर्माणदायी संस्था प्रोजेक्ट मैनेजर एसबी रस्तोगी से पूछताछ करते रहे। दोनों अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज में आए चिकित्सकों, मरीजों और तीमारदारों के लिए लाए गए फर्नीचर के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज में संविदा पर रखे गए कुछ चिकित्सक भी उपस्थित रहे। प्रमुख सचिव ने उनसे भी बात की। बाद में बताया कि जल्दी ही आईएमसी की टीम प्रदेश के नए मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण को पहुंचेगी। इससे पूर्व उनके नियमों के अनुकूल तैयारियां पूरी करनी है। डॉ. नीरज यादव ने बताया कि ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं पहले ही शुरू कर दी जाएंगी। राजकीय निर्माण निगम के सहायक अभियंता फकीरचंद ने अबतक पूरी हो चुकी तैयारियों के बारे में जानकारियां दीं।
इससे पूर्व उन्होंने मेडिकल कॉलेज से जुड़े अधिकारियों से गोपनीय वार्ता को बैठक की। इस मौके पर डीएम शंभू नाथ भी मौजूद रहे। बाद में डीएम चुनावी व्यस्तता के कारण चले गए। इस अवसर पर उनके साथ अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. जीके अनेजा भी थे।
निर्माणदायी संस्था ने पूरे किए इंतजाम
मेडिकल कॉलेज की निर्माणदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने ओपीडी और इमरजेंसी के लिए भवन की व्यवस्था पूरी कर ली है। इसके लिए डॉक्टरों ने नेम प्लेटों से लेकर फर्नीचर आदि की भी पूरी व्यवस्था कर दी है।
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स्थानीय चिकित्सकों को देख डगमगाया विश्वास
प्रमुख सचिव के दौरे के दौरान शहर के एक चिकित्सक, जो जिला अस्पताल से रिटायर्ड हैं और शहर में अपना निजी अस्पताल चला रहे हैं। प्रमुख सचिव से मिले और अपनी सेवाएं देने का आग्रह करते रहे। बायोडाटा लेकर नहीं गए। उनसे कह दिया गया कि उनकी सेवाएं ले ली जाएंगी। इस पर कुछ लोग पीछे से टिप्पणी भी कर रहे थे कि जिन्हें अपनी प्रेक्टिस और निजी अस्पताल से फुर्सत नहीं वह क्या सेवाएं कर पाएंगे। इसके साथ ही दो-तीन शहर के ही दो-तीन चिकित्सक और प्रमुख सचिव के चक्कर लगाते देखे गए। सभी को प्रमुख सचिव ने सेवाओं का मौका देने का आश्वासन दिया। इसे लेकर लोगों में काफी तीखी प्रतिक्रिया थी कि अगर ऐसे ही चिकित्सकों की सेवाओं से मेडिकल कॉलेज चलेगा तो मरीजों और उनके तीमारदारों का भरोसा कैसे टिक सकेगा। दरअसल, यहां के लोगों ने मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा की बड़ी कल्पना की है।
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इससे पूर्व उन्होंने मेडिकल कॉलेज से जुड़े अधिकारियों से गोपनीय वार्ता को बैठक की। इस मौके पर डीएम शंभू नाथ भी मौजूद रहे। बाद में डीएम चुनावी व्यस्तता के कारण चले गए। इस अवसर पर उनके साथ अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. जीके अनेजा भी थे।
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निर्माणदायी संस्था ने पूरे किए इंतजाम
मेडिकल कॉलेज की निर्माणदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने ओपीडी और इमरजेंसी के लिए भवन की व्यवस्था पूरी कर ली है। इसके लिए डॉक्टरों ने नेम प्लेटों से लेकर फर्नीचर आदि की भी पूरी व्यवस्था कर दी है।
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स्थानीय चिकित्सकों को देख डगमगाया विश्वास
प्रमुख सचिव के दौरे के दौरान शहर के एक चिकित्सक, जो जिला अस्पताल से रिटायर्ड हैं और शहर में अपना निजी अस्पताल चला रहे हैं। प्रमुख सचिव से मिले और अपनी सेवाएं देने का आग्रह करते रहे। बायोडाटा लेकर नहीं गए। उनसे कह दिया गया कि उनकी सेवाएं ले ली जाएंगी। इस पर कुछ लोग पीछे से टिप्पणी भी कर रहे थे कि जिन्हें अपनी प्रेक्टिस और निजी अस्पताल से फुर्सत नहीं वह क्या सेवाएं कर पाएंगे। इसके साथ ही दो-तीन शहर के ही दो-तीन चिकित्सक और प्रमुख सचिव के चक्कर लगाते देखे गए। सभी को प्रमुख सचिव ने सेवाओं का मौका देने का आश्वासन दिया। इसे लेकर लोगों में काफी तीखी प्रतिक्रिया थी कि अगर ऐसे ही चिकित्सकों की सेवाओं से मेडिकल कॉलेज चलेगा तो मरीजों और उनके तीमारदारों का भरोसा कैसे टिक सकेगा। दरअसल, यहां के लोगों ने मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा की बड़ी कल्पना की है।