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Budaun News: चरागाह के लिए तलाशी जाएगी जमीने, बोया जाएगा चारा
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बदायूं। गांवों में निराश्रित गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन गोवंशों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन की ओर से उन्हें पकड़कर गो आश्रय स्थलों में रखा जा रहा है। वहीं, इन पशुओं को समय पर पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए शासन ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब चरागाह के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि वहां हरे चारे का उत्पादन किया जा सके।
शासन के निर्देश के बाद संबंधित विभाग सक्रिय हो गया है। अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों में ऐसी खाली या अनुपयोगी जमीनों को चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया है। जहां चरागाह विकसित किया जा सके। इसके लिए राजस्व विभाग को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजस्व विभाग के कर्मचारी गांव-गांव जाकर जमीनों का सर्वे कर रहे हैं और रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जिन स्थानों पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध होगी। वहां हरे चारे की खेती कराई जाएगी। इससे गो आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंशों को नियमित रूप से हरा चारा मिल सकेगा। अभी कई गो आश्रय स्थलों पर चारे की कमी की शिकायतें सामने आती रहती हैं। जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
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सीवीओ समदर्शी सरोज ने कहा कि चरागाह विकसित होने से गोवंशों के पालन-पोषण में आसानी होगी और चारे की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पशुपालकों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
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शासन के निर्देश के बाद संबंधित विभाग सक्रिय हो गया है। अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों में ऐसी खाली या अनुपयोगी जमीनों को चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया है। जहां चरागाह विकसित किया जा सके। इसके लिए राजस्व विभाग को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजस्व विभाग के कर्मचारी गांव-गांव जाकर जमीनों का सर्वे कर रहे हैं और रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
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अधिकारियों का कहना है कि जिन स्थानों पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध होगी। वहां हरे चारे की खेती कराई जाएगी। इससे गो आश्रय स्थलों में रखे गए गोवंशों को नियमित रूप से हरा चारा मिल सकेगा। अभी कई गो आश्रय स्थलों पर चारे की कमी की शिकायतें सामने आती रहती हैं। जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
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सीवीओ समदर्शी सरोज ने कहा कि चरागाह विकसित होने से गोवंशों के पालन-पोषण में आसानी होगी और चारे की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पशुपालकों को भी लाभ मिलने की संभावना है।