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Budaun News: भूमि विवाद गहराया, अधिवक्ताओं की सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी
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एसएसपी से मिलने पहुंचे अधिवक्ता। स्रोत- अधिवक्ता
- फोटो : Samvad
बदायूं। सिविल बार एसोसिएशन और जिला प्रशासन के बीच 108 वर्ष पुरानी भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। अधिवक्ताओं ने बुधवार को एसएसपी को पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि कोतवाली पुलिस बिना किसी लिखित आदेश के उनकी भूमि पर कब्जा कराने का प्रयास कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह हस्तक्षेप तुरंत नहीं रोका गया, तो वे सामूहिक आत्मदाह को मजबूर होंगे।
एसोसिएशन के अनुसार, यह भूमि जिला न्यायालय के सामने और जज हाउस के समीप स्थित है, जहां अधिवक्ता पिछले 108 वर्षों से विधि व्यवसाय कर रहे हैं। पत्र में आरोप है कि कुछ न्यायिक अधिकारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पुराने आदेशों का हवाला देकर इस खाली भूमि पर परिवार न्यायालय का निर्माण कराना चाहते हैं।
अधिवक्ताओं का दावा है कि जनपद न्यायालय के निर्देश पर थाना कोतवाली पुलिस बिना किसी वैध लिखित आदेश के मौके पर पहुंचकर बल प्रदर्शन कर रही है। पुलिस की इस सक्रियता से वकीलों के कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। इससे अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक टकराव की स्थिति बनी हुई है। अधिवक्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि पुलिस की सहायता से उनकी पुरानी इमारत को गिराया जा सकता है। यह सीधे तौर पर उनकी जीविका पर प्रहार होगा।
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अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में भी इस तरह के मौखिक आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। एसोसिएशन ने मांग की है कि बिना किसी ठोस कानूनी आदेश के पुलिस को बार एसोसिएशन की भूमि पर न भेजा जाए। पत्र के अंत में कड़ी चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं रोका और कोई अप्रिय घटना हुई, तो समस्त अधिवक्ता सामूहिक आत्मदाह करेंगे। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों की होगी।
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एसोसिएशन के अनुसार, यह भूमि जिला न्यायालय के सामने और जज हाउस के समीप स्थित है, जहां अधिवक्ता पिछले 108 वर्षों से विधि व्यवसाय कर रहे हैं। पत्र में आरोप है कि कुछ न्यायिक अधिकारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पुराने आदेशों का हवाला देकर इस खाली भूमि पर परिवार न्यायालय का निर्माण कराना चाहते हैं।
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अधिवक्ताओं का दावा है कि जनपद न्यायालय के निर्देश पर थाना कोतवाली पुलिस बिना किसी वैध लिखित आदेश के मौके पर पहुंचकर बल प्रदर्शन कर रही है। पुलिस की इस सक्रियता से वकीलों के कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। इससे अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक टकराव की स्थिति बनी हुई है। अधिवक्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि पुलिस की सहायता से उनकी पुरानी इमारत को गिराया जा सकता है। यह सीधे तौर पर उनकी जीविका पर प्रहार होगा।
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अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में भी इस तरह के मौखिक आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। एसोसिएशन ने मांग की है कि बिना किसी ठोस कानूनी आदेश के पुलिस को बार एसोसिएशन की भूमि पर न भेजा जाए। पत्र के अंत में कड़ी चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं रोका और कोई अप्रिय घटना हुई, तो समस्त अधिवक्ता सामूहिक आत्मदाह करेंगे। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों की होगी।