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कछला तट पर ही होगा ‘नमामि गंगे’
ब्यूरो बदायूं।
Updated Fri, 25 Mar 2016 11:57 PM IST
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गूल से पहुंचाया जल
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा की धारा मोड़कर कछला घाट के करीब लाने को हरी झंडी
शासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड की कवायद
गंगा को एक किमी पश्चिम से मोड़कर कछला घाट पर लाएंगे
कछला-कासगंज दोनों के घाटों पर कराया जाएगा सुंदरीकरण
गंगा की कछला घाट से बढ़ रही दूरी फिर कम होगी और श्रद्धालु कछला तट पर भी ‘नमामि गंगे’ करेंगे। सिंचाई विभाग का बाढ़ खंड कछला और कासगंज, दोनों ओर घाटों के सुंदरीकरण की परियोजना तैयार कर रहा है। नमामि गंगे परियोजना के तहत बनाए जा रहे प्रस्ताव में गंगा की धारा को एक किमी पश्चिमी मोड़ कर कछला तट तक लाया जाएगा। बाढ़ खंड के एसई ने भी अपने दौरे के दौरान इस योजना को हरी झंडी दे दी है। अब कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की तैयारी है।
बाढ़ खंड के एक्सईएन अरविंद वर्मा, अवर अभियंता दिलशाद हुसैन को नमामि गंगे योजना के तहत प्रोजेक्ट की कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। तीन दिन पूर्व एसई और एक्सईएन ने गंगा कछला गंगा घाट का दौरा किया और फिर डीएम शंभूनाथ ने बाढ़ खंड के अधिकारियों के साथ योजना पर विचार विमर्श किया। कछला गंगा घाट से गंगा का रुख दक्षिण की ओर चले जाने के कारण पहले कछला के बजाए कासगंज जिले में पड़ने वाले दक्षिणी तट पर घाट और सुंदरीकरण का काम कराया जाना तय किया गया था। जबकि कछला गंगा घाट पर स्नानपर्वों पर बदायूं की तरफ अधिक भीड़ रहती है। मंथन के बाद तय हुआ कि एक किमी पश्चिम से गंगा की धारा का रुख मोड़ा जाए और कछला तट के करीब गंगा को लाकर कार्ययोजना बनाई जाए। बाढ़ खंड के अधिकारियों की भी इसे अनुमति मिल गई है। अब कछला गंगा घाट का कायापलट होना तय है। यही नहीं कासगंज जिले की ओर गंगा के तट का भी सुंदरीकरण इस परियोजना में जोड़ा जाएगा। दोनों ओर सुंदर घाट होंगे तो कछला गंगा घाट अपनी पौराणिक विशिष्टता के साथ आकर्षित करने वाला होगा।
घाट के सुंदरीकरण को परियोजना में शामिल कार्य
घाट पर गंगा किनारे सीढ़ियां बनेंगी
आकर्षक चबूतरे, फुलवारी और पेड़ भी लगेंगे
आकर्षक लाइटें लगेंगी
पीने का पानी और शौचालय आदि का निर्माण
महिला श्रद्धालुओं को वस्त्र बदलने के लिए कक्षों का निर्माण
घाट तक पहुंचने को सुंदर संपर्क मार्ग
फव्वारे, झरने आदि बनाए जाएंगे
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा की धारा कछला घाट तक लाने को कार्ययोजना में शामिल करने का सुझाव मिला था। इस सुझाव ने कार्ययोजना को नई राह दिखाई है। गंगा की धारा को मोड़ने के लिए इंजीनियरों से मौका मुआयना कराया गया है।
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- अरविंद वर्मा, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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शासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड की कवायद
गंगा को एक किमी पश्चिम से मोड़कर कछला घाट पर लाएंगे
कछला-कासगंज दोनों के घाटों पर कराया जाएगा सुंदरीकरण
गंगा की कछला घाट से बढ़ रही दूरी फिर कम होगी और श्रद्धालु कछला तट पर भी ‘नमामि गंगे’ करेंगे। सिंचाई विभाग का बाढ़ खंड कछला और कासगंज, दोनों ओर घाटों के सुंदरीकरण की परियोजना तैयार कर रहा है। नमामि गंगे परियोजना के तहत बनाए जा रहे प्रस्ताव में गंगा की धारा को एक किमी पश्चिमी मोड़ कर कछला तट तक लाया जाएगा। बाढ़ खंड के एसई ने भी अपने दौरे के दौरान इस योजना को हरी झंडी दे दी है। अब कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की तैयारी है।
बाढ़ खंड के एक्सईएन अरविंद वर्मा, अवर अभियंता दिलशाद हुसैन को नमामि गंगे योजना के तहत प्रोजेक्ट की कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। तीन दिन पूर्व एसई और एक्सईएन ने गंगा कछला गंगा घाट का दौरा किया और फिर डीएम शंभूनाथ ने बाढ़ खंड के अधिकारियों के साथ योजना पर विचार विमर्श किया। कछला गंगा घाट से गंगा का रुख दक्षिण की ओर चले जाने के कारण पहले कछला के बजाए कासगंज जिले में पड़ने वाले दक्षिणी तट पर घाट और सुंदरीकरण का काम कराया जाना तय किया गया था। जबकि कछला गंगा घाट पर स्नानपर्वों पर बदायूं की तरफ अधिक भीड़ रहती है। मंथन के बाद तय हुआ कि एक किमी पश्चिम से गंगा की धारा का रुख मोड़ा जाए और कछला तट के करीब गंगा को लाकर कार्ययोजना बनाई जाए। बाढ़ खंड के अधिकारियों की भी इसे अनुमति मिल गई है। अब कछला गंगा घाट का कायापलट होना तय है। यही नहीं कासगंज जिले की ओर गंगा के तट का भी सुंदरीकरण इस परियोजना में जोड़ा जाएगा। दोनों ओर सुंदर घाट होंगे तो कछला गंगा घाट अपनी पौराणिक विशिष्टता के साथ आकर्षित करने वाला होगा।
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घाट के सुंदरीकरण को परियोजना में शामिल कार्य
घाट पर गंगा किनारे सीढ़ियां बनेंगी
आकर्षक चबूतरे, फुलवारी और पेड़ भी लगेंगे
आकर्षक लाइटें लगेंगी
पीने का पानी और शौचालय आदि का निर्माण
महिला श्रद्धालुओं को वस्त्र बदलने के लिए कक्षों का निर्माण
घाट तक पहुंचने को सुंदर संपर्क मार्ग
फव्वारे, झरने आदि बनाए जाएंगे
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा की धारा कछला घाट तक लाने को कार्ययोजना में शामिल करने का सुझाव मिला था। इस सुझाव ने कार्ययोजना को नई राह दिखाई है। गंगा की धारा को मोड़ने के लिए इंजीनियरों से मौका मुआयना कराया गया है।
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- अरविंद वर्मा, एक्सईएन, बाढ़ खंड