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‘...इतना प्यार लुटाकर जाना सबसे बस की बात नहीं’
बदायूं।
Updated Sat, 03 Jan 2015 08:20 PM IST
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महान साहित्यकार स्वर्गीय डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी की स्मृति में स्मृति वंदन संस्था की ओर से काव्य संध्या का आयोजन पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार संघ भवन हॉल में किया गया। मुख्य अतिथि रहे मुंबई से पधारे डॉ. बलराज मिश्र एवं वरिष्ठ साहित्यकार महेश मित्र ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कवि अभिषेक अनंत की सरस्वती वंदना से काव्य पाठ प्रारंभ हुआ।
मुंबई से पधारीं डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी की पुत्री डॉ. पूर्ति मिश्रा ने पढ़ा-
शारदा विराजती हो हर शब्द में है जहां,
ऐसे वाणी पुत्र को तो कोटि-कोटि नमन है।
डॉ. अरविंद धवल ने कहा-
मानव में देवत्व जगाना सबसे बस की बात नहीं,
पीड़ाओं के मठ बनवाना सबके बस की बात नहीं,
जाने को तो इस दुनिया से हम सबको भी जाना है,
इतना प्यार लुटाकर जाना सबसे बस की बात नहीं।
डॉ. निशि अवस्थी ने कहा-
इस युग के कलाकार थे ब्रजेंद्र अवस्थी,
ऋषित्व के विचार थे ब्रजेंद्र अवस्थी।
कुमार आशीष ने पढ़ा-
हर तरफ जीत हो सिर्फ इंसाफ की,
जुल्म की हार हो इस नए साल में।
भारत शर्मा राज ने पढ़ा-
घाव की खाई अश्रु का दलदल बना रहा हूं,
जीवन के चित्र में मैं जंगल बना रहा हूं,
चढ़ती हुई धूप के मैं रेशे निकालकर
ठिठुरे हुए बदन को मैं कंबल बना रहा हूं।
डॉ. तृप्ति मिश्रा ने कहा-
सदा छवि आपकी पापा हमारे दिल में समाई है,
हमें तो आज भी वो रूबरू देती दिखाई है।
डॉ. कमला माहेश्वरी ने पढ़ा-
नीति नियताओं ने कर दी, कैसी खींचातानी,
आओ चिंतन करें, सभी हम, मिल अब हिंदुस्तानी।
भूराज सिंह रॉजलायर ने कहा
अस्तिस्व न रहे मेदिनी का दिनकर की हस्ती नहीं रहे,
यह भी संभव है सागर में केवट या कश्ती नहीं रहे,
वह काल चक्र के बाहर हैं, वह अमर हो गए हैं सुन लो,
मेरे सम्मुख मत कहा करो ब्रजेंद्र अवस्थी नहीं रहे।
मनोज कुमार मून ने पढ़ा-
हमारी हद बस मकान तक है,
सफर मगर आसमान तक है।
मुजाहिद नाज बदायूंनी ने कहा-
बदायूं नगर मेरा स्वर्ग के समान है,
वह विरूआबाड़ी रोड देखो मंदिरों की शान है,
ये है जमीन फानी की, ये है शकील जोश की,
अवस्थी का नगर है ये, यहीं मुकीम हैं जकी।
इसके अलावा विनोद सूर्यवंशी, विष्णुगोपाल अनुरागी, भानु प्रकाश भानु, प्यारे सिंह शिशु, मनीष प्रेम, अभिषेक तन्हा, अनंग पाल, जयवीर चंद्रवंशी ने भी काव्य पाठ किया। इससे पूर्व डॉ. मिश्र ने कवियों को भी सम्मानित किया। कार्यक्र में केशव मिश्रा, विवेक, अमित चौधरी, सोमेंद्र यादव, अनिल कुमार, नरवीर, धर्मेंद्र कुमार, बलवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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मुंबई से पधारीं डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी की पुत्री डॉ. पूर्ति मिश्रा ने पढ़ा-
शारदा विराजती हो हर शब्द में है जहां,
ऐसे वाणी पुत्र को तो कोटि-कोटि नमन है।
डॉ. अरविंद धवल ने कहा-
मानव में देवत्व जगाना सबसे बस की बात नहीं,
पीड़ाओं के मठ बनवाना सबके बस की बात नहीं,
जाने को तो इस दुनिया से हम सबको भी जाना है,
इतना प्यार लुटाकर जाना सबसे बस की बात नहीं।
डॉ. निशि अवस्थी ने कहा-
इस युग के कलाकार थे ब्रजेंद्र अवस्थी,
ऋषित्व के विचार थे ब्रजेंद्र अवस्थी।
कुमार आशीष ने पढ़ा-
हर तरफ जीत हो सिर्फ इंसाफ की,
जुल्म की हार हो इस नए साल में।
भारत शर्मा राज ने पढ़ा-
घाव की खाई अश्रु का दलदल बना रहा हूं,
जीवन के चित्र में मैं जंगल बना रहा हूं,
चढ़ती हुई धूप के मैं रेशे निकालकर
ठिठुरे हुए बदन को मैं कंबल बना रहा हूं।
डॉ. तृप्ति मिश्रा ने कहा-
सदा छवि आपकी पापा हमारे दिल में समाई है,
हमें तो आज भी वो रूबरू देती दिखाई है।
डॉ. कमला माहेश्वरी ने पढ़ा-
नीति नियताओं ने कर दी, कैसी खींचातानी,
आओ चिंतन करें, सभी हम, मिल अब हिंदुस्तानी।
भूराज सिंह रॉजलायर ने कहा
अस्तिस्व न रहे मेदिनी का दिनकर की हस्ती नहीं रहे,
यह भी संभव है सागर में केवट या कश्ती नहीं रहे,
वह काल चक्र के बाहर हैं, वह अमर हो गए हैं सुन लो,
मेरे सम्मुख मत कहा करो ब्रजेंद्र अवस्थी नहीं रहे।
मनोज कुमार मून ने पढ़ा-
हमारी हद बस मकान तक है,
सफर मगर आसमान तक है।
मुजाहिद नाज बदायूंनी ने कहा-
बदायूं नगर मेरा स्वर्ग के समान है,
वह विरूआबाड़ी रोड देखो मंदिरों की शान है,
ये है जमीन फानी की, ये है शकील जोश की,
अवस्थी का नगर है ये, यहीं मुकीम हैं जकी।
इसके अलावा विनोद सूर्यवंशी, विष्णुगोपाल अनुरागी, भानु प्रकाश भानु, प्यारे सिंह शिशु, मनीष प्रेम, अभिषेक तन्हा, अनंग पाल, जयवीर चंद्रवंशी ने भी काव्य पाठ किया। इससे पूर्व डॉ. मिश्र ने कवियों को भी सम्मानित किया। कार्यक्र में केशव मिश्रा, विवेक, अमित चौधरी, सोमेंद्र यादव, अनिल कुमार, नरवीर, धर्मेंद्र कुमार, बलवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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