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भरी जवानी में फांसी के फंदे पर जो झूल गया...
badaun
Updated Tue, 24 Mar 2015 11:57 PM IST
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स्मृति वंदन संस्था की ओर से नेकपुर स्थित संस्था कार्यालय पर अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के बलिदान दिवस पर ‘एक शाम शहीदों के नाम’ काव्य संध्या एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों, साहित्यकारों और सामाजिक विचारकों ने शहीदों के जीवन के प्रेरणात्मक विचार व्यक्त किए। आजादी के महत्व पर प्रकाश डाला।
शुभारंभ में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार महेश मित्र एवं अध्यक्षता कर रहे प्यारे सिंह शिशु ने मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण किया। कवि अभिषेक अनंत ने कहा-
कहां गए वो भगत कहां शेरे पंजाब जवानी,
कहां गए आजादी सिसकती आजादी की कहानी।
कुमार आशीष ने कहा-
भरी जवानी में फांसी के फंदे पर जो झूल गया,
उसी भगत को आज देश ये आखिर कैसे भूूल गया,
रंगा हुआ है आज विदेशी रंग में हर हिंदुस्तानी,
वीर शहीदों का लगता है हर बलिदान फिजूल गया।
भारत शर्मा ने कहा-
सदा सींचता हुआ लहू से तुमको अपना वतन मिलेगा,
देश प्रेम के भावों में वो हरदम तुमको मगन दिखेगा,
देश पे मरने की ख्वाहिश और इससे ज्यादा क्या होगी,
फौजी के बक्से में तुमको सबसे ऊपर कफन मिलेगा।
डॉ. अरविंद धवल ने पढ़ा-
नेह भर के लहू का वर्तिका प्रण की सजाऊं,
तुम विजय के दीप वारो, शौर्य के मैं गीत गाऊं।
भूराज सिंह राजलॉयर ने पढ़ा-
जो समय के वक्ष पर पग रख सतत बढ़ता गया,
गीत जो आलोक के तम में सतत गढ़ता गया,
राष्ट्र वेदी में हुआ आहूत वो कुंदन बना,
जिंदगी उसको मिली जो मौत से लड़ता गया।
इसके अलावा महेश मित्र, भानु प्रकाश भानु, अभिषेक तन्हा, प्यारे सिंह ने काव्यपाठ पढ़ा। इस मौके पर बिन्नी, चंद्रपाल सिंह सरल, विष्णु गोपाल अनुरागी, जवाहर सिंह, डॉ. वीपी सिंह सोलंकी, राकेश गुप्ता, दीपक सक्सेना, रवींद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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शुभारंभ में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार महेश मित्र एवं अध्यक्षता कर रहे प्यारे सिंह शिशु ने मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण किया। कवि अभिषेक अनंत ने कहा-
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कहां गए वो भगत कहां शेरे पंजाब जवानी,
कहां गए आजादी सिसकती आजादी की कहानी।
कुमार आशीष ने कहा-
भरी जवानी में फांसी के फंदे पर जो झूल गया,
उसी भगत को आज देश ये आखिर कैसे भूूल गया,
रंगा हुआ है आज विदेशी रंग में हर हिंदुस्तानी,
वीर शहीदों का लगता है हर बलिदान फिजूल गया।
भारत शर्मा ने कहा-
सदा सींचता हुआ लहू से तुमको अपना वतन मिलेगा,
देश प्रेम के भावों में वो हरदम तुमको मगन दिखेगा,
देश पे मरने की ख्वाहिश और इससे ज्यादा क्या होगी,
फौजी के बक्से में तुमको सबसे ऊपर कफन मिलेगा।
डॉ. अरविंद धवल ने पढ़ा-
नेह भर के लहू का वर्तिका प्रण की सजाऊं,
तुम विजय के दीप वारो, शौर्य के मैं गीत गाऊं।
भूराज सिंह राजलॉयर ने पढ़ा-
जो समय के वक्ष पर पग रख सतत बढ़ता गया,
गीत जो आलोक के तम में सतत गढ़ता गया,
राष्ट्र वेदी में हुआ आहूत वो कुंदन बना,
जिंदगी उसको मिली जो मौत से लड़ता गया।
इसके अलावा महेश मित्र, भानु प्रकाश भानु, अभिषेक तन्हा, प्यारे सिंह ने काव्यपाठ पढ़ा। इस मौके पर बिन्नी, चंद्रपाल सिंह सरल, विष्णु गोपाल अनुरागी, जवाहर सिंह, डॉ. वीपी सिंह सोलंकी, राकेश गुप्ता, दीपक सक्सेना, रवींद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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