{"_id":"0b4f6ab9486a73f3ee7eb3b7799907b5","slug":"kasturba-school-hindi-news-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"बा स्कूलों में औने-पौने दामों में हो रही मनमाफिक सप्लाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बा स्कूलों में औने-पौने दामों में हो रही मनमाफिक सप्लाई
बदायूं।
Updated Wed, 08 Apr 2015 11:34 PM IST
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बेसिक शिक्षा विभाग में मनमानी उजागर होने लगी है। विभाग के संरक्षण के
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चलते सप्लायर जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में औने-पौने
दामों में मनमाफिक सप्लाई कर रहे हैं। इतना ही नहीं बेसिक शिक्षा विभाग के
आदेशों का हवाला देते हुए वार्डनों पर जबरन दबाव बनाकर सामान उतारा जा रहा
है। जिसकी जरूरत है वह भी और जिसकी नहीं उसकी भी सप्लाई की जा रही है। वहीं
विभाग भी पूरे बिल समय से पास कर रहा है।
जिले में 18 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल संचालित हैं। यहां सौ छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं। इनके खाद्यान्न के अलावा दैनिक जरूरतों की चीजों को नियम के मुताबिक सप्लायर द्वारा सप्लाई कराया जाता है। आरोप है कि इस बार मानकों को ताक पर रखकर सप्लाई कराई जा रही है। बताते हैं कि वैन से सप्लायर के लोग सामान लेकर आते हैं और स्कूल में डालकर चले जाते हैं। मना करने पर विभागीय अधिकारियों के आदेश होने का हवाला देता है और तो और डराते धमकाते जबरन दबाव तक बनाया जाता है। बुधवार को हुई बैठक में इसकी वास्तविकता भी सामने आ गई। जब सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी और जिला समन्वयक के सामने एकाउंटेंटों ने समस्या रखी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में जो भी सप्लाई किया जा रहा है। सब में रेट में जमीन आसमान का अंतर है। इसके अलावा बेमौसम का समान भी भेजा जा रहा है। वार्डनों ने आरोप लगाते हुए ये बातें रखीं। हालांकि इस पर विभागीय अधिकारियों ने कोई संतुष्ट भरा जवाब नहीं दिया। एकाउंटेंट और वार्डनों ने कहा कि वह इसकी शिकायत सुनवाई न होने पर उच्चाधिकारियों के समक्ष रखेंगे, ताकि वास्तविकता से पर्दा उठ सके।
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दिसंबर में जारी हुआ टेंडर, सप्लाई हो रही मार्च में
बदायूं। बैठक में बताया गया कि जो टेंडर दिसंबर में हुआ, उस समान की सप्लाई भी वित्तीय वर्ष बीतने के बाद की जा रही है। इसमें दरी, कुर्सी, मच्छरदानी, गैस बुझाने का सिलेंडर आदि शामिल है। बताया कि इनके रेट में भी बाजार के रेट से काफी अंतर है। यह काफी महंगा है।
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जिला समन्वयक ने बैठक बुलाई थी। सप्लाई को लेकर मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। न ही बैठक में किसी एकाउंटेंट और वार्डन ने शिकायत की है। इसकी जानकारी नहीं है। अगर शिकायत या जानकारी मिलती है, तो इसे दिखवाया जाएगा।
- जगदीश सिंह, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी(एसएसए)
जिले में 18 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल संचालित हैं। यहां सौ छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं। इनके खाद्यान्न के अलावा दैनिक जरूरतों की चीजों को नियम के मुताबिक सप्लायर द्वारा सप्लाई कराया जाता है। आरोप है कि इस बार मानकों को ताक पर रखकर सप्लाई कराई जा रही है। बताते हैं कि वैन से सप्लायर के लोग सामान लेकर आते हैं और स्कूल में डालकर चले जाते हैं। मना करने पर विभागीय अधिकारियों के आदेश होने का हवाला देता है और तो और डराते धमकाते जबरन दबाव तक बनाया जाता है। बुधवार को हुई बैठक में इसकी वास्तविकता भी सामने आ गई। जब सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी और जिला समन्वयक के सामने एकाउंटेंटों ने समस्या रखी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में जो भी सप्लाई किया जा रहा है। सब में रेट में जमीन आसमान का अंतर है। इसके अलावा बेमौसम का समान भी भेजा जा रहा है। वार्डनों ने आरोप लगाते हुए ये बातें रखीं। हालांकि इस पर विभागीय अधिकारियों ने कोई संतुष्ट भरा जवाब नहीं दिया। एकाउंटेंट और वार्डनों ने कहा कि वह इसकी शिकायत सुनवाई न होने पर उच्चाधिकारियों के समक्ष रखेंगे, ताकि वास्तविकता से पर्दा उठ सके।
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दिसंबर में जारी हुआ टेंडर, सप्लाई हो रही मार्च में
बदायूं। बैठक में बताया गया कि जो टेंडर दिसंबर में हुआ, उस समान की सप्लाई भी वित्तीय वर्ष बीतने के बाद की जा रही है। इसमें दरी, कुर्सी, मच्छरदानी, गैस बुझाने का सिलेंडर आदि शामिल है। बताया कि इनके रेट में भी बाजार के रेट से काफी अंतर है। यह काफी महंगा है।
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जिला समन्वयक ने बैठक बुलाई थी। सप्लाई को लेकर मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। न ही बैठक में किसी एकाउंटेंट और वार्डन ने शिकायत की है। इसकी जानकारी नहीं है। अगर शिकायत या जानकारी मिलती है, तो इसे दिखवाया जाएगा।
- जगदीश सिंह, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी(एसएसए)