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अफसरों को नहीं बा स्कूल की छात्राओं की फिक्र
बदायूं।
Updated Fri, 12 Dec 2014 12:02 AM IST
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कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं की फिक्र विभागीय अफसरों को नहीं है। यहीं कारण है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी इन पर अमल नहीं किया गया है। हाल यह है कि छात्राएं स्कूल में डर कर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। वार्डनों की ओर से छह महीने से की जा रहीं दर्जनों शिकायतें आज भी पेंडिंग पड़ी हैं। जबकि स्थलीय निरीक्षण में भी यह खामी उजागर होकर सामने आ चुकी हैं। फिर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया।
लाख कोशिशों के बाद भी बा स्कूलों की सेहत सुधारी नहीं जा रही है। वार्डनों का आरोप है कि कई बार डीसी और एसएसए अफसरों को की जाने वाली शिकायतों को दबा दिया जाता है। तो किसी-किसी को अनसुना कर दिया जाता है। हाल यह है कि विभागीय अनदेखी के चलते आज व्यवस्थाएं बिगड़ती जा रही हैं। स्कूल की मरम्मत के नाम पर विभाग कुछ भी कराने को तैयार नहीं है। बताते हैं कि जिले में 18 बा स्कूलों में कोई न कोई कमियां हैं।
वार्डनों का आरोप है कि बा स्कूलों में जहां खिड़की दरवाजे टूटे पड़े थे। वहीं पानी की लिकेज, बिजली व्यवस्था की दशा खराब है। कई बार हुए स्थलीय निरीक्षण के बाद खिड़की दरवाजों की मरम्मत तो सुधारने का काम शुरू कर दिया गया। लेकिन पानी बहने की समस्या को फिर भी दूर नहीं किया गया। बताते हैं कि लिकेज इतना है कि वह दीवारों से होता हुआ, इलेक्ट्रिक बोर्ड तक में चला जाता है। इससे करंट फैलने का खतरा तक बना रहता है। मोंगर बा स्कूल की वार्डन मंजू राठौर बताती हैं कि सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी से कई बार इस संदर्भ में बताया जा चुका है। लेकिन फिर भी शिकायतों को अनदेखा किया जाता रहा। बताती हैं कि इसी प्रकार वजीरगंज और इसके अलावा अन्य सुदूर क्षेत्रों में स्थित बा स्कूलों का भी यहीं हाल है। यहां सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त इंतजाम तक नहीं है। जबकि कई बार मासिक बैठक में इसके बारे में बताया जा चुका है।
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बा स्कूलों की वार्डनों की ओर से आने वाली समस्याओं को दूर किया जाता है। खिड़की दरवाजे ठीक कराए जा रहे हैं। कई जगह ठीक भी हो चुके हैं। रहीं बात लिकेज की तो उसे भी ठीक कराने के लिए बोला गया है। छात्राओं की सेहत और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। -जगदीश सिंह, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान।
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लाख कोशिशों के बाद भी बा स्कूलों की सेहत सुधारी नहीं जा रही है। वार्डनों का आरोप है कि कई बार डीसी और एसएसए अफसरों को की जाने वाली शिकायतों को दबा दिया जाता है। तो किसी-किसी को अनसुना कर दिया जाता है। हाल यह है कि विभागीय अनदेखी के चलते आज व्यवस्थाएं बिगड़ती जा रही हैं। स्कूल की मरम्मत के नाम पर विभाग कुछ भी कराने को तैयार नहीं है। बताते हैं कि जिले में 18 बा स्कूलों में कोई न कोई कमियां हैं।
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वार्डनों का आरोप है कि बा स्कूलों में जहां खिड़की दरवाजे टूटे पड़े थे। वहीं पानी की लिकेज, बिजली व्यवस्था की दशा खराब है। कई बार हुए स्थलीय निरीक्षण के बाद खिड़की दरवाजों की मरम्मत तो सुधारने का काम शुरू कर दिया गया। लेकिन पानी बहने की समस्या को फिर भी दूर नहीं किया गया। बताते हैं कि लिकेज इतना है कि वह दीवारों से होता हुआ, इलेक्ट्रिक बोर्ड तक में चला जाता है। इससे करंट फैलने का खतरा तक बना रहता है। मोंगर बा स्कूल की वार्डन मंजू राठौर बताती हैं कि सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी से कई बार इस संदर्भ में बताया जा चुका है। लेकिन फिर भी शिकायतों को अनदेखा किया जाता रहा। बताती हैं कि इसी प्रकार वजीरगंज और इसके अलावा अन्य सुदूर क्षेत्रों में स्थित बा स्कूलों का भी यहीं हाल है। यहां सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त इंतजाम तक नहीं है। जबकि कई बार मासिक बैठक में इसके बारे में बताया जा चुका है।
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बा स्कूलों की वार्डनों की ओर से आने वाली समस्याओं को दूर किया जाता है। खिड़की दरवाजे ठीक कराए जा रहे हैं। कई जगह ठीक भी हो चुके हैं। रहीं बात लिकेज की तो उसे भी ठीक कराने के लिए बोला गया है। छात्राओं की सेहत और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। -जगदीश सिंह, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान।