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कान्हा के स्वागत को जगमगा उठे शहर के मंदिर
ब्यूरो, अमर उजाला बदायूं
Updated Thu, 10 Sep 2015 12:17 AM IST
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जन्माष्टमी के बाद शुरू होने वाले इस महोत्सव को भले ही जिले में अन्य जगहों पर इतने विशाल तौर पर नहीं मनाया जाता रहा हो लेकिन बदायूं शहर में इसे भक्तों ने विशेष महत्व दिया है। वर्षों से यहां की अनूठी परंपरा रही है। शहर में बिरुआबाड़ी मंदिर, हरप्रसाद मंदिर, रघुनाथ मंदिर, गौरी शंकर मंदिर, गौरी शंकर देवालय, नवाब नौवत राय का मंदिर, शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, दरीबा मंदिर आदि शहर के सभी मंदिरों को सजाया गया।
पूरा शहर जैसे मेले में हो गया तब्दील
बदायूं। मंदिरों की खूबसूरती और स्वचालित झांकियां देखने के लिए शाम होते ही भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह मंदिरों के पास दुकानदारों, ठेले-खोमचे वालो ने खाने पीने का सामान सजा रखा था। बच्चों के लिए गुब्बारे और खिलौने आदि भी बिक रहे थे। बच्चे, बूढ़े, नर, नारी सभी का उत्साह देखते ही बनता था।
कलाकारों की कृतियां देख लोग हतप्रभ
बदायूं। मंदिरों में झांकियां सजाने के लिए आगरा, बरेली, दिल्ली के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई प्रांतों के कलाकारों ने झांकियां सजाईं। झांकियां तैयार करने में उन्हें कई दिन लगे। लंबे समय से मंदिरों में इस पर्व के लिए तैयारियां चल रहीं थीं।
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पूरा शहर जैसे मेले में हो गया तब्दील
बदायूं। मंदिरों की खूबसूरती और स्वचालित झांकियां देखने के लिए शाम होते ही भीड़ उमड़ पड़ी। जगह-जगह मंदिरों के पास दुकानदारों, ठेले-खोमचे वालो ने खाने पीने का सामान सजा रखा था। बच्चों के लिए गुब्बारे और खिलौने आदि भी बिक रहे थे। बच्चे, बूढ़े, नर, नारी सभी का उत्साह देखते ही बनता था।
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कलाकारों की कृतियां देख लोग हतप्रभ
बदायूं। मंदिरों में झांकियां सजाने के लिए आगरा, बरेली, दिल्ली के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई प्रांतों के कलाकारों ने झांकियां सजाईं। झांकियां तैयार करने में उन्हें कई दिन लगे। लंबे समय से मंदिरों में इस पर्व के लिए तैयारियां चल रहीं थीं।
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