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जलस्तर में गिरावट से बिगड़ा कछला गंगाघाट का भूगोल, दूसरे छोर की तरफ बढ़ी धार

Thu, 01 Oct 2020 02:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2020 02:07 AM IST
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kachhla ganga
उझानी (बदायूं)। जीवनदायिनी में इस बार दो महीना पहले ही जलस्तर में तेजी से गिरावट ने आसपास के प्रसाद विक्रेताओं समेत चाट-पकौड़ी वाले दुकानदारों को परेशानी में डाल दिया है। जलधारा भी सिकुड़ती जा रही है। हालांकि इस वक्त दो धाराएं अस्तित्व में हैं, लेकिन बदायूं जिले के छोर के घाट पर घुटनों तक ही जल नजर आता है। यही नहीं पुल से पश्चिमी छोर पर करीब एक किलोमीटर तक बीच-बीच में रेतीले टापू छूट गए हैं। दक्षिणी साइड में जलधारा का रुख बढ़ने से इसका सीधा असर घाटों के भूगोल पर पड़ गया।
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कछला गंगाघाट पर पिछले साल अक्तूबर महीना तक जलधारा आरती स्थल से चंद कदम दूरी पर रही थी। पूरे फांट में तो नहीं लेकिन बीचोबीच होकर जलधारा गुजरने से श्रद्धालुओं को भी स्नान और पूजा-अर्चना के लिए ज्यादा दूर तक जाना नहीं पड़ता था। इस बार मानसून पिछले साल के मुकाबले कम दिन तक ठहरा, सो गंगा की जलधारा भी सितंबर महीना के दूसरे सप्ताह से ही सिकुड़ने लग गई। गंगा किनारे के लोगों में प्रेमपाल और नेमचंद्र ने बताया कि जलस्तर में इसी तरह गिरावट रही तो जेठ-बैसाख के महीना में जलधारा काफी कम रकबा में रहेगी। फिलहाल ही वह बदायूं जिले के छोर से खिसक कर दक्षिणी ओर बढ़ती जा रही है। कछला पुल के पास जो दो जलधारा नजर आ रही हैं, आने दिनों में वह एक होकर दक्षिणी छोर पर नजर आएगी। हुसैनपुर खेड़ा से कछला पुल तक एक दर्जन स्थानों पर रेत के टापू छूट गए हैं। प्रसाद विक्रेताओं और पुरोहितों की मानें तो जलस्तर में गिरावट की वजह से ही उन्हें सितंबर महीना में ही तीन बार झोपड़ीनुमा दुकानें समेट कर आगे खिसकना पड़ा है। इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है। कासगंज जिले के छोर वाले दोनों घाट पर ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बढे़गी। यहां तक इस ओर के नाविकों को भी दूसरे छोर के घाटों की ओर रुख करना पड़ेगा।
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भूगोल बिगड़ने से ही खाम की जमीनों पर छिड़ती हैं जंग
उझानी। बाढ़ के बाद गंगा के जलस्तर में गिरावट आती है तो आसपास इलाके में हजारों बीघा रकबा खाली पड़ा नजर आता है। खाली जमीनें ज्यादातर गंगा किनारे के गांवों और कसबों के लोगों की होती है, लेकिन बाढ़ के दौरान उनका वजूद ही मिट जाता है। इसके बाद खाली जमीनों पर मालिकाना हक साबित करने के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ती है, जो लोग प्रभावशाली होते हैं, वह पहले के मुकाबले ज्यादा रकबा पर कब्जा कर लेते हैं। बहोरानगला खाम को लेकर पिछले दिनों झगड़े की आशंका बढ़ी तो राजस्व विभाग को हस्तक्षेप करना पड़ा। दो साल पहले कासगंज और बदायूं जिले के गंगा के सीमावर्ती गांवों के किसानों में लंबी जंग चली थी।
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