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जिपं सदस्य : पुसगवां के दो प्रबल दावेदारों के पर्चे खारिज
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बदायूं। पुसगवां सीट से जिला पंचायत सदस्य के लिए निर्दलीय उम्मीदवार राजबाला और शीला का पर्चा खारिज हो गया है। दोनों के खिलाफ दो दिन पहले दो थानों में मामले दर्ज कराए गए थे। इसकी शिकायत पर हुई जांच के बाद इनका पर्चा निरस्त किया गया है। गौरतलब हो कि राजबाला पूर्व में विजयी प्रत्याशी कांति देवी की रिश्तेदार हैं। कांतिदेवी की चुनाव परिणाम की घोषणा से पहले मौत हो गई थी। संबंधित प्रत्याशी इसे लेकर सोमवार को मोर्चा खोल सकते हैं।
बिल्सी की पुसगवां सीट से डॉ. वीपी सिंह सोलंकी की पत्नी कांति देवी ने जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीता था। हालांकि चुनाव का नतीजा आने से पहले उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके मुकाबले भाजपा नेता राजेश्वर सिंह पटेल की पत्नी मेखला सिंह उस वक्त भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव हार गई थीं। उप चुनाव में रविवार को मेखला सिंह ने दोबारा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर आवेदन दाखिल किया था। इधर, कांति देवी की देवरानी राजबाला पत्नी उमेश ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। वहीं शीला पत्नी नेत्रपाल ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। शीला व राजबाला के नामांकन को देर रात निरस्त कर दिया गया।
इन दोनों के खिलाफ बिल्सी व उझानी थाने में दर्ज मारपीट के मामलों को आधार बताकर शिकायत की गई थी। जबकि एक-दो दिन पहले ही मामले दर्ज हुए हैं। दोनों प्रत्याशियों की ओर से चुनाव अधिकारियों से इस बात का विरोध जताया गया कि खामोशी से यह झूठे मामले प्रायोजित तरीके से दर्ज कराए गए हैं। उन्हें इनके बारे में जानकारी ही नहीं थी, जो घोषणा पत्र में लिखी जाती। इस मामले में सोमवार को शिकायत करने की बात कही जा रही है।
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वहीं, जांच अधिकारी उप निदेशक, कृषि रामवीर कटारा ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि 15 पर्चे दाखिल हुए थे। इनमें दो को रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दिया गया।
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बिल्सी की पुसगवां सीट से डॉ. वीपी सिंह सोलंकी की पत्नी कांति देवी ने जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीता था। हालांकि चुनाव का नतीजा आने से पहले उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके मुकाबले भाजपा नेता राजेश्वर सिंह पटेल की पत्नी मेखला सिंह उस वक्त भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव हार गई थीं। उप चुनाव में रविवार को मेखला सिंह ने दोबारा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर आवेदन दाखिल किया था। इधर, कांति देवी की देवरानी राजबाला पत्नी उमेश ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। वहीं शीला पत्नी नेत्रपाल ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। शीला व राजबाला के नामांकन को देर रात निरस्त कर दिया गया।
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इन दोनों के खिलाफ बिल्सी व उझानी थाने में दर्ज मारपीट के मामलों को आधार बताकर शिकायत की गई थी। जबकि एक-दो दिन पहले ही मामले दर्ज हुए हैं। दोनों प्रत्याशियों की ओर से चुनाव अधिकारियों से इस बात का विरोध जताया गया कि खामोशी से यह झूठे मामले प्रायोजित तरीके से दर्ज कराए गए हैं। उन्हें इनके बारे में जानकारी ही नहीं थी, जो घोषणा पत्र में लिखी जाती। इस मामले में सोमवार को शिकायत करने की बात कही जा रही है।
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वहीं, जांच अधिकारी उप निदेशक, कृषि रामवीर कटारा ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि 15 पर्चे दाखिल हुए थे। इनमें दो को रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दिया गया।