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गंगा में खंडित मूर्तियों को न डालने का संदेश देकर मनाया जल दिवस
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गंगा नदी में सफाई करतीं शिप्रा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। वाटर वूमेन शिप्रा पाठक ने मंगलवार को कछला गंगाघाट पर स्वयंसेवकों के साथ सफाई की। उन्होंने बताया कि सरकार के स्तर से सफाई कराने के प्रयास हो रहे हैं पर लोगों की धारणा बदलने की जरूरत है। लोग अब भी खंडित मूर्तियां गंगा में विसर्जित कर जाते हैं या किनारे रख जाते हैं। इसके लिए सजग होना होगा।
विश्व जल दिवस पर शिप्रा पाठक कछला घाट पहुंचीं। वहां उन्होंने गंगा आरती में शामिल होकर मौजूद स्वयंसेवकों व स्थानीय लोगों को जल शपथ दिलाई। कहा कि सरकार नियम बनाती है। हमारे संस्कार उन्हें पालन करना सिखाते हैं। जल के प्रति सभी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी लेनी होगी। कहा कि पृथ्वी की सतह पर मौजूद सभी जल में से केवल तीन फीसदी ही मीठा जल पीने योग्य बचा है। इसी के सहारे पृथ्वी पर अधिकतर लोग जीवन का निर्वाह करते हैं। यदि हम इसकी कद्र नहीं करेंगे तो यह हमारे जीवन व जीविका का अंत ही होगा। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, हमें अपने जंगलों और नदियों को बचाकर पानी का संरक्षण करने के लिए कुछ सार्थक प्रयास करने चाहिए।
शिप्रा ने कहा कि हमें गंगा में प्लास्टिक या कोई ऐसे तत्व विसर्जित नहीं करने चाहिए जो गंगा को मैला करें। उन्हें सफाई के दौरान गंगा किनारे कई मूर्तियां व कलेंडर मिले जिन्हें लोग छोड़ गए थे। उनका कहना था कि आस्थावश लोग ऐसा करते हैं पर इससे नदियों का जल दूषित होता है। इसके लिए सरकार को ठोस नीति बनाने की जरूरत है जिससे जल की शुद्धता बनी रहे और लोगों की आस्था भी प्रभावित न हो।
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‘पानी के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं कर सकते’
बदायूं। ऐस (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में विश्व जल दिवस पर हुई गोष्ठी में प्रवक्ताओं व छात्र-छात्राओं ने जल के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि पानी के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
इंस्टीट्यूट के निदेशक इंजीनियर रचित गोयल, प्राचार्य डॉ. मनेाज श्रीवास्तव ने कहा कि दिन-प्रतिदिन अनावश्यक उपयोग कर जल को बहाया जा रहा है। इसमें परिणामस्वरूप जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। हम सभी को जल संरक्षित करने व समाज को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रण लेना चाहिए। इस मौके पर प्रवक्ता अफसार अहमद, मुस्तफीज उल गनी, अंशू श्रीवास्तव, अनुरोध मिश्रा, शिखर मिश्रा, लोकेश कुमार, मोहित भारद्वाज, विजेंद्र पाल, रजनी सिंह, रागिनी गुप्ता, अमिता, अनुराग, शक्ति बाबू, पुन्या, भावना, प्रियांशी, मुन्ना बाबू आदि मौजूद रहे। संवाद
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जल संरक्षण का महत्व समझाया
उझानी। बांके बिहारी कन्या पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के एक दिनी शिविर में स्वयंसेविकाओं को जल संरक्षण के बारे में बताया गया। मुख्य वक्ता डॉ. अवनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि बेहतर कल के लिए पानी को बर्बाद होने से बचाना होगा। तालाबों में बारिश के पानी का संरक्षण किया जाना आवश्यक हो गया है। प्राचार्य डॉ. नीरज रस्तोगी ने भी विचार रखे। इस मौके पर नवीन कुमार, सरला शर्मा, सरनाम सिंह, कुसुम यादव, शाही रिजवी, श्वेता सिंह, मनोज कुमार, अंजू सक्सेना और दिनेश उपाध्याय आदि मौजूद रहे। संवाद
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विश्व जल दिवस पर शिप्रा पाठक कछला घाट पहुंचीं। वहां उन्होंने गंगा आरती में शामिल होकर मौजूद स्वयंसेवकों व स्थानीय लोगों को जल शपथ दिलाई। कहा कि सरकार नियम बनाती है। हमारे संस्कार उन्हें पालन करना सिखाते हैं। जल के प्रति सभी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी लेनी होगी। कहा कि पृथ्वी की सतह पर मौजूद सभी जल में से केवल तीन फीसदी ही मीठा जल पीने योग्य बचा है। इसी के सहारे पृथ्वी पर अधिकतर लोग जीवन का निर्वाह करते हैं। यदि हम इसकी कद्र नहीं करेंगे तो यह हमारे जीवन व जीविका का अंत ही होगा। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, हमें अपने जंगलों और नदियों को बचाकर पानी का संरक्षण करने के लिए कुछ सार्थक प्रयास करने चाहिए।
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शिप्रा ने कहा कि हमें गंगा में प्लास्टिक या कोई ऐसे तत्व विसर्जित नहीं करने चाहिए जो गंगा को मैला करें। उन्हें सफाई के दौरान गंगा किनारे कई मूर्तियां व कलेंडर मिले जिन्हें लोग छोड़ गए थे। उनका कहना था कि आस्थावश लोग ऐसा करते हैं पर इससे नदियों का जल दूषित होता है। इसके लिए सरकार को ठोस नीति बनाने की जरूरत है जिससे जल की शुद्धता बनी रहे और लोगों की आस्था भी प्रभावित न हो।
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‘पानी के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं कर सकते’
बदायूं। ऐस (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में विश्व जल दिवस पर हुई गोष्ठी में प्रवक्ताओं व छात्र-छात्राओं ने जल के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि पानी के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
इंस्टीट्यूट के निदेशक इंजीनियर रचित गोयल, प्राचार्य डॉ. मनेाज श्रीवास्तव ने कहा कि दिन-प्रतिदिन अनावश्यक उपयोग कर जल को बहाया जा रहा है। इसमें परिणामस्वरूप जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। हम सभी को जल संरक्षित करने व समाज को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रण लेना चाहिए। इस मौके पर प्रवक्ता अफसार अहमद, मुस्तफीज उल गनी, अंशू श्रीवास्तव, अनुरोध मिश्रा, शिखर मिश्रा, लोकेश कुमार, मोहित भारद्वाज, विजेंद्र पाल, रजनी सिंह, रागिनी गुप्ता, अमिता, अनुराग, शक्ति बाबू, पुन्या, भावना, प्रियांशी, मुन्ना बाबू आदि मौजूद रहे। संवाद
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जल संरक्षण का महत्व समझाया
उझानी। बांके बिहारी कन्या पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के एक दिनी शिविर में स्वयंसेविकाओं को जल संरक्षण के बारे में बताया गया। मुख्य वक्ता डॉ. अवनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि बेहतर कल के लिए पानी को बर्बाद होने से बचाना होगा। तालाबों में बारिश के पानी का संरक्षण किया जाना आवश्यक हो गया है। प्राचार्य डॉ. नीरज रस्तोगी ने भी विचार रखे। इस मौके पर नवीन कुमार, सरला शर्मा, सरनाम सिंह, कुसुम यादव, शाही रिजवी, श्वेता सिंह, मनोज कुमार, अंजू सक्सेना और दिनेश उपाध्याय आदि मौजूद रहे। संवाद