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Budaun News: बहुत मुश्किल है विजय रुपाणी के सहज अंदाज को भुला पाना
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सिर्फ यादें... सितंबर महीना मेें यहां पहुंचने पर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का माल
उझानी। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की अहमदाबाद में विमान क्रैश होने से मौत हो गई है। 21 सितंबर को जब वह भाजपा के सदस्यता अभियान को धार देने के लिए यहां आए तो कार्यकर्ता उनके सहज और सरल व्यवहार के मुरीद हो गए थे। उस दिन बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के गांव हरजरतगंज में उन्होंने कार्यकर्ताओं से संवाद किया था।
उझानी मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष अजय तोमर ने बताया कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले दीप जलाने के लिए गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री आगे बढ़े तो मैं उनके पीछे खड़ा था। उन्होंने मुझे बराबर बुलाकर ही दीप जलाया। कार्यकर्ताओं को इस तरह से सम्मान देना उनकी महानता थी। विधायक हरीश शाक्य और जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता भी सदस्यता अभियान कार्यक्रम का हिस्सा थे। तत्कालीन नगर मंडल के अध्यक्ष अखिल अग्रवाल, कार्यकर्ताओं में अब्दुल्लागंज के आंनद मिश्रा और रियोनइया के प्रधान सुखपाल वर्मा भी कहते हैं कि उनके सहज अंदाज को भुला पाना आसान नहीं है।
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पूरे भाषण में सिर्फ संगठन को दी थी तरजीह
- विजय रुपाणी को याद कर भाजपा कार्यकर्ता आनंद मिश्रा कहते हैं कि उनका कार्यक्रम ही संगठन से जुड़ा था। सदस्यों को उनके दायित्व का बोध कराना और पार्टी को मजबूती प्रदान करने के टिप्स उन्हें आज भी याद हैं। वह संगठन को मजबूत करने के लिए ही आए थे। क्या पता था कि छोटे से कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को अभिभूत कर देने वाले रुपाणी असमय उनके बीच नही रहेंगे।
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उझानी मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष अजय तोमर ने बताया कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले दीप जलाने के लिए गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री आगे बढ़े तो मैं उनके पीछे खड़ा था। उन्होंने मुझे बराबर बुलाकर ही दीप जलाया। कार्यकर्ताओं को इस तरह से सम्मान देना उनकी महानता थी। विधायक हरीश शाक्य और जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता भी सदस्यता अभियान कार्यक्रम का हिस्सा थे। तत्कालीन नगर मंडल के अध्यक्ष अखिल अग्रवाल, कार्यकर्ताओं में अब्दुल्लागंज के आंनद मिश्रा और रियोनइया के प्रधान सुखपाल वर्मा भी कहते हैं कि उनके सहज अंदाज को भुला पाना आसान नहीं है।
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पूरे भाषण में सिर्फ संगठन को दी थी तरजीह
- विजय रुपाणी को याद कर भाजपा कार्यकर्ता आनंद मिश्रा कहते हैं कि उनका कार्यक्रम ही संगठन से जुड़ा था। सदस्यों को उनके दायित्व का बोध कराना और पार्टी को मजबूती प्रदान करने के टिप्स उन्हें आज भी याद हैं। वह संगठन को मजबूत करने के लिए ही आए थे। क्या पता था कि छोटे से कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को अभिभूत कर देने वाले रुपाणी असमय उनके बीच नही रहेंगे।
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