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कैसे मिले गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मास्साब नहीं जाते विद्यालय
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 11 Sep 2016 12:46 AM IST
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बीएसए का आदेश बेअसर, कार्रवाई होने के बावजूद नहीं हो रहा सुधार
जिले में बेसिक शिक्षा का बुरा हाल है। ऐसे में शासन द्वारा बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन शिक्षक ही उन सभी प्रयोगों पर पानी फेर रहे हैं। जिले में कुल 1800 प्राथमिक और 656 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों में लगभग 40 प्रतिशत तक शिक्षक विद्यालय जाते ही नहीं। ऐसे में शिक्षा में सुधार की बात बेतुकी लगती है।
जिले में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर निम्न है, जिसे बीएसए भी मानते हैं, क्योंकि बीएसए के निरीक्षण में चंद विद्यालयों को छोड़कर सभी विद्यालयों में बच्चों को अपना नाम तक लिखना नहीं आता। ऐसे में उन्होंने अब तक सैकड़ों शिक्षकों पर कार्रवाई भी की है, लेकिन शिक्षक हैं कि मानते ही नहीं। बीएसए द्वारा सख्ती और तमाम आदेशों के बावजूद शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंच रहे और बच्चे विद्यालय में आते और खोलकर चले जाते। यह स्थिति तब है जब प्रदेश के मुखिया के भाई लोकसभा से प्रतिनिधि हैं। उनके द्वारा भी कई बार इस संबंध में डीएम और बीएसए को निर्देश दिए जा चुके हैं।
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बीएसए कार्यालय से फोन द्वारा पूरे जिले के किसी भी शिक्षक की उपस्थिति लेने के लिए बीएसए पीसी यादव ने दो अनुदेशकों को कार्यालय में अटैच्ड किया। इन दोनों अनुदेशकों को फोन से शिक्षकों की उपस्थिति लेकर रिपोर्ट देनी होती है। सूत्रों की मानें तो फोन पर भी जिले के अधिकतर विद्यालयों में शिक्षक यातो गायब मिलते हैं या समय से विद्यालय नहीं पहुंचते हैं।
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जिले में कुछ विद्यालयों को छोड़ दें तो सभी विद्यालयों में शिक्षक बस मोबाइल पर बात करते या चैट करते दिखते हैं। बच्चों की संख्या विद्यालय में कितनी है इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। जबकि शासन ने परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए कितने ही कार्यक्रम चला रखे हैं।
जिले में बेसिक शिक्षा का बुरा हाल है। ऐसे में शासन द्वारा बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन शिक्षक ही उन सभी प्रयोगों पर पानी फेर रहे हैं। जिले में कुल 1800 प्राथमिक और 656 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों में लगभग 40 प्रतिशत तक शिक्षक विद्यालय जाते ही नहीं। ऐसे में शिक्षा में सुधार की बात बेतुकी लगती है।
जिले में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर निम्न है, जिसे बीएसए भी मानते हैं, क्योंकि बीएसए के निरीक्षण में चंद विद्यालयों को छोड़कर सभी विद्यालयों में बच्चों को अपना नाम तक लिखना नहीं आता। ऐसे में उन्होंने अब तक सैकड़ों शिक्षकों पर कार्रवाई भी की है, लेकिन शिक्षक हैं कि मानते ही नहीं। बीएसए द्वारा सख्ती और तमाम आदेशों के बावजूद शिक्षक विद्यालय नहीं पहुंच रहे और बच्चे विद्यालय में आते और खोलकर चले जाते। यह स्थिति तब है जब प्रदेश के मुखिया के भाई लोकसभा से प्रतिनिधि हैं। उनके द्वारा भी कई बार इस संबंध में डीएम और बीएसए को निर्देश दिए जा चुके हैं।
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बीएसए कार्यालय से फोन द्वारा पूरे जिले के किसी भी शिक्षक की उपस्थिति लेने के लिए बीएसए पीसी यादव ने दो अनुदेशकों को कार्यालय में अटैच्ड किया। इन दोनों अनुदेशकों को फोन से शिक्षकों की उपस्थिति लेकर रिपोर्ट देनी होती है। सूत्रों की मानें तो फोन पर भी जिले के अधिकतर विद्यालयों में शिक्षक यातो गायब मिलते हैं या समय से विद्यालय नहीं पहुंचते हैं।
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जिले में कुछ विद्यालयों को छोड़ दें तो सभी विद्यालयों में शिक्षक बस मोबाइल पर बात करते या चैट करते दिखते हैं। बच्चों की संख्या विद्यालय में कितनी है इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। जबकि शासन ने परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए कितने ही कार्यक्रम चला रखे हैं।