फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   holi

संस्मरण : अब वो रंग रहा न अबीर और गुलाल

Fri, 18 Mar 2022 12:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 18 Mar 2022 12:54 AM IST
विज्ञापन
holi
बदायूं। होली पर धमाल काफी होता है, बावजूद इसके बुजुर्गों का कहना है कि अब न वो रंग रहा न अबीर और गुलाल रहा। अब एक दिन ही रंगों की वर्षा होती है, जबकि उनके समय में 15 दिन पहले ही रंगों की वर्षा शुरू हो जाती थी। अब होली पर रंजिशें निकाली जाती हैं, जबकि उनके जमाने में होली ऐसा त्योहार था जिस पर पुरानी रंजिशें, गिले-शिकवे दूर हो जाया करते थे। इस्लामनगर के केएम इंटर कॉलेज से 1959 में हाईस्कूल पास करने वाले महेश शर्मा जीवन के 80 पड़ाव पार कर चुके हैं। कुंवरगांव के कसेर निवासी रिटायर्ड प्रधानाचार्य, पंडित देवादीन शर्मा समेत कई बुजुर्गों ने होली के कई संस्मरण साझा किए।
विज्ञापन

-------------
फोटो-60
बात 1950 के आस-पास की है, मेरा बचपन था। इस्लामनगर में होली से कुछ दिन पहले दो पक्षों के बीच बड़ा झगड़ा हुआ था। बड़े लोग कहते थे कि होली पर दोनों पक्ष एक बार फिर एक हो जाएंगे। करीब छह माह बाद होली थी। जिन लोगों में झगड़ा हुआ था वे एकदूसरे के घर गए। गिले-शिकवे भुला दिए और गले लग गए।
विज्ञापन

-महेश शर्मा
-
अब त्योहार पर धूमधाम एक ही दिन होती है। देश में इमरजेंसी के दौरान का वक्त याद है। उन दिनों काफी कुछ चीजें सीमित हो गई थीं। कांग्रेस का जमाना था। एक बार की बात है हुरियारों की टोली निकल रही थी। दो टोलियों ने एक दूसरे पर रंगों की वर्षा कर दी। घरों में घुस कर लोगों को पोतने में अलग ही मजा आता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

-ब्रजश्याम पोरवाल
-
घरों पर ही रंग बनाया जाता था। अब तो बाजारों में खाने-पीने का भी तैयार सामान बिकता है। पहले एक महीने पहले ही घर पर होली की तैयारी शुरू हो जाती थी। पूरा परिवार होली पर जुटता था। सब मिलकर होलिका पूजन को जाते थे। अब दूरियां बढ़ गई हैं। होली पर अब तो रंजिशें पूरी की जाती हैं।

-गिरवर
-
चार-पांच दशक पहले तक होली का अलग ही मजा था। फूलों से होली खेली जाती थी। घरों पर ही रंग बनाया जाता था। बचपन में होली के लिए ईंधन इकट्ठा करने के लिए दोस्तों के साथ कई दिन पहले से जुट जाते थे। कई बार घर पर मार भी पड़ती थी, लेकिन अब वह दौर गुजर गया है। होली पर एक दिन ही उल्लास होता है।
-पंडित देवादीन शर्मा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed