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फसल बर्बाद होने के बाद सूझा खुदकुशी का रास्ता

Wed, 08 Apr 2015 11:32 PM IST
दहगवां।
दहगवां। Updated Wed, 08 Apr 2015 11:32 PM IST
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Hit upon a way to commit suicide after crop failure
कर्ज और बेटे की मौत से राजपाल टूट चुके थे। फसल बर्बाद होने के बाद उनको
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खुदकुशी का रास्ता सूझा। करीब 15 साल पहले पत्नी की मौत के बाद राजपाल की जिंदगी इस तरह पटरी से उतरी कि वह संभल ही नहीं सके। बच्चों का पालन पोषण करने का जरिया उनकी सिर्फ पांच बीघा जमीन थी।
राजपाल कर्ज लेकर तीन बेटियों के हाथ पीले कर चुके थे। एक बेटे का भी उन्होंने ब्याह कर दिया था। पंजाब नेशनल बैंक की मडकावली (गुन्नौर) शाखा में उनकी जमीन बंधक थी। समय का पहिया घूमने के साथ राजपाल के सिर पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही गया। तीन महीने पहले बेटी की शादी के लिए साहूकार से कर्ज लिया। यह कर्ज चुकता होने से पहले बेटा वीरपाल बीमार हो गया। उसके इलाज में काफी रुपया लग गया, लेकिन कुछ दिनों पहले ही वीरपाल की मौत हो गई। बड़े बेटे की मौत और फसल बर्बाद होने के बाद राजपाल खुद को हारा हुआ महसूस करने लगे थे। हताश-निराश राजपाल को अब कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने खुदकुशी का रास्ता चुन लिया।
राजपाल के छोटे बेटे भगवान सिंह ने बताया कि उनके पिता ने गांव के ही बलवीर की जमीन बटाई पर ली थी। बेमौसम बारिश से पूरी फसल चौपट हो गईं। साहूकारों और बैंक का कर्ज भी चुकता करना था। इसको लेकर उसके पिता काफी तनाव में चल रहे थे। इसी के चलते उन्होंने ये आत्मघाती कदम उठाया।
इमदाद में देर होने से टूट रहा अन्नदाता का भरोसा
बदायूं।
अन्नदाता का भरोसा टूट रहा है। इमदाद में देरी से जिले में औसतन हर तीसरे दिन एक किसान फांसी के फंदे पर झूल कर जान दे रहा है। बेमौसम बारिश से बर्बाद हुए किसान को प्रशासन भरोसे में नहीं ले पा रहा है। 12 दिन में तीन किसानों ने फांसी के फंदे पर झूलकर जान दे दी और तीन की सदमें से मौत हो चुकी है।
बिसौली तहसील क्षेत्र केगांव खेड़ा दासपुर में 27 मार्च को कर्ज में डूबे किसान राजेश ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। प्रशासनिक अधिकारी राजेश के घर पहुंचे। कार्रवाई सिर्फ दावों और वायदों तक सीमित रही। इसके बाद दो अप्रैल को दातागंज तहसील के गांव गढ़ा में किसान सूरजपाल ने फांसी के फंदे पर झूलकर मौत को गले लगा लिया। पांच अप्रैल को उसहैत के गांव काकोरी में मुनेंद्र गिरी फांसी के फंदे पर झूल गए। सूरज और मुनेंद्र की मौत के बाद परिवारीजनों को
सिर्फ 54-50 सौ रुपये की आर्थिक सहायता मिली है।
ताजा मामला कर्ज में चिरवारी (संभल) के किसान राजपाल का है। राजपाल को भी फसल बर्बाद होने के बाद खुदकुशी का रास्ता ही नजर आया।
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मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मिलेगी मदद
जरीफनगर।
संभल की तहसील गुन्नौर के एसडीएम रामअरज यादव कहना है कि वैसे तो सुसाइड करने के मामले में मदद का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन मानवीय दृष्टि से राजपाल के परिवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मदद दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन मृतक आश्रितों को मदद देगा।
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