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अंग्रेजों ने पहले सहसवान को बनाया था जिला
बदायूं/विनोद भारद्वाज
Updated Sun, 25 Jan 2015 11:51 PM IST
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वर्ष 1801 में जिला अंग्रेजों के चंगुल में आ गया था। 1823 में अंग्रेजों
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ने सहसवान को जिला बनाकर वर्चस्व स्थापित कर लिया और 1855 में सहसवान की
जगह बदायूं को जिला बनाकर कामकाज शुरू कर दिया। उस समय जिले को पांच
तहसीलों सदर, दातागंज, बिसौली, गुन्नौर और सहसवान में बांटा गया था। इन
तहसीलों में बांटे गए अलग-अलग क्षेत्रों में लगान वसूलने के लिए बोली लगाकर
ठेके दिए जाते थे।
सबसे पहली बार 1803 में तीन साल के लिए बंदोबस्त का इंतजाम कराया गया था। वसूली से संबंधित काम तहसीलदारों की निगरानी में हुआ करता था। उस समय तहसीलदारों को वेतन नहीं दिया जाता था। कमीशन पर काम लिया जाता था। बाद में यह सब काम तहसीलदारों से हटाकर बोर्ड ऑफ रेवन्यू के सुपुर्द कर दिया गया।
1834 से 1837 तक दोबारा बंदोबस्त कराया गया। उसके बाद 1864 से 1870 में गवर्मेंट की मालगुजारी निर्धारित की गई। 1871 के बाद से गांवों की वसूली भी शुरू कर दी गई।
अंग्रेजों के समय बदायूं में 13 पुलिस स्टेशन बनाए गए थे। बाद में इनकी संख्या 16 कर दी गई। बदायूं, बिनावर, उझानी, कादरचौक, बिसौली, वजीरगंज, इस्लामनगर, गुन्नौर, रजपुरा, सहसवान, बिल्सी, उघैती, जरीफनगर, दातागंज, उसहैत, अलापुर, हजरतपुर और मूसाझाग उसी समय के थाने हैं। इस समय 21 थाने और 51 पुलिस चौकियां हैं।
1840 में ही बन गई थी जेल
बदायूूं में जेल की स्थापना 1840 में हुई, जो आगे चलकर नाकाफी रही। 1857 के विद्रोह में यह जेल नष्ट कर दी गई थी। विद्रोह शांत होने के बाद इसका जीर्णोद्धार कराया गया। अब इसे यहां से हटाने का प्रयास चल रहे हैं।
पहले बदायूं और बिल्सी ही थी म्युनिस्पिलटी
बदायूं और बिल्सी में 1862 में म्युनिस्पिलटी की स्थापना हुई। इसके बाद 1866 में उझानी और 1872 में सहसवान को यह दर्जा मिला। इस समय जिले में छह नगरपालिका और 14 नगर पंचायतें हैं। उप्र के एक्ट 1906 के अनुसार बदायूं में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की स्थापना की गई।
1846 में चंदा से बनवाया गया था जिला अस्पताल
बदायूं में 1846 में पहला अस्पताल बना। यह जिले के लोगों ने चंदा करके बनवाया था। बाद में इसे सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद गुन्नौर, बिसौली और दातागंज के अलावा सहसवान में भी अस्पताल खोले गए।
सबसे पहली बार 1803 में तीन साल के लिए बंदोबस्त का इंतजाम कराया गया था। वसूली से संबंधित काम तहसीलदारों की निगरानी में हुआ करता था। उस समय तहसीलदारों को वेतन नहीं दिया जाता था। कमीशन पर काम लिया जाता था। बाद में यह सब काम तहसीलदारों से हटाकर बोर्ड ऑफ रेवन्यू के सुपुर्द कर दिया गया।
1834 से 1837 तक दोबारा बंदोबस्त कराया गया। उसके बाद 1864 से 1870 में गवर्मेंट की मालगुजारी निर्धारित की गई। 1871 के बाद से गांवों की वसूली भी शुरू कर दी गई।
अंग्रेजों के समय बदायूं में 13 पुलिस स्टेशन बनाए गए थे। बाद में इनकी संख्या 16 कर दी गई। बदायूं, बिनावर, उझानी, कादरचौक, बिसौली, वजीरगंज, इस्लामनगर, गुन्नौर, रजपुरा, सहसवान, बिल्सी, उघैती, जरीफनगर, दातागंज, उसहैत, अलापुर, हजरतपुर और मूसाझाग उसी समय के थाने हैं। इस समय 21 थाने और 51 पुलिस चौकियां हैं।
1840 में ही बन गई थी जेल
बदायूूं में जेल की स्थापना 1840 में हुई, जो आगे चलकर नाकाफी रही। 1857 के विद्रोह में यह जेल नष्ट कर दी गई थी। विद्रोह शांत होने के बाद इसका जीर्णोद्धार कराया गया। अब इसे यहां से हटाने का प्रयास चल रहे हैं।
पहले बदायूं और बिल्सी ही थी म्युनिस्पिलटी
बदायूं और बिल्सी में 1862 में म्युनिस्पिलटी की स्थापना हुई। इसके बाद 1866 में उझानी और 1872 में सहसवान को यह दर्जा मिला। इस समय जिले में छह नगरपालिका और 14 नगर पंचायतें हैं। उप्र के एक्ट 1906 के अनुसार बदायूं में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की स्थापना की गई।
1846 में चंदा से बनवाया गया था जिला अस्पताल
बदायूं में 1846 में पहला अस्पताल बना। यह जिले के लोगों ने चंदा करके बनवाया था। बाद में इसे सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद गुन्नौर, बिसौली और दातागंज के अलावा सहसवान में भी अस्पताल खोले गए।