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गोलमाल : सैंपल महिला अस्पताल में और खून की जांच निजी लैब में
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बदायूं। सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का खेल गरीबों पर भारी पड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल में हालात ज्यादा खराब हैं। यहां जिम्मेदार ही अवैध रूप से संचालित निजी पैथोलॉजी लैब को बढ़ावा दे रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के सैंपल तो महिला अस्पताल में लिए जाते हैं, लेकिन जांच अस्पताल के बाहर अवैध रूप से संचालित लैब में कराई जा रही है।
जिला महिला अस्पताल में सभी तरह की आधुनिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। पैथोलॉजी जांच के लिए यहां आधुनिक उपकरणों से लैस लैब और पैथोलॉजिस्ट के रूप में डॉ. जयदीप ग्रेवाल की तैनाती है। एलटी के रूप में भी तनवीर हसन, आनंद दुबे, दीपेश कुमार, विनोद कुमार, मंजू राजपूत, प्रिंस माथुर और संजीव कुमार सात लोगों की तैनाती है। इसके बावजूद महिला अस्पताल की लैब में गर्भवती महिलाओं के रक्त की जांच न कर अवैध निजी लैबों पर कराई जा रही है। इसके लिए गर्भवती को 500 से 1000 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं।
जिला महिला अस्पताल के गेट पर ही एक छोटी सी दुकान में मानकों को दरकिनार करते हुए पैथोलॉजी लैब का संचालन हो रहा है। इस लैब में होने वाली कुल जांचों में 80 फीसदी से ज्यादा जिला महिला अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं की होती हैं। महिला अस्पताल के कुछ डॉक्टरों और पैथोलॉजी विभाग की मिलीभगत से खुलेआम भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। इसका खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ता है।
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वसूली से आगे नहीं बढ़ती झोलाछाप नियंत्रण सेल की कार्रवाई
अवैध रूप से संचालित लैब, नर्सिंगहोम के अलावा झोलाछाप पर कार्रवाई के लिए सीएमओ के अधीन झोलाछाप नियंत्रण सेल है। झोलाछाप नियंत्रण सेल के काम पर लगातार उंगलियां उठने पर तहसीलवार नोडल अधिकारियों को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई, इसके बाद भी शहर समेत आसपास के इलाकों में कार्रवाई वसूली से आगे नहीं बढ़ रही। गौर करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत नाम मात्र की लैब हैं जो मानकों को पूरा कर रही हैं। बाकी लैब का अवैध रूप से संचालन होता है। यह लैब झोलाछाप नियंत्रण सेल से जुड़े डॉक्टरों से लेकर बाबुओं तक की कमाई का जरिया बनी हुई है।
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वर्जन- 18
यह मामला संज्ञान में आया है कि जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का सैंपल लेने के बाद उनकी जांच निजी लैब पर कराई जा रही है। जांच कराई जा रही है, संबंधित लैब अगर मानकों को पूरा नहीं कर रही तो उसको सील किया जाएगा। महिला अस्पताल से सैंपल निजी लैब भेजने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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जिला महिला अस्पताल में सभी तरह की आधुनिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। पैथोलॉजी जांच के लिए यहां आधुनिक उपकरणों से लैस लैब और पैथोलॉजिस्ट के रूप में डॉ. जयदीप ग्रेवाल की तैनाती है। एलटी के रूप में भी तनवीर हसन, आनंद दुबे, दीपेश कुमार, विनोद कुमार, मंजू राजपूत, प्रिंस माथुर और संजीव कुमार सात लोगों की तैनाती है। इसके बावजूद महिला अस्पताल की लैब में गर्भवती महिलाओं के रक्त की जांच न कर अवैध निजी लैबों पर कराई जा रही है। इसके लिए गर्भवती को 500 से 1000 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं।
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जिला महिला अस्पताल के गेट पर ही एक छोटी सी दुकान में मानकों को दरकिनार करते हुए पैथोलॉजी लैब का संचालन हो रहा है। इस लैब में होने वाली कुल जांचों में 80 फीसदी से ज्यादा जिला महिला अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं की होती हैं। महिला अस्पताल के कुछ डॉक्टरों और पैथोलॉजी विभाग की मिलीभगत से खुलेआम भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। इसका खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ता है।
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वसूली से आगे नहीं बढ़ती झोलाछाप नियंत्रण सेल की कार्रवाई
अवैध रूप से संचालित लैब, नर्सिंगहोम के अलावा झोलाछाप पर कार्रवाई के लिए सीएमओ के अधीन झोलाछाप नियंत्रण सेल है। झोलाछाप नियंत्रण सेल के काम पर लगातार उंगलियां उठने पर तहसीलवार नोडल अधिकारियों को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई, इसके बाद भी शहर समेत आसपास के इलाकों में कार्रवाई वसूली से आगे नहीं बढ़ रही। गौर करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत नाम मात्र की लैब हैं जो मानकों को पूरा कर रही हैं। बाकी लैब का अवैध रूप से संचालन होता है। यह लैब झोलाछाप नियंत्रण सेल से जुड़े डॉक्टरों से लेकर बाबुओं तक की कमाई का जरिया बनी हुई है।
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वर्जन- 18
यह मामला संज्ञान में आया है कि जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का सैंपल लेने के बाद उनकी जांच निजी लैब पर कराई जा रही है। जांच कराई जा रही है, संबंधित लैब अगर मानकों को पूरा नहीं कर रही तो उसको सील किया जाएगा। महिला अस्पताल से सैंपल निजी लैब भेजने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ